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Gorakhpur News: पति को फिल्में देखने का शौक और पत्नी जाना चाहती तीर्थ पर..रिश्ते टूटने के कगार पर
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गोरखपुर। बुढ़ापे में पति-पत्नी को एक-दूसरे के साथ की बेहद जरूरत होती है, लेकिन नौकरीपेशा से जुड़े रहे दंपती एक-दूसरे की आदतों से परेशान हैं। कामकाज में व्यस्त पति रिटायर होने के बाद अपने शौक पूरा करना चाहता है तो पत्नी को अब इस उम्र में ये आदतें नहीं भाती। लिहाजा उम्र के अंतिम पड़ाव में भी दंपती के रिश्तों में खटपट बढ़ रही है। इससे रिश्ते टूटने के कगार पर पहुंच जा रहे हैं। ऐसे ही मामले महिला थाना में परामर्श केंद्र आए तो उनकी शिकायतें सुनकर पुलिस भी हैरान है। रिश्तों को बचाने के लिए उनकी काउंसिलिंग कराई जा रही है।
परिवार परामर्श केंद्र में बीते रविवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया। केंद्र पर 62 की उम्र पार कर चुके दंपती एक-दूसरे की आदतों से परेशान होकर पहुंचे और शिकायत करने लगे। पत्नी का कहना था कि नौकरी के समय पति अधिकतर समय काम में व्यस्त रहा करते थे। मैंने घर पर रहकर तीनों बेटों की परवरिश के साथ सास-ससुर की भी सेवा की। पति छुट्टियों में आते थे, तब ऐसी आदत नहीं थी। अब बच्चों की शादी भी हो चुकी है। सोचा था नौकरी के बाद दोनों साथ घूमने जाएंगे। परिवार के अन्य लोग तीर्थ पर जा रहे हैं। पति साथ जाना नहीं चाहते हैं। उनको फिल्में देखने का शौक है। दिनभर मोबाइल फोन और टीवी में ही लगे रहते हैं, जबकि मुझे फिल्में देखना बिल्कुल पसंद नहीं है। मना करने पर झगड़ा करते हैं।
घर में कोई मेरी बात सुनने वाला नहीं है। ऐसे में बेटों के पास जाकर रहना चाहती हूं। उनके पास जाने पर भी रिश्ते तोड़ने की बात कहते हैं। वहीं पति का कहना है कि फिल्में देखने से सीख मिलती है। पत्नी को दिनभर इधर-उधर की बात करने की आदत है। छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई करती है। बेटों के पास जाने की धमकी देती है। दोनों की काउंसिलिंग की गई।
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जमीन बेचकर दोस्तों के साथ घूमकर उड़ाते हैं रुपये
इसी तरह दूसरा मामला कुनराघाट से आया। इसमें पत्नी 55 वर्ष के पति की घूमने की आदत से परेशान है। कहा कि जमीन बेचकर दोस्तों के साथ मेरे पति की घूमने की आदत है। पत्नी ने केंद्र पहुंचकर पति को सुधारने की गुहार लगाई। उसने बताया कि बेटों के बाहर जाने के बाद पति दोस्तों के साथ ही अधिकतर समय बिताते हैं। रात में देर से घर आते हैं। घर में पहले बच्चे बोलने के लिए रहते थे, अब कोई बात करने वाला नहीं है। बिना बताए जमीन भी बेंच दी। उसके पैसों के बारे में पूछने पर मेरा पैसा कहकर लड़ने लगते हैं। समाज के कारण थाने नहीं जाना चाहती थी, लेकिन परेशान हो गई हूं। दो बार जमीन बेंच चुके हैं।
पति बोले, शक की है बीमारी, घूमने की बात पर गिनाती है खर्च
पति का कहना है अब जिम्मेदारी से मुक्त हो गया हूं। जब भी कहीं घूमने की बात कहता हूं तो खर्चे गिनाने लगती है। बच्चों की परवरिश में कोई शौक नहीं रखा। अब खुद के लिए जीना चाहता हूं। बेटों के जाने के बाद दिन भर सुनाती रहती है। मेरी कोई आदत इसे पसंद नहीं आती हैं। पहले बेटे थे तो वह सुनते थे, अब मुझे सुनना पड़ता है। ये बोलना कम करे तो घर में रहने में कोई दिक्कत नहीं है। एक जमीन घर के खर्चों के लिए बेची थी। उसके बारे में एक-एक रुपये के बारे में बता चुका हूं। शक की बीमारी है, कहती है कि दोस्तों पर पैसे लुटा रहा हूं।
कोट,
जब उम्र 60 की होने लगती है और व्यक्ति नौकरीपेशा से मुक्त हो जाता है तब पत्नी से तालमेल बिठा पाना मुश्किल होने लगता है। कामकाज के दौरान वह इतना व्यस्त रहता है कि पत्नी की भावनाओं को समझ नहीं पाता है। बुढ़ापे में उसके सामने कोई उद्देश्य जब नहीं होता है तो अपने शौक को पूरा करने के लिए जीवन साथी से उम्मीदें करने लगता है। बच्चे साथ होते नहीं है तो अनबन शुरू हो जाती है। यह इंप्टीनेट सिंड्रोम का लक्षण है। इसमें व्यक्ति अपने पर नियंत्रण नहीं कर पाता है।
डॉ. धनन्जय कुमार, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान विभाग, डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी
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बच्चों के बाहर जाने के बाद माता-पिता के बीच की कड़ी टूट जाती है। ऐसे में दोनों के बीच कुछ मनमुटाव हो सकते हैं। जिन्हें, उन्हें खुद ही सुलझाना पड़ता है। दोनों को बुलाकर समझाया गया है। साथ घूमने, पूजा-पाठ करने की सलाह दी गई है। दाेनों को एक-दूसरे की कमियों को अपनाकर साथ रहने की सलाह दी गई है। समय-समय पर फीडबैक के लिए बुलाया गया है।
अवनीश चौधरी, कांउसलर
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परिवार परामर्श केंद्र में बीते रविवार को एक ऐसा ही मामला सामने आया। केंद्र पर 62 की उम्र पार कर चुके दंपती एक-दूसरे की आदतों से परेशान होकर पहुंचे और शिकायत करने लगे। पत्नी का कहना था कि नौकरी के समय पति अधिकतर समय काम में व्यस्त रहा करते थे। मैंने घर पर रहकर तीनों बेटों की परवरिश के साथ सास-ससुर की भी सेवा की। पति छुट्टियों में आते थे, तब ऐसी आदत नहीं थी। अब बच्चों की शादी भी हो चुकी है। सोचा था नौकरी के बाद दोनों साथ घूमने जाएंगे। परिवार के अन्य लोग तीर्थ पर जा रहे हैं। पति साथ जाना नहीं चाहते हैं। उनको फिल्में देखने का शौक है। दिनभर मोबाइल फोन और टीवी में ही लगे रहते हैं, जबकि मुझे फिल्में देखना बिल्कुल पसंद नहीं है। मना करने पर झगड़ा करते हैं।
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घर में कोई मेरी बात सुनने वाला नहीं है। ऐसे में बेटों के पास जाकर रहना चाहती हूं। उनके पास जाने पर भी रिश्ते तोड़ने की बात कहते हैं। वहीं पति का कहना है कि फिल्में देखने से सीख मिलती है। पत्नी को दिनभर इधर-उधर की बात करने की आदत है। छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई करती है। बेटों के पास जाने की धमकी देती है। दोनों की काउंसिलिंग की गई।
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जमीन बेचकर दोस्तों के साथ घूमकर उड़ाते हैं रुपये
इसी तरह दूसरा मामला कुनराघाट से आया। इसमें पत्नी 55 वर्ष के पति की घूमने की आदत से परेशान है। कहा कि जमीन बेचकर दोस्तों के साथ मेरे पति की घूमने की आदत है। पत्नी ने केंद्र पहुंचकर पति को सुधारने की गुहार लगाई। उसने बताया कि बेटों के बाहर जाने के बाद पति दोस्तों के साथ ही अधिकतर समय बिताते हैं। रात में देर से घर आते हैं। घर में पहले बच्चे बोलने के लिए रहते थे, अब कोई बात करने वाला नहीं है। बिना बताए जमीन भी बेंच दी। उसके पैसों के बारे में पूछने पर मेरा पैसा कहकर लड़ने लगते हैं। समाज के कारण थाने नहीं जाना चाहती थी, लेकिन परेशान हो गई हूं। दो बार जमीन बेंच चुके हैं।
पति बोले, शक की है बीमारी, घूमने की बात पर गिनाती है खर्च
पति का कहना है अब जिम्मेदारी से मुक्त हो गया हूं। जब भी कहीं घूमने की बात कहता हूं तो खर्चे गिनाने लगती है। बच्चों की परवरिश में कोई शौक नहीं रखा। अब खुद के लिए जीना चाहता हूं। बेटों के जाने के बाद दिन भर सुनाती रहती है। मेरी कोई आदत इसे पसंद नहीं आती हैं। पहले बेटे थे तो वह सुनते थे, अब मुझे सुनना पड़ता है। ये बोलना कम करे तो घर में रहने में कोई दिक्कत नहीं है। एक जमीन घर के खर्चों के लिए बेची थी। उसके बारे में एक-एक रुपये के बारे में बता चुका हूं। शक की बीमारी है, कहती है कि दोस्तों पर पैसे लुटा रहा हूं।
कोट,
जब उम्र 60 की होने लगती है और व्यक्ति नौकरीपेशा से मुक्त हो जाता है तब पत्नी से तालमेल बिठा पाना मुश्किल होने लगता है। कामकाज के दौरान वह इतना व्यस्त रहता है कि पत्नी की भावनाओं को समझ नहीं पाता है। बुढ़ापे में उसके सामने कोई उद्देश्य जब नहीं होता है तो अपने शौक को पूरा करने के लिए जीवन साथी से उम्मीदें करने लगता है। बच्चे साथ होते नहीं है तो अनबन शुरू हो जाती है। यह इंप्टीनेट सिंड्रोम का लक्षण है। इसमें व्यक्ति अपने पर नियंत्रण नहीं कर पाता है।
डॉ. धनन्जय कुमार, विभागाध्यक्ष मनोविज्ञान विभाग, डीडीयू गोरखपुर यूनिवर्सिटी
बच्चों के बाहर जाने के बाद माता-पिता के बीच की कड़ी टूट जाती है। ऐसे में दोनों के बीच कुछ मनमुटाव हो सकते हैं। जिन्हें, उन्हें खुद ही सुलझाना पड़ता है। दोनों को बुलाकर समझाया गया है। साथ घूमने, पूजा-पाठ करने की सलाह दी गई है। दाेनों को एक-दूसरे की कमियों को अपनाकर साथ रहने की सलाह दी गई है। समय-समय पर फीडबैक के लिए बुलाया गया है।
अवनीश चौधरी, कांउसलर