सूदखोरी का जाल: गोरखपुर में सूदखोर ने मकान बिकवा दिया, बेटी की पढ़ाई भी छूटी- अब CM से की फरियाद
मोहद्दीपुर निवासी शिवेंद्र ने पुलिस को बताया कि वह मोहद्दीपुर ही में पिछले 22 वर्ष से स्टेशनरी की दुकान चलाकर जीविकोपार्जन कर रहे थे। आय को बढ़ाने के लिए विद्यालय में किताब व कॉपी की सप्लाई शुरू कर दी। इसके लिए रुपयों की जरूरत थी, जिसे मित्र समझकर संजय तिवारी से लिया। संजय ने दस प्रतिशत ब्याज पर रुपये दिए थे। 25 अप्रैल 2016 को अचानक शार्ट सर्किट से उनकी दुकान में आग लग गई और सबकुछ जलकर खाक हो गया, लेकिन ब्याज लेना संजय ने बंद नहीं किया, जबकि मूलधन से वह काफी ज्यादा ले चुका था।
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अब जब परिवार अवसाद में आ गया है तो वह मदद के लिए एसएसपी के पास पहुंचे। एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर के निर्देश पर आरोपियों मृत्युंजय निषाद, बबलू निषाद, संजय तिवारी, धनंजय तिवारी, रामशरण यादव, चंद्रशेखर प्रसाद, मनीष सिंह, अशोक अग्रवाल, कुटुस अली के खिलाफ कैंट थाने में जालसाजी, धमकी देने सहित अन्य धाराओं में पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
संजय ने दस प्रतिशत ब्याज पर रुपये दिए थे। 25 अप्रैल 2016 को अचानक शार्ट सर्किट से उनकी दुकान में आग लग गई और सबकुछ जलकर खाक हो गया, लेकिन ब्याज लेना संजय ने बंद नहीं किया, जबकि मूलधन से वह काफी ज्यादा ले चुका था।
इसी बीच संजय और धनंजय ने अपने परिचित मृत्युंजय निषाद से मिलाया। उसने अपनी पत्नी के नाम से शिवेंद्र की दुकान को अक्टूबर 2018 में बैनामा करा लिया। इससे जो रुपया मिला, वह भी ब्याज में चला गया। फिर 2019 में आरोपियों ने कहा कि ब्याज बढ़ गया है और तब मृत्युंजय ने साढ़े 16 लाख में मकान खरीदने को कहा, लेकिन आधी रकम ही दी। कुछ रकम ब्याज में काट लिए। बाकी की रकम आज तक नहीं दिए। उल्टे अब सभी जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं।
मुख्यमंत्री से भी लगाई गुहार
सूदखोरों के मकड़जाल में फंसे शिवेंद्र को जब कोई रास्ता नहीं दिखा तो उन्होंने वर्ष 2022 में 17 मई व 20 जून को मुख्यमंत्री के जनता दर्शन में पहुंचकर गुहार लगाई। इसके बाद पुलिस ने उसकी शिकायत को आईजीआरएस पर दर्ज किया। तबसे पुलिस मामले की जांच कर रही थी। इस मामले की जानकारी जब एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर को हुई तो उन्होंने आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज करवाया।
सूदखोरों के कर्ज से बर्बाद हो चुके हैं कई परिवार
सूदखोरों के कर्ज में पहले भी कई जिंदगियां खत्म हो चुकी हैं। आत्मघाती कदम उठा परिवार की हत्या करने के बाद खुदकुशी की कई घटनाएं हुई हैं।
08 दिसंबर 2015 : खोराबार के पोछिया ब्रह्मस्थान केवटान टोला निवासी दिलीप निषाद ने पत्नी माया और दस माह के बच्चे लकी की हत्या की और फिर फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली थी।
08 मई 2018 : खोराबार के झारखंडी निवासी महिला शशि सिंह ने बेटी दीक्षा उर्फ एंजन और बेटे नववैध की गला दबाकर हत्या कर दी थी। फिर फंदा लगाकर खुदकुशी की। पति संतोष पहले ही खुदकुशी कर चुका था।
04 फरवरी 2019: राजघाट निवासी व्यापारी रमेश गुप्ता ने पत्नी सरिता, बेटी रचना, पायल व छोटे बेटे आयुष को खाने में जहर देकर हत्या की थी। फिर खुद ट्रेन के सामने कूदकर उसने जान दे दी थी।
06 मई 2020: पिपराइच के उनौला स्टेशन के पास पूजा तीन बेटियों संग ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी।
07 सितंबर 2017 : शाहपुर के शक्तिनगर में शोभा अपनी बड़ी बेटी एंजन, बेटे अर्थव और आराध्या के साथ पंखे से लटक गई थी। इस मामले में शोभा व उसकी बड़ी बेटी की मौत हो गई थी।
09 दिसंबर 2022: पिपराइच के जंगल धूसड़ में विवेकानंद दूबे ने पत्नी मालती के साथ खुदकुशी कर ली थी। कमरे में पत्नी और बाहर पति का शव मिला।
16 नवंबर 2022: शाहपुर में जितेंद्र श्रीवास्तव ने बेटी मान्या और मानवी के साथ खुदकुशी की थी। बेटियों के शव पंखे के सहारे लटके थे।
16 नवंबर 2022 : गोरखनाथ में मां सरोज देवी और बेटे मनीष राय ने खुदकुशी की थी। दोनों ने जहर खाकर जान दी थी।
7 फरवरी 2023 : गोला के देवकली गांव में सूदखोरों से परेशान होकर इंद्र बहादुर मौर्य ने पत्नी सुशीला, बेटी चांदनी और अर्श को जिंदा जला दिया था और फिर खुदकुशी कर ली थी।