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Gorakhpur News: धुरियापार औद्योगिक क्षेत्र में जगी सेमी कंडक्टर चिप बनाने की फैक्टरी की उम्मीद
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गीडा प्रबंधन ने प्रदेश सरकार को भेजा था प्रस्ताव, धुरियापार में उपलब्ध है जमीन
बजट में इसको लेकर नई कार्ययोजना बनने से बढ़ी उम्मीदें
गोरखपुर। बजट में सेमी कंडक्टर चिप को लेकर नई पॉलिसी जारी होने से धुरियापार औद्योगिक क्षेत्र में सेमी कंडक्टर चिप बनाने की फैक्टरी लगने की उम्मीद बलवती हो गई है। क्योंकि गीडा प्रबंधन इसके लिए पहले ही प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेज चुका है। अब इस पर नीति बनने का फायदा गोरखपुर को मिलेगा, ऐसा उद्योगपतियों का भी मानना है।
गीडा की तर्ज पर ही धुरियापार को भी औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। गीडा र्ड की बैठक में इसके ले आउट को मंजूरी दी जा चुकी है। पिछले साल सितंबर में नोएडा में हुए सेमीकॉन इंडिया समिट में यूपी को सेमी कंडक्टर चिप बनाने के लिए पांच निवेश प्रस्ताव मिले थे। इसमें से तीन कंपनियों को नोएडा में ही जमीन दी गई थी। सितंबर में ही गीडा प्रबंधन ने भी धुरियापार औद्योगिक क्षेत्र में सेमी कंडक्टर चिप बनाने की फैक्टरी लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, तब इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली थी। लेकिन, अब बजट में इसके लिए नए सिरे से नीति निर्धारित होने की बात सामने आने के बाद फिर से इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। उद्योगपतियों का कहना है कि धुरियापार क्षेत्र में अगर कोई सेमी कंडक्टर चिप बनाने की फैक्टरी आती है, तो उसका असर यहां के अन्य उद्योगों पर भी पड़ेगा।
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हर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की जान है ये चिप
सेमी कंडक्टर सिलिकॉन चिप होते हैं जो विद्युत धाराओं को नियंत्रित करते हैं। ये कंप्यूटिंग चिप और माइक्रो कंट्रोलर हैं जो स्मार्टफोन, कंप्यूटर, डिजिटल कैमरा, एटीएम, ट्रेन और टेलीविजन से लेकर कार तक में इस्तेमाल होते हैं। हेड्सअप डिस्प्ले, सेंसर, कारों के हाईटेक फीचर, ड्राइवर असिस्टेंस, पार्किंग रियर कैमरा, एयरबैग और इमरजेंसी ब्रेक जैसे सिस्टम इन्हीं चिप की देन हैं। कई भारतीय कंपनियां चिप की डिजाइनिंग और टेस्टिंग का काम करती हैं, लेकिन सेमीकंडक्टर सेक्टर में यूरोप, अमेरिका, ताइवान और चीन का दबदबा है। वर्ष 2030 तक भारत में ही सेमी कंडक्टर की खपत 100 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है।
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वर्जन
गीडा प्रशासन ने बीते सितंबर में प्रदेश व केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था, जिसमें गीडा के धुरियापार औद्योगिक क्षेत्र में सेमी कंडक्टर चिप बनाने की फैक्टरी के लिए जमीन देने की पहल की गई थी। हालांकि, हमारे प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली थी। धुरियापार में अगर किसी कंपनी की तरफ से इस तरह के प्रोजेक्ट के लिए जगह मांगी गई तो जरूर उपलब्ध कराई जाएगी।
- अनुज मलिक, सीईओ गीडा
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बजट में इसको लेकर नई कार्ययोजना बनने से बढ़ी उम्मीदें
गोरखपुर। बजट में सेमी कंडक्टर चिप को लेकर नई पॉलिसी जारी होने से धुरियापार औद्योगिक क्षेत्र में सेमी कंडक्टर चिप बनाने की फैक्टरी लगने की उम्मीद बलवती हो गई है। क्योंकि गीडा प्रबंधन इसके लिए पहले ही प्रदेश सरकार को प्रस्ताव भेज चुका है। अब इस पर नीति बनने का फायदा गोरखपुर को मिलेगा, ऐसा उद्योगपतियों का भी मानना है।
गीडा की तर्ज पर ही धुरियापार को भी औद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। गीडा र्ड की बैठक में इसके ले आउट को मंजूरी दी जा चुकी है। पिछले साल सितंबर में नोएडा में हुए सेमीकॉन इंडिया समिट में यूपी को सेमी कंडक्टर चिप बनाने के लिए पांच निवेश प्रस्ताव मिले थे। इसमें से तीन कंपनियों को नोएडा में ही जमीन दी गई थी। सितंबर में ही गीडा प्रबंधन ने भी धुरियापार औद्योगिक क्षेत्र में सेमी कंडक्टर चिप बनाने की फैक्टरी लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा था। हालांकि, तब इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली थी। लेकिन, अब बजट में इसके लिए नए सिरे से नीति निर्धारित होने की बात सामने आने के बाद फिर से इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। उद्योगपतियों का कहना है कि धुरियापार क्षेत्र में अगर कोई सेमी कंडक्टर चिप बनाने की फैक्टरी आती है, तो उसका असर यहां के अन्य उद्योगों पर भी पड़ेगा।
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हर इलेक्ट्रॉनिक उपकरण की जान है ये चिप
सेमी कंडक्टर सिलिकॉन चिप होते हैं जो विद्युत धाराओं को नियंत्रित करते हैं। ये कंप्यूटिंग चिप और माइक्रो कंट्रोलर हैं जो स्मार्टफोन, कंप्यूटर, डिजिटल कैमरा, एटीएम, ट्रेन और टेलीविजन से लेकर कार तक में इस्तेमाल होते हैं। हेड्सअप डिस्प्ले, सेंसर, कारों के हाईटेक फीचर, ड्राइवर असिस्टेंस, पार्किंग रियर कैमरा, एयरबैग और इमरजेंसी ब्रेक जैसे सिस्टम इन्हीं चिप की देन हैं। कई भारतीय कंपनियां चिप की डिजाइनिंग और टेस्टिंग का काम करती हैं, लेकिन सेमीकंडक्टर सेक्टर में यूरोप, अमेरिका, ताइवान और चीन का दबदबा है। वर्ष 2030 तक भारत में ही सेमी कंडक्टर की खपत 100 अरब डॉलर से ज्यादा होने का अनुमान है।
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वर्जन
गीडा प्रशासन ने बीते सितंबर में प्रदेश व केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा था, जिसमें गीडा के धुरियापार औद्योगिक क्षेत्र में सेमी कंडक्टर चिप बनाने की फैक्टरी के लिए जमीन देने की पहल की गई थी। हालांकि, हमारे प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली थी। धुरियापार में अगर किसी कंपनी की तरफ से इस तरह के प्रोजेक्ट के लिए जगह मांगी गई तो जरूर उपलब्ध कराई जाएगी।
- अनुज मलिक, सीईओ गीडा