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Gorakhpur News: गृह मंत्रालय ने जारी किया पत्र, 27 फरवरी को रिहा होगा पाकिस्तानी नागरिक मशरूफ
Thu, 02 Jan 2025 11:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 02 Jan 2025 11:05 AM IST
सार
जेल प्रशासन के मुताबिक बहराइच में नेपाल के रास्ते भारत में बिना वीजा, पासपोर्ट के दाखिल होने के आरोप में पाकिस्तान के कराची के रहने वाले मोहम्मद मसरूफ को बॉर्डर से पकड़ा गया था। बहराइच कोर्ट ने नौ अप्रैल 2013 को मोहम्मद मसरूफ को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। करीब दस साल पहले प्रशासनिक आधार पर केंद्रीय कारागार वाराणसी से उसे जिला कारागार गोरखपुर स्थानांतरित कर दिया गया। तब से वह यहीं बंद है।
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गोरखपुर जिला कारागार
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
गोरखपुर। जिला जेल में 15 साल से बंद पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद मसरूफ उर्फ मंसूर अहमद उर्फ गुड्डू (56) की रिहाई 27 फरवरी को होगी। बताया जा रहा है कि गृह मंत्रालय से पत्र जारी हो गया है, अटारी बाॅर्डर से मोहम्मद मसरूफ को रिहा कर पाकिस्तान के कराची भेजने की तैयारी भी शुरू हो गई है। सूत्रों के अनुसार, गुजरात और राजस्थान की जेल में बंद पाकिस्तानी बंदी को भी इसी दिन रिहा किया जाएगा।
सजा पूरी कर चुके मसरूफ की रिहाई के लिए पहले ही विदेश मंत्रालय नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जारी कर चुका है। इसके बाद से ही जेल प्रशासन की तरफ से हर माह मुख्यालय में रिमाइंडर भेजा जा रहा था। बहुत जल्द बहराइच एलआईयू उसे गोरखपुर से दिल्ली लेकर जाएगी। वहां से वह पाकिस्तान जाएगा। पत्र के अनुसार, मसरूफ को साफ-सुथरे कपड़े और उसके कागजात के साथ दिल्ली भेजना है। इसको लेकर जेल प्रशासन अपनी तैयारी कर रहा है।
जासूसी के आरोप में किया गया था गिरफ्तार
वर्ष 2008 में बहराइच के रुपईडीहा के पास नेपाल सीमा से घुसे पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद मसरूफ को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर उसे जासूसी सहित अन्य सभी मामलों में दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद उस पर सिर्फ बिना पासपोर्ट के भारत में प्रवेश का मामला था, जिसकी तय सजा से अधिक समय करीब 15 साल वह जेल में बीता चुका है।
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कोर्ट ने बिना वीजा-पासपोर्ट देश में घुसने की वजह से इस पर फैसला लेने के लिए केंद्र सरकार को कहा था। कोर्ट के आदेश पर जेल प्रशासन ने विदेश मंत्रालय से पत्राचार किया, जिसके बाद विदेश मंत्रालय से भी मसरूफ को छोड़ने के लिए सहमति दी थी।
10 साल पहले गोरखपुर कारागार में लाया गया था
जेल प्रशासन के मुताबिक बहराइच में नेपाल के रास्ते भारत में बिना वीजा, पासपोर्ट के दाखिल होने के आरोप में पाकिस्तान के कराची के रहने वाले मोहम्मद मसरूफ को बॉर्डर से पकड़ा गया था। पूछताछ में उसकी भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर विभिन्न आरोपों में उसके खिलाफ पुलिस ने जांच कर चार्जशीट दाखिल की थी।
बहराइच कोर्ट ने नौ अप्रैल 2013 को मोहम्मद मसरूफ को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। करीब दस साल पहले प्रशासनिक आधार पर केंद्रीय कारागार वाराणसी से उसे जिला कारागार गोरखपुर स्थानांतरित कर दिया गया। तब से वह यहीं बंद है।
बच्चों को याद करता है मसरूर
अपनी रिहाई की खबर जानने के बाद मसरूफ बहुत खुश है। उसने बताया कि उसके कराची स्थित घर में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे रहते हैं। मसरूफ का कहना है कि 15 साल बाद अपने परिवार के सभी सदस्यों को देख पाऊंगा, इस बात का विश्वास नहीं हो रहा है।
पाकिस्तानी दूतावास ने भी माना नागरिक
हमेशा देखने को मिलता है कि कोई भी पाकिस्तानी नागरिक भारत में पकड़ा जाता है, तब वहां की सरकार उसे अपना नागरिक मानने से इनकार करती है, लेकिन पाकिस्तानी दूतावास ने मसरूफ को अपने देश का नागरिक मान लिया और उसे वतन वापस बुलाने का प्रयास शुरू किया था।
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सजा पूरी कर चुके मसरूफ की रिहाई के लिए पहले ही विदेश मंत्रालय नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) जारी कर चुका है। इसके बाद से ही जेल प्रशासन की तरफ से हर माह मुख्यालय में रिमाइंडर भेजा जा रहा था। बहुत जल्द बहराइच एलआईयू उसे गोरखपुर से दिल्ली लेकर जाएगी। वहां से वह पाकिस्तान जाएगा। पत्र के अनुसार, मसरूफ को साफ-सुथरे कपड़े और उसके कागजात के साथ दिल्ली भेजना है। इसको लेकर जेल प्रशासन अपनी तैयारी कर रहा है।
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जासूसी के आरोप में किया गया था गिरफ्तार
वर्ष 2008 में बहराइच के रुपईडीहा के पास नेपाल सीमा से घुसे पाकिस्तानी नागरिक मोहम्मद मसरूफ को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। हाईकोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर उसे जासूसी सहित अन्य सभी मामलों में दोषमुक्त कर दिया। इसके बाद उस पर सिर्फ बिना पासपोर्ट के भारत में प्रवेश का मामला था, जिसकी तय सजा से अधिक समय करीब 15 साल वह जेल में बीता चुका है।
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कोर्ट ने बिना वीजा-पासपोर्ट देश में घुसने की वजह से इस पर फैसला लेने के लिए केंद्र सरकार को कहा था। कोर्ट के आदेश पर जेल प्रशासन ने विदेश मंत्रालय से पत्राचार किया, जिसके बाद विदेश मंत्रालय से भी मसरूफ को छोड़ने के लिए सहमति दी थी।
10 साल पहले गोरखपुर कारागार में लाया गया था
जेल प्रशासन के मुताबिक बहराइच में नेपाल के रास्ते भारत में बिना वीजा, पासपोर्ट के दाखिल होने के आरोप में पाकिस्तान के कराची के रहने वाले मोहम्मद मसरूफ को बॉर्डर से पकड़ा गया था। पूछताछ में उसकी भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर विभिन्न आरोपों में उसके खिलाफ पुलिस ने जांच कर चार्जशीट दाखिल की थी।
बहराइच कोर्ट ने नौ अप्रैल 2013 को मोहम्मद मसरूफ को आजीवन कारावास की सजा सुना दी। करीब दस साल पहले प्रशासनिक आधार पर केंद्रीय कारागार वाराणसी से उसे जिला कारागार गोरखपुर स्थानांतरित कर दिया गया। तब से वह यहीं बंद है।
बच्चों को याद करता है मसरूर
अपनी रिहाई की खबर जानने के बाद मसरूफ बहुत खुश है। उसने बताया कि उसके कराची स्थित घर में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चे रहते हैं। मसरूफ का कहना है कि 15 साल बाद अपने परिवार के सभी सदस्यों को देख पाऊंगा, इस बात का विश्वास नहीं हो रहा है।
पाकिस्तानी दूतावास ने भी माना नागरिक
हमेशा देखने को मिलता है कि कोई भी पाकिस्तानी नागरिक भारत में पकड़ा जाता है, तब वहां की सरकार उसे अपना नागरिक मानने से इनकार करती है, लेकिन पाकिस्तानी दूतावास ने मसरूफ को अपने देश का नागरिक मान लिया और उसे वतन वापस बुलाने का प्रयास शुरू किया था।