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Gorakhpur News: सरकार ने प्रतिबंध लगाया...धंधेबाजों ने करोड़ों की दवाओं को फुटकर बाजार में खपाया
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गोरखपुर। केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन ने पैरासिटामॉल समेत जिन 48 दवाओं को प्रतिबंधित श्रेणी में शामिल किया है, धंधेबाजों ने बीते चार दिन में उसे थोक से करोड़ों की दवाओं को फुटकर बाजार में खपा दिया है। अब जब तक निर्माता कंपनियों की तरफ से इनकी बाजार से वापसी का फैसला होगा, तब तक इसे आम लोग खा भी चुके होंगे। अनुमान है कि गोरखपुर से आसपास के बाजारों में करीब आठ करोड़ रुपये की प्रतिबंधित दवाएं भेजी जा चुकी हैं।
करीब एक महीने पहले भी एफडीसी (फिक्सड डोज कंबिनेशन) श्रेणी में आने वाली 156 दवाओं को प्रतिबंधित किया गया था। सभी दवाएं फुटकर बाजार में बेच दी गई थीं। खाद्य औषधि प्रशासन अभी प्रतिबंधित दवाओं की जांच के लिए योजना बना रहा है। वहीं कंपनियों ने भी दवाएं वापस नहीं ली हैं।
नकली और अधोमानक दवाओं की बिक्री की जानकारी होने पर केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने देशभर से विभिन्न दवाओं के नमूने मंगाकर जांच कराई। इसकी रिपोर्ट चार दिन पहले सार्वजनिक हुई। इस जांच में पता लगा कि बुखार की सबसे अधिक बिकने वाली दवा पैरासिटामॉल, मधुमेह टाइप वन की सबसे प्रचलित दवा गिलमीप्राइड, ब्लड प्रेशर की दवा टेल्मीसार्टन, गैस की दवा पैनडी समेत 53 दवाएं अधोमानक हैं।
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मतलब यह कि इनमें मौजूद साल्ट मानक से कम हैं। सीडीएससीओ ने इन दवाओं के बैच नंबर को प्रतिबंधित सूची में डालते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन जब तक इस रिपोर्ट पर अमल होगा, धंधेबाजों ने पूरा स्टॉक बाजार में खपा दिया। बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि केवल 10 से 12 प्रतिशत मॉल थोक स्टाकिस्टों ने होल्ड कर रखा है, जिसे कंपनी की तरफ से वापसी का आधिकारिक पत्र आने पर वापस कर कागज की कोरमपूर्ति की जाएगी। इसमें भी अधिकांश ऐसा माल है, जिसकी एक्सपायरी डेट नजदीक है।
10 प्रतिशत रेट डाउन कर भेजी गईं दवाएं
गोरखपुर से अब कुशीनगर, महराजगंज, देवरिया, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, आजमगढ़, बिहार के गोपालगंज और पश्चिमी चंपारण के अलावा नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक दवाएं भेजी जाती हैं। हर दिन भालोटिया मार्केट में दूसरे जिलों से दवा विक्रेता अपना माल खरीदकर ले जाते हैं। इसके अलावा यहां से छोटी गाड़ियों के जरिए भी बड़े विक्रेताओं की दुकान तक सीधे माल भेजा जाता है। बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण इलाके के बाजारों में जगह-जगह बिना लाइसेंस के ही चलने वाली दुकानों पर ऐसी दवाएं 10 प्रतिशत सस्ते रेट पर भेजी गई हैं। दुकानदार वहां 15 से लेकर 25 प्रतिशत तक सस्ती बेच देंगे। हर दवा के रैपर पर बैच नंबर याद कर उसकी पहचान मुश्किल है, ऐसे में जब तक ड्रग विभाग जांच शुरू करेगा, तब तक सारा माल निपट चुका होगा।
केवल कागज में होती है जांच, इसलिए अब डर भी नहीं
नकली, अधोमानक और प्रतिबंधित दवाओं के प्रकरण में अब जांच केवल कागज में ही होती है। बीते छह महीने में पड़ोसी जिला महराजगंज में नशीली दवाओं की चार खेप पकड़ी जा चुकी है। चारों में दवाएं गोरखपुर के मार्केट से ले जाने की बात सामने आई थी। पटना में पकड़ी गईं नशीली दवाएं भी गोरखपुर के लिए अलॉट थीं। उसमें नारकोटिक्स सेल की टीम जांच करने आई थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर ड्रग विभाग ने उसकी जांच नहीं की। पिछले महीने भी जिन 156 प्रकार की एफडीसी दवाओं को प्रतिबंधित किया गया था, उसकी जांच नहीं की गई। अब जो 48 दवाइयां प्रतिबंधित हुई हैं, इनकी भी अब तक जांच नहीं हुई। जांच नहीं होने से धंधेबाज, मार्केट में इन दवाओं को आसानी से खपा रहे हैं।
वर्जन
शासन की तरफ से प्रतिबंधित दवाओं की सूची मिल गई है। इन दवाओं को निर्माता कंपनियां अपने स्टाकिस्ट के जरिए वापस लेंगी। अगर दवाएं वापस नहीं होंगी तो अगले महीने अभियान चलाकर जांच की जाएगी। जिन दुकानों पर प्रतिबंधित बैच नंबर की दवा मिलेगी, उनके खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी।
-राहुल कुमार, औषधि निरीक्षक
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करीब एक महीने पहले भी एफडीसी (फिक्सड डोज कंबिनेशन) श्रेणी में आने वाली 156 दवाओं को प्रतिबंधित किया गया था। सभी दवाएं फुटकर बाजार में बेच दी गई थीं। खाद्य औषधि प्रशासन अभी प्रतिबंधित दवाओं की जांच के लिए योजना बना रहा है। वहीं कंपनियों ने भी दवाएं वापस नहीं ली हैं।
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नकली और अधोमानक दवाओं की बिक्री की जानकारी होने पर केंद्रीय दवा मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) ने देशभर से विभिन्न दवाओं के नमूने मंगाकर जांच कराई। इसकी रिपोर्ट चार दिन पहले सार्वजनिक हुई। इस जांच में पता लगा कि बुखार की सबसे अधिक बिकने वाली दवा पैरासिटामॉल, मधुमेह टाइप वन की सबसे प्रचलित दवा गिलमीप्राइड, ब्लड प्रेशर की दवा टेल्मीसार्टन, गैस की दवा पैनडी समेत 53 दवाएं अधोमानक हैं।
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मतलब यह कि इनमें मौजूद साल्ट मानक से कम हैं। सीडीएससीओ ने इन दवाओं के बैच नंबर को प्रतिबंधित सूची में डालते हुए कार्रवाई के निर्देश दिए हैं, लेकिन जब तक इस रिपोर्ट पर अमल होगा, धंधेबाजों ने पूरा स्टॉक बाजार में खपा दिया। बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि केवल 10 से 12 प्रतिशत मॉल थोक स्टाकिस्टों ने होल्ड कर रखा है, जिसे कंपनी की तरफ से वापसी का आधिकारिक पत्र आने पर वापस कर कागज की कोरमपूर्ति की जाएगी। इसमें भी अधिकांश ऐसा माल है, जिसकी एक्सपायरी डेट नजदीक है।
10 प्रतिशत रेट डाउन कर भेजी गईं दवाएं
गोरखपुर से अब कुशीनगर, महराजगंज, देवरिया, बस्ती, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर, आजमगढ़, बिहार के गोपालगंज और पश्चिमी चंपारण के अलावा नेपाल के सीमावर्ती इलाकों तक दवाएं भेजी जाती हैं। हर दिन भालोटिया मार्केट में दूसरे जिलों से दवा विक्रेता अपना माल खरीदकर ले जाते हैं। इसके अलावा यहां से छोटी गाड़ियों के जरिए भी बड़े विक्रेताओं की दुकान तक सीधे माल भेजा जाता है। बाजार से जुड़े सूत्र बताते हैं कि ग्रामीण इलाके के बाजारों में जगह-जगह बिना लाइसेंस के ही चलने वाली दुकानों पर ऐसी दवाएं 10 प्रतिशत सस्ते रेट पर भेजी गई हैं। दुकानदार वहां 15 से लेकर 25 प्रतिशत तक सस्ती बेच देंगे। हर दवा के रैपर पर बैच नंबर याद कर उसकी पहचान मुश्किल है, ऐसे में जब तक ड्रग विभाग जांच शुरू करेगा, तब तक सारा माल निपट चुका होगा।
केवल कागज में होती है जांच, इसलिए अब डर भी नहीं
नकली, अधोमानक और प्रतिबंधित दवाओं के प्रकरण में अब जांच केवल कागज में ही होती है। बीते छह महीने में पड़ोसी जिला महराजगंज में नशीली दवाओं की चार खेप पकड़ी जा चुकी है। चारों में दवाएं गोरखपुर के मार्केट से ले जाने की बात सामने आई थी। पटना में पकड़ी गईं नशीली दवाएं भी गोरखपुर के लिए अलॉट थीं। उसमें नारकोटिक्स सेल की टीम जांच करने आई थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर ड्रग विभाग ने उसकी जांच नहीं की। पिछले महीने भी जिन 156 प्रकार की एफडीसी दवाओं को प्रतिबंधित किया गया था, उसकी जांच नहीं की गई। अब जो 48 दवाइयां प्रतिबंधित हुई हैं, इनकी भी अब तक जांच नहीं हुई। जांच नहीं होने से धंधेबाज, मार्केट में इन दवाओं को आसानी से खपा रहे हैं।
वर्जन
शासन की तरफ से प्रतिबंधित दवाओं की सूची मिल गई है। इन दवाओं को निर्माता कंपनियां अपने स्टाकिस्ट के जरिए वापस लेंगी। अगर दवाएं वापस नहीं होंगी तो अगले महीने अभियान चलाकर जांच की जाएगी। जिन दुकानों पर प्रतिबंधित बैच नंबर की दवा मिलेगी, उनके खिलाफ विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई होगी।
-राहुल कुमार, औषधि निरीक्षक