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Gorakhpur News: ई- वे बिल में खेल कर गोरखपुर की दवा बेची जा रही थी दिल्ली में
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कुछ दिन पहले दिल्ली में पकड़े गए दवा कारोबारी से पूछताछ में हुआ था खुलासा
कोविड संकट के दौरान एक कारोबारी ने नशीली दवाओं का शुरू किया था धंधा
दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने पकड़ा था खेल को
गोरखपुर। भालोटिया मार्केट के धंधेबाजों ने गोरखपुर के लिए खरीदी गई दवाओं को फर्जी ई-वे बिल बनाकर दिल्ली में बेच दिया था। कई साल तक यह धंधा चलता रहा। फैक्टरी से गोरखपुर के लिए भेजी गई नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली के पब, होटलों व हॉस्टल में नशेड़ियों के काम आ रहा था। बीते मार्च में दिल्ली में एक पब में बेची गई दवा पकड़ी गई तो पूरा खेल खुल गया। अब इससे जुड़े लोगों की छानबीन चल रही है। जल्द ही भालोटिया मार्केट में कुछ दुकानों का लाइसेंस भी निलंबित हो सकता है।
भालोटिया मार्केट में रोजाना औसतन दो करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। यहां गोरखपुर-बस्ती मंडल के अलावा बिहार से भी दुकानदार दवा खरीदने आते हैं। इस बाजार से खांसी के सीरप के अलावा डायजापाम की गोलियां चोरी छिपे बेचने का खेल बहुत पुराना है। कोरोना संकट के दौरान इस बाजार के एक दुकानदार ने माल ऑनलाइन मंगाना शुरू किया। कुछ दिन में ही इसकी बारीकियां समझने के बाद उसने नींद की दवा अल्प्राजोलाम बिना गोरखपुर मंगाए ही बाहर भेजना शुरू कर दिया। कोविड संकट के दौरान मानसिक तनाव और अनिद्रा से जूझ रहे लोगों में इस तरह की नींद के लिए ली जाने वाली दवाएं खाने का चलन बढ़ गया था। दुकानदार को यहां तगड़ा मुनाफा मिलने लगा तो उसने अपना जाल लखनऊ और दिल्ली जैसे शहरों में फैलाना शुरू किया।
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दिल्ली में होटल, हॉस्टल व पब में है बड़ी डिमांड
दिल्ली के युवाओं में दवाओं को नशे के लिए प्रयोग करने का चलन बढ़ रहा है। लेकिन, वहां नियमों की सख्ती के चलते दुकानों से आसानी से दवाएं नहीं मिल पाती हैं। ऐसे में गोरखपुर के धंधेबाज ने अपना जाल फैलाया और गोरखपुर के नाम पर खरीदी गई दवाओं को फर्जी ई-वे बिल के जरिये दिल्ली में ही उतार दिया। अधिकांश दवाएं हिमाचल प्रदेश से मंगाई जा रहीं थीं। एक पब में दवा सप्लाई करने वाला युवक पकड़ा गया तो मामला खुला। इसके बाद गोरखपुर में जांच शुरू हुई तो कई और भी दुकानदार इस खेल में शामिल दिखे। अब जांच के बाद जल्द ही दो-तीन दुकानों का लाइसेंस निरस्त हो सकता है।
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दवा व्यापारियों ने बैठक कर धंधेबाजों पर सख्ती का किया समर्थन
फोटो
गोरखपुर। नशीली दवाओं के मामले में कार्रवाई शुरू होने का दवा विक्रेताओं ने समर्थन किया। इस मामले पर चर्चा के लिए दवा विक्रेता समिति की एक बैठक भी शहर के एक होटल में हुई। इसमें महामंत्री आलोक चौरसिया ने कहा कि एक साल से लगातार नारकोटिक्स, नकली या अधोमानक दवा पकड़े जाने पर उसके तार भालोटिया मार्केट से जुड़ रहे थे। इससे पूरा मार्केट बदनाम हो रहा है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब आदि से विशेष टीमें आकर यहां कार्रवाई कर रहीं थीं। इसमें सुधार के बजाए संबंधित जिम्मेदार अवैध वसूली में लगे थे। व्यापारियों को डराया जा रहा था, इसीलिए मामले को सीएम तक पहुंचाया गया। इस बैठक में अर्जुन अग्रवाल, संतोष श्रीवास्तव, अनुराग अग्रवाल, अशोक गुप्ता, राजीव त्रिपाठी, जवाहर गुप्ता, निलेश अग्रवाल, अभिषेक गुप्ता, फिरोज खान, संजय जायसवाल, रोहित बंका, दिलीप गुप्ता और अवनीश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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नियमों का पालन करें, किसी से डरने की जरूरत नहीं
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलीप सिंह ने कहा कि भालोटिया मार्केट को बदनाम करने वालों पर कार्रवाई जरूरी है। अच्छे दुकानदारों को इन सबसे बिल्कुल डरने की जरूरत नहीं है। नारकोटिक्स श्रेणी की दवा का रिकॉर्ड जरूर रखें। नए नियमों से खुद को अपडेट रखें। हर दवा की खरीद-बिक्री का बिल संभालकर रखें।
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कोविड संकट के दौरान एक कारोबारी ने नशीली दवाओं का शुरू किया था धंधा
दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम ने पकड़ा था खेल को
गोरखपुर। भालोटिया मार्केट के धंधेबाजों ने गोरखपुर के लिए खरीदी गई दवाओं को फर्जी ई-वे बिल बनाकर दिल्ली में बेच दिया था। कई साल तक यह धंधा चलता रहा। फैक्टरी से गोरखपुर के लिए भेजी गई नारकोटिक्स श्रेणी की दवाओं का एक बड़ा हिस्सा दिल्ली के पब, होटलों व हॉस्टल में नशेड़ियों के काम आ रहा था। बीते मार्च में दिल्ली में एक पब में बेची गई दवा पकड़ी गई तो पूरा खेल खुल गया। अब इससे जुड़े लोगों की छानबीन चल रही है। जल्द ही भालोटिया मार्केट में कुछ दुकानों का लाइसेंस भी निलंबित हो सकता है।
भालोटिया मार्केट में रोजाना औसतन दो करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। यहां गोरखपुर-बस्ती मंडल के अलावा बिहार से भी दुकानदार दवा खरीदने आते हैं। इस बाजार से खांसी के सीरप के अलावा डायजापाम की गोलियां चोरी छिपे बेचने का खेल बहुत पुराना है। कोरोना संकट के दौरान इस बाजार के एक दुकानदार ने माल ऑनलाइन मंगाना शुरू किया। कुछ दिन में ही इसकी बारीकियां समझने के बाद उसने नींद की दवा अल्प्राजोलाम बिना गोरखपुर मंगाए ही बाहर भेजना शुरू कर दिया। कोविड संकट के दौरान मानसिक तनाव और अनिद्रा से जूझ रहे लोगों में इस तरह की नींद के लिए ली जाने वाली दवाएं खाने का चलन बढ़ गया था। दुकानदार को यहां तगड़ा मुनाफा मिलने लगा तो उसने अपना जाल लखनऊ और दिल्ली जैसे शहरों में फैलाना शुरू किया।
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दिल्ली में होटल, हॉस्टल व पब में है बड़ी डिमांड
दिल्ली के युवाओं में दवाओं को नशे के लिए प्रयोग करने का चलन बढ़ रहा है। लेकिन, वहां नियमों की सख्ती के चलते दुकानों से आसानी से दवाएं नहीं मिल पाती हैं। ऐसे में गोरखपुर के धंधेबाज ने अपना जाल फैलाया और गोरखपुर के नाम पर खरीदी गई दवाओं को फर्जी ई-वे बिल के जरिये दिल्ली में ही उतार दिया। अधिकांश दवाएं हिमाचल प्रदेश से मंगाई जा रहीं थीं। एक पब में दवा सप्लाई करने वाला युवक पकड़ा गया तो मामला खुला। इसके बाद गोरखपुर में जांच शुरू हुई तो कई और भी दुकानदार इस खेल में शामिल दिखे। अब जांच के बाद जल्द ही दो-तीन दुकानों का लाइसेंस निरस्त हो सकता है।
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दवा व्यापारियों ने बैठक कर धंधेबाजों पर सख्ती का किया समर्थन
फोटो
गोरखपुर। नशीली दवाओं के मामले में कार्रवाई शुरू होने का दवा विक्रेताओं ने समर्थन किया। इस मामले पर चर्चा के लिए दवा विक्रेता समिति की एक बैठक भी शहर के एक होटल में हुई। इसमें महामंत्री आलोक चौरसिया ने कहा कि एक साल से लगातार नारकोटिक्स, नकली या अधोमानक दवा पकड़े जाने पर उसके तार भालोटिया मार्केट से जुड़ रहे थे। इससे पूरा मार्केट बदनाम हो रहा है। दिल्ली, हरियाणा, पंजाब आदि से विशेष टीमें आकर यहां कार्रवाई कर रहीं थीं। इसमें सुधार के बजाए संबंधित जिम्मेदार अवैध वसूली में लगे थे। व्यापारियों को डराया जा रहा था, इसीलिए मामले को सीएम तक पहुंचाया गया। इस बैठक में अर्जुन अग्रवाल, संतोष श्रीवास्तव, अनुराग अग्रवाल, अशोक गुप्ता, राजीव त्रिपाठी, जवाहर गुप्ता, निलेश अग्रवाल, अभिषेक गुप्ता, फिरोज खान, संजय जायसवाल, रोहित बंका, दिलीप गुप्ता और अवनीश अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
नियमों का पालन करें, किसी से डरने की जरूरत नहीं
केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिलीप सिंह ने कहा कि भालोटिया मार्केट को बदनाम करने वालों पर कार्रवाई जरूरी है। अच्छे दुकानदारों को इन सबसे बिल्कुल डरने की जरूरत नहीं है। नारकोटिक्स श्रेणी की दवा का रिकॉर्ड जरूर रखें। नए नियमों से खुद को अपडेट रखें। हर दवा की खरीद-बिक्री का बिल संभालकर रखें।