फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   gorakhpur news

Gorakhpur News: सरकारी अस्पतालों की बिगड़ी व्यवस्था का फायदा उठा रहे मरीज माफिया

Thu, 22 Feb 2024 02:33 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 22 Feb 2024 02:33 AM IST
विज्ञापन
gorakhpur news
गोरखपुर। सरकारी अस्पतालों की बिगड़ी व्यवस्था का फायदा मरीज माफिया उठा रहे हैं। पूर्वांचल के अलावा पड़ोसी बिहार व नेपाल के तराई क्षेत्र के मरीजों के इलाज का सबसे बड़ा केंद्र गोरखपुर अब मरीज माफिया के चलते चर्चा में है। हर दिन करीब 10 हजार मरीज अलग-अलग जगहों से जिले के विभिन्न अस्पतालों में इलाज को आते हैं। भीड़ का फायदा उठाने के लिए शहर में तमाम ऐसे नर्सिंग होम व क्लीनिक खुल गए हैं, जहां न तो डॉक्टर हैं और न ही अन्य ट्रेंड स्टॉफ।
विज्ञापन

सरकारी अस्पताल आए मरीजों के परिजनों को बहला-फुसलाकर दलाल इन नर्सिंग होम में भर्ती कराते हैं। जहां डॉक्टर हैं, वहां तो इलाज मिल जाता है, लेकिन जहां व्यवस्था अनट्रेंड हाथों में होती है, वहां मरीज जान के साथ-साथ रुपये भी गंवा देता है। अब तक इस तरह के जितने भी मामले पकड़े गए हैं, सभी में एक ही बात समान है कि दलाल, मरीजों के परिजनों को समझाते हैं कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टर व अन्य सुविधाएं नहीं हैं, जबकि प्राइवेट में सब कुछ चकाचक है।
विज्ञापन


बीआरडी में आईसीयू के लिए रहती है वेटिंग
हादसे में गंभीर रूप से घायल या किसी अन्य बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को आईसीयू की जरूरत है तो सबसे पहले वह बीआरडी मेडिकल कॉलेज जाता है। इस कॉलेज का नेहरू अस्पताल करीब एक हजार बेड का है, लेकिन यहां आईसीयू के कुल 16 बेड ही हैं। इसमें से 10 बेड ट्रामा एंड इमरजेंसी वार्ड में, जबकि 6 बेड मेडिसिन विभाग के हैं। इस अस्पताल पर गोरखपुर शहर के अलावा पड़ोसी कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज और संतकबीरनगर जिले के मरीजों का भी भार है। किसी बड़े हादसे या एक्सीडेंट की स्थिति में भी यही अस्पताल सरकारी स्तर पर सबसे अधिक सुविधा युक्त है। लेकिन, यहां हर दिन दो गुना मरीज वेटिंग में होते हैं। इस हालत से जूझ रहे मरीज के परिजनों को दलाल आसानी से बेहतर इलाज का झांसा देकर गुमराह कर देते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

--
एम्स में नहीं है कई विषयों के विशेषज्ञ
गोरखपुर में एक्स खुला तो शहर के अलावा आसपास के जिलों के लोगों को भी बेहतर इलाज की उम्मीद जगी। लेकिन पिछले तीन साल में यहां इमरजेंसी वार्ड को भी बेहतर नहीं बनाया जा सका। अभी भी यहां हृदय रोग समेत कई विभाग ही नहीं खुल पाए हैं। नए कार्यकारी निदेशक के आने के बाद अब जाकर ब्लड बैंक समेत अन्य जरूरी सुविधाओं के लिए प्रयास शुरू हुए हैं। डॉक्टरों के रिक्त पदों पर साक्षात्कार चल रहा है। इसके अलावा ट्रामा सेंटर व अन्य आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं की दिशा में बात आगे बढ़ी है। हालांकि यह सब कुछ होने में अभी कम से कम एक साल का वक्त लगेगा।
--
जिला अस्पताल में जांच और इलाज सबसे कठिन
शहर के बीचोबीच स्थित जिला अस्पताल में 300 बेड हैं और यहां ओपीडी में हर दिन करीब डेढ़ हजार नए मरीज व एक हजार पुराने मरीज आते हैं। लेकिन, मरीजों को सबसे अधिक दिक्कत भी यहीं होती है। यहां तो ब्लड जांच के लिए भी दो दिन चक्कर लगाना पड़ता है। सीटी स्कैन मशीन भी अक्सर खराब ही रहती है। यहां अभी आईसीयू के लिए प्रयास चल रहा है। इमरजेंसी वार्ड में जैसे ही कोई गंभीर मरीज पहुंचता है तो उसे तत्काल मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है। इस अस्पताल से कई बार मरीजों को निजी नर्सिंग होम में बेचने के मामले सामने आ चुके हैं। इस पर रोकथाम के लिए इमरजेंसी गेट पर पुलिस चौकी खोलने का प्रस्ताव है, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी है।
महिला अस्पताल में अधिकांश पद ही रिक्त
जिला अस्पताल के बगल में ही जिला महिला अस्पताल और एमसीएच विंग है। लेकिन यहां महिला डॉक्टरों के करीब आधे पद रिक्त हैं। इसके चलते ओपीडी से लेकर इंडोर तक महिला मरीजों व उनके परिजनों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इसको लेकर पिछले दिनों हंगामा भी हुआ था। इस अस्पताल के सीएमएस डॉ. जय कुमार ने बताया कि महिला रोग विशेषज्ञ के छह में से तीन पद रिक्त है। इसके अलावा मेडिकल अफसर के चार में से केवल एक पद पर ही नियुक्ति है। एनेस्थिसिया के दो में से एक पद रिक्त है।

------
वर्जन
मरीज माफियाओं पर लगातार कार्रवाई हो रही है। बीते डेढ़ साल में 37 नर्सिंग होम, अल्ट्रासाउंड व पैथालॉजी सेंटरों को सील किया गया है। इसके अलावा 16 लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। यह कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी। सरकारी अस्पतालों में सभी सुविधाएं मौजूद हैं। अगर कोई व्यक्ति मरीज के परिजनों को सुविधा नहीं होने का झांसा देता है, तो उसे पहले अस्पताल के किसी जिम्मेदार से भी इस पर बात करनी चाहिए। ऐसे अपराध पर लोगों को भी जागरूक होना होगा। स्वास्थ्य प्रशासन पूरी सख्ती बरत रहा है।

डॉ. आशुतोष दूबे, सीएमओ
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed