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इंश्योरेंस से फर्जी क्लेम: B.Pharma की डिग्री ली और बन गया डॉक्टर, इस सरकारी अस्पाल करता था फर्जी हस्ताक्षर

Mon, 09 Feb 2026 02:30 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 09 Feb 2026 02:30 AM IST
सार

रामगढ़ताल थाना प्रभारी नितिन रघुनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि इंद्रेश ने ढाई साल पहले खोराबार बाईपास पर कुशीनगर में एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत कॉन्ट्रैक्चुअल डॉक्टर नवाज आलम की एमबीबीएस की डिग्री के जरिये विद्या हॉस्पिटल की शुरुआत की थी। शुरुआती दौर में अस्पताल सामान्य तरीके से संचालित किया गया, लेकिन जनवरी 2025 से योजनाबद्ध तरीके से फर्जी क्लेम पास कराने का खेल शुरू हुआ।

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A contract doctor at Kushinagar District Hospital was passing fake insurance claims in Gorakhpur hospitals.
हेल्थ इंश्योरेंस के नाम पर ठगी - फोटो : istock

विस्तार

डिसेंट अस्पताल में हुए फर्जीवाड़े की जांच कुशीनगर के सरकारी अस्पताल तक पहुंच गई है। पुलिस की जांच में पता चला है कि कुशीनगर में एक सरकारी अस्पताल में कॉन्ट्रैक्चुअल बेस (ठेके पर तैनात) पर तैनात डॉ. नवाज आलम के फर्जी हस्ताक्षर के जरिये बीमा क्लेम, आयुष्मान समेत अन्य स्वास्थ्य योजनाओं के तहत फर्जी क्लेम पास कराए जा रहे थे।

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इस पूरे फर्जीवाड़े की जड़ उरुवा बाजार के पचोहां गांव निवासी इंद्रेश यादव निकला, जिसने बी-फार्मा की डिग्री के आधार पर मेडिकल स्टोर खोला और बाद में विद्यावती हॉस्पिटल का संचालक बनकर स्वास्थ्य व्यवस्था को चूना लगाने लगा।

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रामगढ़ताल थाना प्रभारी नितिन रघुनाथ श्रीवास्तव ने बताया कि इंद्रेश ने ढाई साल पहले खोराबार बाईपास पर कुशीनगर में एक सरकारी अस्पताल में कार्यरत कॉन्ट्रैक्चुअल डॉक्टर नवाज आलम की एमबीबीएस की डिग्री के जरिये विद्या हॉस्पिटल की शुरुआत की थी।

शुरुआती दौर में अस्पताल सामान्य तरीके से संचालित किया गया, लेकिन जनवरी 2025 से योजनाबद्ध तरीके से फर्जी क्लेम पास कराने का खेल शुरू हुआ। विवेचक राम सिंह के अनुसार, आरोपी ने इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए पहले से जेल भेजे जा चुके डिसेंट अस्पताल के मैनेजर ताहिर उर्फ सोनू खान के नेटवर्क का सहारा लिया।
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सोनू खान पहले भी इसी तरह के मामलों में सक्रिय रहा है और उसका नेटवर्क स्वास्थ्य विभाग, प्राइवेट अस्पतालों और क्लेम एजेंसियों तक फैला हुआ था। इसी नेटवर्क के जरिये फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर क्लेम पास कराए गए।

फिलहाल पुलिस ने संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। क्लेम से जुड़े बैंक खातों, डिजिटल रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स खंगाले जा रहे हैं।
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फर्जीवाड़े में बराबर का भागीदार निकले कर्मचारी
इस पूरे खेल में अस्पताल कर्मचारी भी बराबर का भागीदार निकला। जांच में पुलिस को पता चला कि जेल भेजे गए कर्मचारी इंश्योरेंस एजेंटों के सीधे संपर्क में रहता था और क्लेम पास कराने की पूरी प्रक्रिया को मैनेज करते थे। अस्पताल के कागजात तैयार कराने से लेकर फर्जी मरीजों को दाखिल दिखाने तक का जिम्मा उसी के पास था।

प्राथमिकी जांच में सात फाइल पास कराने के मिले साक्ष्य
पुलिस की प्राथमिकी जांच में पता चला कि विद्यावती हॉस्पिटल में भर्ती सात मरीजों के नाम से बीमा क्लेम पास ककाकर लाखों रुपये हड़पे जा चुके हैं। इसके अलावा कई अन्य फाइलें लटकी हुई हैं। दरअसल, बीमा क्लेम फर्जीवाड़ा के पर्दाफाश के बाद बीमा कंपनियों ने सत्यापन के बाद भी क्लेम देने की बात कही थी। फर्जीवाड़े के पर्दाफाश के बाद इंद्रेश ने कई ई-मेल भी डिलीट कर दिए थे। पुलिस इसे रिकवर करने के लिए एक्सपर्ट की मदद ले रही है।
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