फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Gorakhpur News: Globalization of compassion is the need of the hour: Kailash Satyarthi

करुणा का भूमंडलीकरण समय की मांग : कैलाश सत्यार्थी

Wed, 11 Dec 2024 04:57 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 11 Dec 2024 04:57 AM IST
विज्ञापन
Gorakhpur News: Globalization of compassion is the need of the hour: Kailash Satyarthi
गोरखपुर। समाज सुधारक और नोबल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि करुणा का भूमंडलीकरण समय की मांग है। करुणा को सिर्फ दया या परोपकार की तरह नहीं लिया जा सकता। यह सामान्य मानवीय गुण नहीं, दैवीय शक्ति है। हमें जीवन में चेतना और प्रज्ञा की यात्रा में करुणा के महत्व को समझना होगा। चेतना बुद्धि का विकास करती है तो इस चेतना को प्रज्ञा तक जाने के लिए करुणा का होना अपरिहार्य है।
विज्ञापन

कैलाश सत्यार्थी मंगलवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के 92वें संस्थापक सप्ताह समारोह के समापन कार्यक्रम को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि करुणा का अर्थ दूसरों की तकलीफ को अपनी तकलीफ की तरह महसूस करना और उसे दूर करने के लिए पूरी सामर्थ्य से जुट जाना है। मुख्यमंत्री मानवता के उद्धार का कार्य पूरी तन्मयता से कर रहे हैं। हर नागरिक का भी यही सपना होना चाहिए।
विज्ञापन

कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि हमें मिलकर ऐसे ज्ञान का विकास करना है जो सबके लिए हो। चंद देशों में सिमटे विशिष्ट ज्ञान के लोकतंत्रीकरण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें किसी पश्चिम के थिंक विचारक से ज्ञान उधार लेने की आवश्यकता नहीं है। हमारे भारतीय ज्ञान परंपरा में प्रेम और शांति वाला दुनिया बनाने का सामर्थ्य है। हमारा ज्ञान सामूहिकता, सार्वजनिकता और सार्वभौमिकता का बोध कराने वाला है। अपने अंदर देखने का सामर्थ्य और समृद्धि हमारे डीएनए का हिस्सा है। सर्वे भवन्तु सुखिनः के संदेश को पुनर्जागृत करने की आवश्यकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

युद्ध में लगे सात दिन के पैसे से सुधर जाएगी शिक्षा व्यवस्था
कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि आज दुनिया में दो अरब लोग युद्ध या हिंसा के प्रभाव में जी रहे हैं। 46 करोड़ बच्चे युद्ध के शिकार हैं। यदि हम युद्ध में लगे एक सप्ताह के पैसे दे दें तो पूरी दुनिया के बच्चों को शिक्षा दी जा सकती है। युद्ध के दस दिन के पैसे दे दें तो दुनिया के हर गरीब बच्चे और महिलाओं के स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था की जा सकती है।
सीएम योगी का काम ऐसा कि हर कोई दीवाना हो जाएगा
कैलाश सत्यार्थी ने एक संस्मरण सुनाते हुए कहा कि करीब 25 वर्ष पूर्व गोरखनाथ क्षेत्र के आसपास नेपाल के बच्चों से दुकानों पर काम कराने की जानकारी होने पर वह दिल्ली में युवा सांसद योगी आदित्यनाथ से मिलने उनके फ्लैट पर गए थे। उनके फ्लैट पर साधारण तख्त और कुर्सियां थीं। चुंबकीय आकर्षण वाली मुस्कुराहट के साथ योगी को जैसे ही उन्होंने बालश्रम के बारे में बताया, उन्होंने फौरन फोन मिलाकर इस समस्या को समाप्त करने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि पहली बार किसी राजनेता का यह रूप देखकर कौन दीवाना नहीं हो जाएगा।

गरीबों और पीड़ितों के चेहरे पर खुशहाली लाना ही कार्य का प्रमाणपत्र
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कार्यशैली की सराहना करते हुए कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि कोरोना संकट के दौर में सीएम योगी ने नैतिक और आध्यात्मिक जिम्मेदारी लेकर उन प्रवासियों के भी भोजन का प्रबंध किए, जो उत्तर प्रदेश होकर अपने राज्यों को गए। बिहार के एक व्यक्ति ने बिहार दौरे पर सीएम योगी को लंच पैकेट का लिफाफा देकर उनके प्रति आभार जताया कि जब वह अपने घर आ रहा था तो उसके भोजन का इंतजाम उन्होंने किया था। वास्तव में गरीबों और पीड़ितों के चेहरे पर खुशहाली लाना ही कार्य का प्रमाणपत्र होता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed