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Gorakhpur News: प्रदेश के इस जिले में बिना प्रदूषण विभाग की NOC लिए चल रहे 250 उद्योग- जानिए कैसे हुआ जानकारी

Wed, 24 Apr 2024 11:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी,
संवाद न्यूज एजेंसी, Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Wed, 24 Apr 2024 11:20 AM IST
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Gorakhpur News: Garamaya Gida...250 industries running without NOC from Pollution Department
गीडा क्षेत्र में ऐसे दिखती है आमी नदी - फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर। आमी नदी के पानी को जहरीला बनाने से बचाने के लिए सीईटीपी (कॉमन एंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट) लगाने के लिए किए गए सर्वे में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। पता चला है कि आमी के किनारे करीब 300 नए उद्योग धंधे लग गए हैं, लेकिन उनमें से करीब 250 ऐसे हैं, जिन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अनापत्ति प्रमाणपत्र ही नहीं लिया है, जबकि उद्योगों के संचालन के लिए यह जरूरी है।
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अब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इन कंपनियों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि बिजली निगम ने भी इन कंपनियों से पीसीबी की एनओसी नहीं मांगी, जबकि बिजली कनेक्शन देने से पहले यह जमा करना होता है।
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गीडा क्षेत्र से होकर राप्ती नदी में मिलने वाली आमी नदी का पानी बेहद जहरीला हो गया है। पर्यावरण संरक्षण के लिए लड़ रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं की पहल पर इस नदी में गीडा क्षेत्र के अड़िलापार में चार एमएलडी का सीईटीपी लगाया जाना है। शासन स्तर से इसकी मंजूरी मिल चुकी है।
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यह मामला लंबे समय तक राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) में भी रहा है। पिछले महीने जब सीईटीपी लगाने से पहले रिवाइज एस्टीमेट के लिए सर्वे कराया गया, तब पता लगा कि यहां तो बिना पीसीबी के एनओसी के ही करीब 250 उद्योग संचालित हो रहे हैं।

सवाल उठ रहा है कि इन उद्योगों से आमी नदी में प्रदूषण बढ़ रहा है। हालांकि उद्योगों के संचालकों का दावा है कि उनके काम धंधों से प्रदूषण का कोई वास्ता नहीं है। इस मुद्दे पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 300 कंपनियों को नोटिस भेजा तो पता लगा कि 250 कंपनी बिना एनओसी के चलाई जा रही हैं। अब प्रदूषण का सच तो आगे के सर्वे से ही तय होगा, फिलहाल एनओसी का मामला गरमा रहा है।

पता गलत बताकर वापस लौटाया नोटिस
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नोटिस भेजकर जवाब का इंतजार कर रहा था। इस बीच करीब 60 उद्यमियों को भेजा गया नोटिस डाक विभाग ने पता गलत बताकर वापस कर दिया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के जिम्मेदारों का कहना है कि जिन प्लाट में फैक्टरी चल रही है और उसका भौतिक सत्यापन भी किया जा चुका है, उसका नाम-पता गलत बताकर नोटिस वापस किया जाना आश्चर्यजनक है।

इसलिए अब डाक विभाग के वरिष्ठ अफसरों को भी पत्र भेजकर नोटिस सभी कंपनियों के पंजीकृत पते पर पहुंचाने का अनुरोध किया जाएगा। क्योंकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हर नोटिस के लिफाफे पर डाक टिकट भी लगाया है।

आमी नदी को बचाने के लिए 15 साल से चल रहा है आंदोलन
सिद्धार्थनगर के सिकहरा ताल से निकली आमी नदी संतकबीरनगर और गोरखपुर जिले के एक बड़े हिस्से से होकर गुजरते हुए सोहगौरा गांव के सामने राप्ती नदी में मिल जाती है। इस नदी में खलीलाबाद से लेकर गीडा तक तमाम उद्योगों का गंदा पानी छोड़ा जाता है, जिससे नदी प्रदूषित हो चुकी है।

कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने वर्ष 2009 में आमी बचाओ मंच का गठन कर इस नदी में प्रदूषित पानी का प्रवाह रोकने के लिए चरण बद्ध आंदोलन शुरू किया। मामला एनजीटी में पहुंचा तो प्रदूषण रोकने के उपाय करने के निर्देश दिए गए।

इसके बार गीडा बोर्ड की बैठक में तय हुआ कि फैक्टरियों का प्रदूषित पानी नदी में जाने से रोकने के लिए सीईटीपी लगाया जाए। इसके लिए मदन मोहन मालवीय तकनीकी विश्वविद्यालय को नोडल विभाग बनाया गया। सीईटीपी लगाने के लिए जमीन भी खरीदी गई। सीईटीपी तो नहीं ही लगी, बड़ी संख्या में नए लगे उद्योगों ने अनापत्ति प्रमाण पत्र भी नहीं लिया।

क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि  गीडा में सीईटीपी लगवाने से पहले प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इलाके का भौतिक सत्यापन किया तो पता लगा कि करीब 300 नई कंपनियां लगी हैं। इनमें से लगभग 250 कंपनियां ऐसी हैं, जिन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से फैक्टरी संचालन के लिए एनओसी नहीं ली है।

इसलिए सभी नई कंपनियों को नोटिस भेजकर एनओसी लेने को कहा गया है। चार श्रेणी में एनओसी दी जाती है। प्रदूषण उत्सर्जन के आधार पर कंपनियों को अलग-अलग श्रेणी में एनओसी दी जाती है। जिन फैक्टरियों को भेजा गया नोटिस पता गलत बताकर वापस किया गया है, उन्हें दुबारा नोटिस भेजा जाएगा।

लघु उद्योग भारती के मंडल अध्यक्ष दीपक कारीवाल ने बताया कि गीडा क्षेत्र में संचालित तमाम ऐसी फैक्टरियों को भी नोटिस भेजा गया है, जिनके यहां प्रदूषण का उत्सर्जन नहीं होता। जैसे जहां पॉवरलूम व सिलाई मशीन का काम है, वहां किसी प्रकार का प्रदूषित पानी निकलता ही नहीं है, हम जनरेटर भी यूज नहीं करते।

इसीलिए रेडिमेड गारमेंट्स समेत कई अन्य ऐसे उद्योगों को एनओसी लेना अनिवार्य नहीं होता लेकिन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सभी को नोटिस भेजकर डरा दिया है। प्रदूषण बोर्ड केवल उन्हें ही नोटिस दे, जो उसके दायरे में आते हों।


सीईओ- गीडा अनुज मलिक ने बताया कि गीडा में चार एमएलडी का सीईटीपी लगाने की मंजूरी शासन स्तर से मिल चुकी है। इसके लिए जमीन भी पहले ही खरीदी जा चुकी है। उद्यमियों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से नोटिस भेजने की कोई जानकारी नहीं है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कोई प्रतिलिपि भी नहीं भेजी है।
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