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Gorakhpur News: खरैया में खुला खेलः भूमाफिया अवैध जमीनें भिड़ो गए, बैंकों ने भी बांटे लोन
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गोरखपुर। खरैया पोखरा इलाके में अवैध निर्माण तोड़ने शुरू किए गए तो वहां के लोगों से चौंका देने वाले राज खुलने शुरू हो गए। लोगों का मानें तो बाकी इलाकों की तरह भूमाफियाओं ने अवैध ढंग से जमीनें बेचकर खरैया वासियों को भी फंसाया है। माफिया तो 15 साल पहले जमीनें बेचकर निकल गए, मगर अब वहां के आम लोग भुगत रहे हैं। यही नहीं, अवैध जमीनों पर धंधेबाजों ने बैंक से मिलकर लोन भी करवा दिए। लोगों की किस्तें चल रही हैं, मगर कोई जवाब देने को तैयार नहीं कि अवैध जमीनों पर बैंकों ने लोन कैसे कर दिए।
खरैया पोखरा इलाके में अवैध निर्माण तोड़े जाने के बाद मातम पसरा है। खरैया के अभयानंद शुक्ला ने बताया कि 2013 में उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर यह जमीन खरीदी थी। अभी उसके आठ लाख रुपये बाकी हैं। किस्तें चल रही हैं। उन्होंने विशाल श्रीवास्तव से इसे खरीदा था। इसकी रजिस्ट्री है और खतौनी में नाम भी चढ़ा है। उसके बावजूद इसको अवैध करार दे रहे हैं। विशाल ने अनिल जेम्स से इसको खरीदा था। राजीव धनोका ने बताया कि उन्होंने भी बैंक से कर्ज लेकर रीता श्रीवास्तव से यहां जमीन खरीदी थी। 2020 तक खतौनी में नाम भी दर्ज था। उसके बाद यकायक क्या हुआ, यह समझ नहीं आया। अवैध जमीनों के खेल में फंसकर हम कैसे निकलें, यह समझ नहीं आ रहा।
जमीन अवैध थी तो मकान बनाने से पहले रोका क्यों नहीं
65 वर्षीय सत्यभामा ने बताया कि अधियारीबाग की जमीन को बेचकर यहां वर्ष 2013 में जमीन खरीदी फिर मकान बनवाया। पति ने रिटायरमेंट और पेंशन के पैसे इसमें लगा दिए। बुधवार को एक झटके में घर के दरवाजे तोड़ दिए गए। यदि जमीन अवैध थी तो 11 साल पहले अफसरों ने उन्हें मकान बनाने से पहले रोका क्यों नहीं। यह कहते हुए उनके आंसू निकल गए।
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11 साल पहले मकान बनवाया, अब कहां जाएंगे
पूनम शुक्ला ने बताया कि 11 साल पहले विशाल श्रीवास्तव से जमीन खरीदी और इसके बाद मकान बनवाया। कार्रवाई के दौरान उनकी एक न सुनी गई। कोई भी कागज देखने को तैयार नहीं था। वह बस्ती की रहने वाली हैं। यहां पर टिफिन सर्विस चलाकर गुजारा करते हैं। पाई-पाई जुटाकर इस घर को बनाया था। जमीन की रजिस्ट्री और बैनामा है, उसके बाद भी घर खाली करने को बोल रहे हैं। बच्चे खाना नहीं खा रहे। बेटी स्कूल जाने से पहले पूछ रही कि आज फिर तो वे लोग (नगर निगम की टीम) नहीं आएंगे। कार्रवाई के बाद कोई भी सो नहीं पाया। यदि जमीन अवैध थी तो पहले रोकना चाहिए था। पहले तो किसी ने कुछ बताया ही नहीं।
जमापूंजी फंसा दिए अब कहां जाएंगे
शुभनारायण गुप्ता की पीड़ा भी ऐसी ही है। बोले-पेंशन के पैसे से 2014 में यह जमीन खरीदी थी। इसकी रजिस्ट्री भी है। पहले कुछ नहीं बताया गया, मगर कुछ दिन पहले ही पता लगा कि यहां निर्माण पर रोक है। अब हमारी बात कोई नहीं सुन रहा। बाउंड्रीवॉल को तोड़ दिया गया है। पूरी जमापूंजी यहां फंसाकर अब हम कहां जाएंगे।
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15 साल पहले तो किसी नहीं रोका नहीं, अब क्या हुआ?
पूजा शाही का भी यही दर्द है। उन्होंने बताया कि कार्रवाई से पहले टीम को जमीन के कागजात और कोर्ट के आदेश दिखाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने नहीं देखा। 15 साल पहले उन्होंने मकान बनाया था। तब किसी ने न तो जमीन खरीदने से रोका और न ही मकान बनाने से। 1998 से तो हम यहां पर रह ही रहे हैं तो अब यकायक क्या हो गया? हमने अवैध कब्जा नहीं किया है। सारी पूंजी लगाकर पिता जी ने इस घर को बनवाया है।अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी है।
हाईकोर्ट में लड़ेंगे अपनी लड़ाई
नगर निगम की कार्रवाई से प्रभावित लोगों ने एक होकर बृहस्पतिवार को आगे की रणनीति बनाई। अभयानंद शुक्ला बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में थे। बृहस्पतिवार को वह भागकर गोरखपुर आए और ताेड़फोड़ को ठीक करने में जुटे रहे। कपिल देव पाठक बृहस्पतिवार को इलाहाबाद पहुंच गए। उनका कहना है कि हम लोग हाईकोर्ट में अपील करेंगे, ताकि नगर निगम की कार्रवाई आगे न बढ़े।
तालाब की जमीन पर था अवैध कब्जा..चेतावनी के बाद तोड़े कब्जे
बशारतपुर के खरैया पोखरा पर कुछ माह पूर्व नगर निगम और तहसील प्रशासन की संयुक्त पैमाइश में 01.55 एकड़ क्षेत्रफल में जिन 15 लोगों का अवैध कब्जा मिला था, नगर निगम ने उन सभी को नोटिस जारी किया था। छह लोगों ने पक्का निर्माण करा रखा है। जबकि, कुछ ने खाली प्लाॅट पर चहारदीवारी चलाकर कब्जा किया है। पैमाइश के दौरान स्पष्ट हुआ था कि अभिलेखों में तालाब का मूल रकबा 3.41 एकड़ है, जबकि मौके पर करीब डेढ़ एकड़ भूमि पर कब्जा है। पैमाइश के समय ही 8 जनवरी 2021 का हाईकोर्ट का स्थगन आदेश होने का दावा किया था। इसके बाद नगर निगम ने सोमवार को अनाउंसमेंट कर जगह खाली करने को कहा था। बुधवार को प्रवर्तन दल और पुलिस टीम ने मौके पर जाकर अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया। वहीं, आवासीय मकानों की बाउंड्री तोड़ कर उन्हें एक महीने के अंदर जगह खाली करने का अल्टीमेटम दिया।
इनसेट
सहमे खरैया वाले...बेटी बोली- मां आज फिर घर तो नहीं तोड़ेंगे
खरैया पोखरा पर अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई से सहमे परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। खरैया पोखरा पर अवैध निर्माण पर बुधवार को बुलडोजर की कार्रवाई के बाद वहां बसे परिवारों की नींद उड़ गई है। लोगों को आशियाना टूटने का डर सता रहा है। घर पर बुलडोजर चलते देख बच्चे भी सहम गए थे। बृहस्पतिवार को एक बच्ची स्कूल जाते समय मां से बोली- मां आज वे लोग फिर से बुलडोजर लेकर तो नहीं आएंगे। हमारा घर तो बचा रहेगा न?
बुधवार को दोपहर में हुई कार्रवाई के बाद से ही खरैया पोखरे के पास रहने वाले लोग तनाव में हैं। प्रभावित घरों के लोग रातभर सो नहीं पाए। लोगों को उम्मीद नहीं थी कि उनके आशियाने पर बुलडोजर चल जाएगा। अब निगम ने एक महीने का वक्त दिया है, तब तक उनको घर खाली कर देना है।
बृहस्पतिवार को दोपहर 12 बजे के करीब घर के सामने मलबा पड़ा था। लोगों ने घर में घुसने के लिए केवल रास्ता बनाया था। बाकी मलबा वैसे ही पड़ा रहा। जो लोग इस कार्रवाई से प्रभावित हैं, वह आपस में चर्चा करते हुए आगे की रणनीति बनाते दिखे।
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खरैया पोखरा इलाके में अवैध निर्माण तोड़े जाने के बाद मातम पसरा है। खरैया के अभयानंद शुक्ला ने बताया कि 2013 में उन्होंने बैंक से कर्ज लेकर यह जमीन खरीदी थी। अभी उसके आठ लाख रुपये बाकी हैं। किस्तें चल रही हैं। उन्होंने विशाल श्रीवास्तव से इसे खरीदा था। इसकी रजिस्ट्री है और खतौनी में नाम भी चढ़ा है। उसके बावजूद इसको अवैध करार दे रहे हैं। विशाल ने अनिल जेम्स से इसको खरीदा था। राजीव धनोका ने बताया कि उन्होंने भी बैंक से कर्ज लेकर रीता श्रीवास्तव से यहां जमीन खरीदी थी। 2020 तक खतौनी में नाम भी दर्ज था। उसके बाद यकायक क्या हुआ, यह समझ नहीं आया। अवैध जमीनों के खेल में फंसकर हम कैसे निकलें, यह समझ नहीं आ रहा।
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जमीन अवैध थी तो मकान बनाने से पहले रोका क्यों नहीं
65 वर्षीय सत्यभामा ने बताया कि अधियारीबाग की जमीन को बेचकर यहां वर्ष 2013 में जमीन खरीदी फिर मकान बनवाया। पति ने रिटायरमेंट और पेंशन के पैसे इसमें लगा दिए। बुधवार को एक झटके में घर के दरवाजे तोड़ दिए गए। यदि जमीन अवैध थी तो 11 साल पहले अफसरों ने उन्हें मकान बनाने से पहले रोका क्यों नहीं। यह कहते हुए उनके आंसू निकल गए।
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11 साल पहले मकान बनवाया, अब कहां जाएंगे
पूनम शुक्ला ने बताया कि 11 साल पहले विशाल श्रीवास्तव से जमीन खरीदी और इसके बाद मकान बनवाया। कार्रवाई के दौरान उनकी एक न सुनी गई। कोई भी कागज देखने को तैयार नहीं था। वह बस्ती की रहने वाली हैं। यहां पर टिफिन सर्विस चलाकर गुजारा करते हैं। पाई-पाई जुटाकर इस घर को बनाया था। जमीन की रजिस्ट्री और बैनामा है, उसके बाद भी घर खाली करने को बोल रहे हैं। बच्चे खाना नहीं खा रहे। बेटी स्कूल जाने से पहले पूछ रही कि आज फिर तो वे लोग (नगर निगम की टीम) नहीं आएंगे। कार्रवाई के बाद कोई भी सो नहीं पाया। यदि जमीन अवैध थी तो पहले रोकना चाहिए था। पहले तो किसी ने कुछ बताया ही नहीं।
जमापूंजी फंसा दिए अब कहां जाएंगे
शुभनारायण गुप्ता की पीड़ा भी ऐसी ही है। बोले-पेंशन के पैसे से 2014 में यह जमीन खरीदी थी। इसकी रजिस्ट्री भी है। पहले कुछ नहीं बताया गया, मगर कुछ दिन पहले ही पता लगा कि यहां निर्माण पर रोक है। अब हमारी बात कोई नहीं सुन रहा। बाउंड्रीवॉल को तोड़ दिया गया है। पूरी जमापूंजी यहां फंसाकर अब हम कहां जाएंगे।
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15 साल पहले तो किसी नहीं रोका नहीं, अब क्या हुआ?
पूजा शाही का भी यही दर्द है। उन्होंने बताया कि कार्रवाई से पहले टीम को जमीन के कागजात और कोर्ट के आदेश दिखाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने नहीं देखा। 15 साल पहले उन्होंने मकान बनाया था। तब किसी ने न तो जमीन खरीदने से रोका और न ही मकान बनाने से। 1998 से तो हम यहां पर रह ही रहे हैं तो अब यकायक क्या हो गया? हमने अवैध कब्जा नहीं किया है। सारी पूंजी लगाकर पिता जी ने इस घर को बनवाया है।अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी है।
हाईकोर्ट में लड़ेंगे अपनी लड़ाई
नगर निगम की कार्रवाई से प्रभावित लोगों ने एक होकर बृहस्पतिवार को आगे की रणनीति बनाई। अभयानंद शुक्ला बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में थे। बृहस्पतिवार को वह भागकर गोरखपुर आए और ताेड़फोड़ को ठीक करने में जुटे रहे। कपिल देव पाठक बृहस्पतिवार को इलाहाबाद पहुंच गए। उनका कहना है कि हम लोग हाईकोर्ट में अपील करेंगे, ताकि नगर निगम की कार्रवाई आगे न बढ़े।
तालाब की जमीन पर था अवैध कब्जा..चेतावनी के बाद तोड़े कब्जे
बशारतपुर के खरैया पोखरा पर कुछ माह पूर्व नगर निगम और तहसील प्रशासन की संयुक्त पैमाइश में 01.55 एकड़ क्षेत्रफल में जिन 15 लोगों का अवैध कब्जा मिला था, नगर निगम ने उन सभी को नोटिस जारी किया था। छह लोगों ने पक्का निर्माण करा रखा है। जबकि, कुछ ने खाली प्लाॅट पर चहारदीवारी चलाकर कब्जा किया है। पैमाइश के दौरान स्पष्ट हुआ था कि अभिलेखों में तालाब का मूल रकबा 3.41 एकड़ है, जबकि मौके पर करीब डेढ़ एकड़ भूमि पर कब्जा है। पैमाइश के समय ही 8 जनवरी 2021 का हाईकोर्ट का स्थगन आदेश होने का दावा किया था। इसके बाद नगर निगम ने सोमवार को अनाउंसमेंट कर जगह खाली करने को कहा था। बुधवार को प्रवर्तन दल और पुलिस टीम ने मौके पर जाकर अवैध निर्माण ध्वस्त कर दिया। वहीं, आवासीय मकानों की बाउंड्री तोड़ कर उन्हें एक महीने के अंदर जगह खाली करने का अल्टीमेटम दिया।
इनसेट
सहमे खरैया वाले...बेटी बोली- मां आज फिर घर तो नहीं तोड़ेंगे
खरैया पोखरा पर अतिक्रमण के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई से सहमे परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। खरैया पोखरा पर अवैध निर्माण पर बुधवार को बुलडोजर की कार्रवाई के बाद वहां बसे परिवारों की नींद उड़ गई है। लोगों को आशियाना टूटने का डर सता रहा है। घर पर बुलडोजर चलते देख बच्चे भी सहम गए थे। बृहस्पतिवार को एक बच्ची स्कूल जाते समय मां से बोली- मां आज वे लोग फिर से बुलडोजर लेकर तो नहीं आएंगे। हमारा घर तो बचा रहेगा न?
बुधवार को दोपहर में हुई कार्रवाई के बाद से ही खरैया पोखरे के पास रहने वाले लोग तनाव में हैं। प्रभावित घरों के लोग रातभर सो नहीं पाए। लोगों को उम्मीद नहीं थी कि उनके आशियाने पर बुलडोजर चल जाएगा। अब निगम ने एक महीने का वक्त दिया है, तब तक उनको घर खाली कर देना है।
बृहस्पतिवार को दोपहर 12 बजे के करीब घर के सामने मलबा पड़ा था। लोगों ने घर में घुसने के लिए केवल रास्ता बनाया था। बाकी मलबा वैसे ही पड़ा रहा। जो लोग इस कार्रवाई से प्रभावित हैं, वह आपस में चर्चा करते हुए आगे की रणनीति बनाते दिखे।