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Gorakhpur News: एआरओ के फर्जी हस्ताक्षर और वाद संख्या से पकड़ में आया फर्जीवाड़ा
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पुरानी फाइलें निकालकर जांच हुई तो पकड़ में आया नकली आदेश
गोरखपुर। फर्जी परवाना आदेश के जरिये नदी के किनारे की जमीनों का दूसरे के नाम नामांतरण कराने वाले धंधेबाजों ने जालसाजी तो की पर नकली आदेश को असली बनाने में चूक कर गए। उन्होंने यह पता नहीं किया कि जिस वक्त का आदेश था उस समय सहायक अभिलेख अधिकारी (एआरओ) कौन था और वाद नंबर भी गलत डाल दिया। एआरओ कार्यालय में जांच के दौरान जब फाइलें निकाली गई तो पूरा मामला पकड़ में आ गया।
एआरओ कार्यालय में परवाना आदेश के सत्यापन की जांच में पाया गया है कि फर्जीवाड़े में भी एक ही अधिकारी के दो तरह-तरह के हस्ताक्षर किए गए हैं। जिसे देखते ही कर्मचारियों ने फर्जी बता दिया। इसके बाद मूल फाइल निकाली गई तो कोई आदेश जारी हुआ ही नहीं था। फिर वाद संख्या का मिलान कराया तो वह फर्जी निकला।
धंधेबाजों का नेटवर्क भी बहुत तगड़ा है। खड्डा तहसील से परवाना आदेश का सत्यापन कराने आए एआरओ कार्यालय में राजस्वकर्मियों के पल-पल की खबरें भी उनके पास थीं। राजस्वकर्मियों का भी कहना है कि असली काश्तकार को उन्होंने कभी नहीं देखा है। बस पैरोकार ही आते रहते हैं। जबसे मामला पकड़ में आने लगा है अब उनका भी आना बंद हो गया है। सूत्रों की मानें तो इस नेटवर्क में तहसील के लोग भी मिले हुए हैं, जो अब जांच से संबंधित सूचनाएं भी धंधेबाजों तक पहुंचा रहे हैं। अब एआरओ कार्यालय में परवाना संबंधित सभी फाइलें अलग छांटकर रख दी गई ताकि और मामले आने पर कागजात खोजने की जरूरत नहीं पड़े।
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गोरखपुर। फर्जी परवाना आदेश के जरिये नदी के किनारे की जमीनों का दूसरे के नाम नामांतरण कराने वाले धंधेबाजों ने जालसाजी तो की पर नकली आदेश को असली बनाने में चूक कर गए। उन्होंने यह पता नहीं किया कि जिस वक्त का आदेश था उस समय सहायक अभिलेख अधिकारी (एआरओ) कौन था और वाद नंबर भी गलत डाल दिया। एआरओ कार्यालय में जांच के दौरान जब फाइलें निकाली गई तो पूरा मामला पकड़ में आ गया।
एआरओ कार्यालय में परवाना आदेश के सत्यापन की जांच में पाया गया है कि फर्जीवाड़े में भी एक ही अधिकारी के दो तरह-तरह के हस्ताक्षर किए गए हैं। जिसे देखते ही कर्मचारियों ने फर्जी बता दिया। इसके बाद मूल फाइल निकाली गई तो कोई आदेश जारी हुआ ही नहीं था। फिर वाद संख्या का मिलान कराया तो वह फर्जी निकला।
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धंधेबाजों का नेटवर्क भी बहुत तगड़ा है। खड्डा तहसील से परवाना आदेश का सत्यापन कराने आए एआरओ कार्यालय में राजस्वकर्मियों के पल-पल की खबरें भी उनके पास थीं। राजस्वकर्मियों का भी कहना है कि असली काश्तकार को उन्होंने कभी नहीं देखा है। बस पैरोकार ही आते रहते हैं। जबसे मामला पकड़ में आने लगा है अब उनका भी आना बंद हो गया है। सूत्रों की मानें तो इस नेटवर्क में तहसील के लोग भी मिले हुए हैं, जो अब जांच से संबंधित सूचनाएं भी धंधेबाजों तक पहुंचा रहे हैं। अब एआरओ कार्यालय में परवाना संबंधित सभी फाइलें अलग छांटकर रख दी गई ताकि और मामले आने पर कागजात खोजने की जरूरत नहीं पड़े।
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