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Gorakhpur News: गंदे किचन में बन रहा था छात्रों के लिए भोजन....बीमार तो पड़ेंगे ही

Tue, 22 Jul 2025 12:38 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 22 Jul 2025 12:38 AM IST
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Gorakhpur News: Food was being prepared for students in a dirty kitchen...they will surely fall ill
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 40 छात्रों के बीमार होने का मामला
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खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने पहुंचकर की जांच

मेडिकल कॉलेज की तरफ से नहीं दिया गया है टेंडर, छात्र खुद कर रहे इंतजाम
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के न्यू यूजी हॉस्टल में फूड प्वाइजनिंग से 40 छात्रों के बीमार होने के मामले की सोमवार को खाद्य सुरक्षा विभाग ने कॉलेज पहुंचकर जांच की। हॉस्टल के जिस किचन में छात्रों के लिए भोजन बनता है वह काफी अव्यस्थित व गंदा है। इसका संचालन छात्र खुद ही चंदा जुटाकर करते हैं। यहां जिस दुकान से पनीर व मशरूम आता है, वहां से पनीर व मशरूम के नमूने लिए गए। इसके अलावा आटा, चावल और अचार के नमूने भी जांच के लिए भेजे गए हैं।
बीते शुक्रवार को न्यू यूजी हॉस्टल के करीब 15 छात्रों को खाने के बाद उल्टी-दस्त होने लगी। उन्होंने जाकर कॉलेज के नेहरू अस्पताल से दवा ली तो आराम मिला। इसके बाद शनिवार को भी 15 छात्र बीमार हुए। वहीं रविवार को 10 छात्रों की तबीयत बिगड़ी। किसी ने इसकी सूचना प्रिंसिपल डॉ. रामकुमार जायसवाल की दो तो वे रात में ही हॉस्टल पहुंचे और करीब 40 छात्रों को इमरजेंसी वार्ड भेजकर जांच कराई गई। इनमें से 10 छात्रों को वार्ड में भर्ती कर उपचार किया गया, शेष को प्राथमिक उपचार कर हॉस्टल भेज दिया गया था। पूछताछ में पता चला कि मशरूम की सब्जी खाने के बाद इनकी सेहत बिगड़ी थी।
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सोमवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने हॉस्टल पहुंचकर जांच की। जांच टीम ने देखा कि यूजी हॉस्टल का किचन काफी अव्यस्थित है। अंदर खाली डिब्बा, प्लास्टिक व अन्य सामान इधर-उधर रखे गए थे। खाना बनाने व बर्तन धोने की जगह पर काफी गंदगी दिखी। मेस का संचालन छात्रों की तरफ से जुटाए गए चंदे से मनमानी तरीके से होता है। जिन दुकानों से सामान आते हैं, वहां भी टीम पहुंची व सैंपल लिए।
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कॉलेज में संचालित सभी नौ हॉस्टल में यही हालात
मेडिकल कॉलेज परिसर में कुल नौ हॉस्टल हैं और सभी का अपना अलग-अलग मेस है लेकिन एक भी मेस का संचालन कोई संस्था नहीं करती। छात्रों ने बताया कि वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है कि छात्र आपस में चंदा जुटाकर मेस का संचालन करते हैं। प्रति माह प्रत्येक छात्र को 3000 से 3500 रुपये तक देना होता है। छात्रों का समूह ही किसी व्यक्ति को खोजकर मेस संचालन के लिए दे देता है। वहां छानबीन में पता लगा कि एक साथ 300 से अधिक छात्रों के भोजन बनाने के लिए मेस संचालक के पास उतने संसाधन नहीं होते।
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मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल के मेस की जांच की गई। वहां काफी गंदगी मिली। मेस का संचालन भी अव्यवस्थित है। वहां से चावल, आटा व अचार के नमूने परीक्षण के लिए भरे गए हैं। इसके अलावा जिस दुकान से पनीर व मशरूम मंगाया जाता था, वहां से भी नमूने लिए गए हैं। पूरे प्रकरण की रिपोर्ट शासन को भेजी गई है।


- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त (खाद्य)
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कोट-
हॉस्टलों में मेस का संचालन लंबे समय से छात्र ही करते आए हैं। इस घटना को देखते हुए एक कमेटी बनाकर सुझाव मांगा गया है। हम जल्द ही एक प्रस्ताव भी शासन को भेजने वाले हैं, जिनमें परिसर के सभी हॉस्टल मेस एक कंपनी को दे दिए जाएं। बड़ी कंपनी आएगी तो वहां खाना बनाने में मशीनों का उपयाेग होगा, जिससे स्वच्छता के साथ ही गुणवत्ता भी बनी रहेगी।

- डॉ. रामकुमार जायसवाल, प्राचार्य, बीआरडी मेडिकल कॉलेज
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