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Gorakhpur News: संक्रमण का डर...चिड़ियाघर में ब्लो टॉर्चिंग से कीटाें का किया सफाया
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बाड़ों के कोने में उच्च तापमान से कीटों को मारा गया
लगातार वन्यजीवों की मौत के बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने उठाया कदम
गोरखपुर। चिड़ियाघर में वन्यजीवों की मौत के पीछे संक्रमण की आशंका है। इसे लेकर पूरे परिसर को सैनिटाइज कराया गया है। रविवार को ब्लो टॉर्चिंग कर बाड़ों में कीटों का सफाया किया गया। कोने-कोने में उच्च तापमान वाली लौ से कीटों को मारा गया।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में भेड़िया भैरवी, बाघिन शक्ति और तेंदुआ मोना की मौत हो गई चुकी है। इसमें संक्रमण की आशंका थी। इसलिए पहले ही सभी बाड़ों को सैनिटाइज किया गया था।
चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि ब्लो टॉर्चिंग का उपयोग कीटों को मारने के लिए किया जाता है। इससे लकड़ी या अन्य सामग्रियों में रहने वाले कीट उच्च तापमान वाली लौ से नष्ट हो जाते हैं। रविवार को सभी बाड़ों में इसकी मदद से कीटों को नष्ट किया गया। ब्लो टॉर्चिंग से कीटों के अंडे, लार्वा और वयस्क कीटों को मारना आसान होता है।
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कानपुर पहुंचा बब्बर शेर पटौदी
बब्बर शेर पटौदी रविवार सुबह कानपुर चिड़ियाघर पहुंच गया। अब उसे वहीं रखकर इलाज किया जाएगा। शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में बुजुर्ग वन्यजीवों की संख्या काफी ज्यादा हो गई थी। चिड़ियाघर में चिकित्सकों की कमी भी थी। इसी वजह से पटौदी को कानपुर चिड़ियाघर भेजने का फैसला लिया गया। वहां उसका बेहतर इलाज हो सकेगा।
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लगातार वन्यजीवों की मौत के बाद चिड़ियाघर प्रशासन ने उठाया कदम
गोरखपुर। चिड़ियाघर में वन्यजीवों की मौत के पीछे संक्रमण की आशंका है। इसे लेकर पूरे परिसर को सैनिटाइज कराया गया है। रविवार को ब्लो टॉर्चिंग कर बाड़ों में कीटों का सफाया किया गया। कोने-कोने में उच्च तापमान वाली लौ से कीटों को मारा गया।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में भेड़िया भैरवी, बाघिन शक्ति और तेंदुआ मोना की मौत हो गई चुकी है। इसमें संक्रमण की आशंका थी। इसलिए पहले ही सभी बाड़ों को सैनिटाइज किया गया था।
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चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि ब्लो टॉर्चिंग का उपयोग कीटों को मारने के लिए किया जाता है। इससे लकड़ी या अन्य सामग्रियों में रहने वाले कीट उच्च तापमान वाली लौ से नष्ट हो जाते हैं। रविवार को सभी बाड़ों में इसकी मदद से कीटों को नष्ट किया गया। ब्लो टॉर्चिंग से कीटों के अंडे, लार्वा और वयस्क कीटों को मारना आसान होता है।
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कानपुर पहुंचा बब्बर शेर पटौदी
बब्बर शेर पटौदी रविवार सुबह कानपुर चिड़ियाघर पहुंच गया। अब उसे वहीं रखकर इलाज किया जाएगा। शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में बुजुर्ग वन्यजीवों की संख्या काफी ज्यादा हो गई थी। चिड़ियाघर में चिकित्सकों की कमी भी थी। इसी वजह से पटौदी को कानपुर चिड़ियाघर भेजने का फैसला लिया गया। वहां उसका बेहतर इलाज हो सकेगा।