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Gorakhpur News: पिता ने बेटी के सामने पत्नी को मारी थी गोली
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ममता हत्याकांड : वारदात के वक्त पड़ोस की दुकान में किचन का सामान ले रही थी बेटी मुक्ति
बड़े मामा और थाना प्रभारी संग घटनास्थल पहुंचकर बताई वारदात की कहानी
वारदात को याद कर मुक्ति के आंखों से छलक उठे आंसू, मामा ने भांजी को सीने से लगाया
गोरखपुर। शाहपुर इलाके में विश्वकर्मा चौहान ने बेटी मुक्ति (13) के सामने ही गोली मारकर उसकी मां ममता चौहान की जिंदगी छीन ली थी। वारदात के वक्त बेटी पड़ोस की दुकान से किचन का सामान ले रही थी। शुक्रवार को अपने बड़े मामा संदीप और थाना प्रभारी नीरज राय के साथ घटनास्थल पहुंच मुक्ति ने वारदात की कहानी बताई।
मुक्ति शुक्रवार सुबह बड़े मामा संदीप चौहान और छोटे मामा सुभाष चौहान के साथ शाहपुर थाने पहुंची। वहां बयान दर्ज कराने के बाद थाना प्रभारी व बड़े मामा संग घटनास्थल पहुंची। उसने पुलिस को बताया कि बुधवार देर शाम ऑफिस से आने के बाद वह मां ममता संग किचन का सामान लेने के लिए स्कूटी से निकली थी। राशन की दुकान पर सामान की पर्ची देने के बाद मां पड़ोस में स्थित फोटो स्टूडियो पर अपना फोटो लेने चली गईं। करीब 10 मिनट बाद उसने फोटो स्टूडियो के बाहर खून से लथपथ मां को जमीन पर पड़ा और सड़क किनारे बैठे अपने पिता को देखा।
मां को खो चुकी मुक्ति की आंखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उसने भरी आवाज में अपने मामा से कहा-पापा गंदे हैं। उन्होंने मम्मी को मार डाला। बड़े मामा संदीप ने भांजी को सीने से लगाया और ढांढस बंधाने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस की टीम उसे अपनी गाड़ी में बैठाकर ममता के किराए के मकान में ले गई। वहां पड़ोसियों से बातचीत कर उनका बयान दर्ज किया गया।
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मुक्ति की सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी अब मायके पक्ष पर आ गई है। मां की मौत और पिता की गिरफ्तारी के बीच फंसी बच्ची की आंखों में हर पल वही दर्दनाक मंजर घूम रहा है।
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15 साल तक सबकुछ ठीक चला
ममता के भाई संदीप ने बताया कि 2008 में विश्वकर्मा और ममता की शादी हुई थी। 15 साल तक उनकी शादीशुदा जिंदगी अच्छी चली। परिवार ने उन्हें कभी झगड़ते हुए नहीं देखा। इधर दो साल से उनके बीच दूरियां इतनी बढ़ीं कि गुलरिहा के हरसेवकपुर में पति विश्वकर्मा का घर छोड़कर ममता अपनी 13 वर्षीय बेटी मुक्ति के साथ शाहपुर में गीता वाटिका के पास किराए के मकान में शिफ्ट हो गईं। संदीप ने बताया कि विश्वकर्मा पिछले साल फरवरी माह में लुधियाना आया था। दो दिन उनके साथ काम किया। इसके बाद मुंबई चला गया। फिर वापस गोरखपुर आ गया था। वह अक्सर 10 हजार तो कभी 20 हजार रुपये की मांग करता था। एक साल पहले उन्होंने ममता के चलते बगैर रुपये लिए उसके घर में टाइल्स व मार्बल का काम किया था। इसमें उनके डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए थे।
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बड़े मामा और थाना प्रभारी संग घटनास्थल पहुंचकर बताई वारदात की कहानी
वारदात को याद कर मुक्ति के आंखों से छलक उठे आंसू, मामा ने भांजी को सीने से लगाया
गोरखपुर। शाहपुर इलाके में विश्वकर्मा चौहान ने बेटी मुक्ति (13) के सामने ही गोली मारकर उसकी मां ममता चौहान की जिंदगी छीन ली थी। वारदात के वक्त बेटी पड़ोस की दुकान से किचन का सामान ले रही थी। शुक्रवार को अपने बड़े मामा संदीप और थाना प्रभारी नीरज राय के साथ घटनास्थल पहुंच मुक्ति ने वारदात की कहानी बताई।
मुक्ति शुक्रवार सुबह बड़े मामा संदीप चौहान और छोटे मामा सुभाष चौहान के साथ शाहपुर थाने पहुंची। वहां बयान दर्ज कराने के बाद थाना प्रभारी व बड़े मामा संग घटनास्थल पहुंची। उसने पुलिस को बताया कि बुधवार देर शाम ऑफिस से आने के बाद वह मां ममता संग किचन का सामान लेने के लिए स्कूटी से निकली थी। राशन की दुकान पर सामान की पर्ची देने के बाद मां पड़ोस में स्थित फोटो स्टूडियो पर अपना फोटो लेने चली गईं। करीब 10 मिनट बाद उसने फोटो स्टूडियो के बाहर खून से लथपथ मां को जमीन पर पड़ा और सड़क किनारे बैठे अपने पिता को देखा।
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मां को खो चुकी मुक्ति की आंखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उसने भरी आवाज में अपने मामा से कहा-पापा गंदे हैं। उन्होंने मम्मी को मार डाला। बड़े मामा संदीप ने भांजी को सीने से लगाया और ढांढस बंधाने की कोशिश की। इसके बाद पुलिस की टीम उसे अपनी गाड़ी में बैठाकर ममता के किराए के मकान में ले गई। वहां पड़ोसियों से बातचीत कर उनका बयान दर्ज किया गया।
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मुक्ति की सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी अब मायके पक्ष पर आ गई है। मां की मौत और पिता की गिरफ्तारी के बीच फंसी बच्ची की आंखों में हर पल वही दर्दनाक मंजर घूम रहा है।
15 साल तक सबकुछ ठीक चला
ममता के भाई संदीप ने बताया कि 2008 में विश्वकर्मा और ममता की शादी हुई थी। 15 साल तक उनकी शादीशुदा जिंदगी अच्छी चली। परिवार ने उन्हें कभी झगड़ते हुए नहीं देखा। इधर दो साल से उनके बीच दूरियां इतनी बढ़ीं कि गुलरिहा के हरसेवकपुर में पति विश्वकर्मा का घर छोड़कर ममता अपनी 13 वर्षीय बेटी मुक्ति के साथ शाहपुर में गीता वाटिका के पास किराए के मकान में शिफ्ट हो गईं। संदीप ने बताया कि विश्वकर्मा पिछले साल फरवरी माह में लुधियाना आया था। दो दिन उनके साथ काम किया। इसके बाद मुंबई चला गया। फिर वापस गोरखपुर आ गया था। वह अक्सर 10 हजार तो कभी 20 हजार रुपये की मांग करता था। एक साल पहले उन्होंने ममता के चलते बगैर रुपये लिए उसके घर में टाइल्स व मार्बल का काम किया था। इसमें उनके डेढ़ लाख रुपये खर्च हुए थे।