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Gorakhpur News: प्रवेश में फर्जी वाड़ाः अभिषेक यादव पर दर्ज 14 केस में एफआर किसने लगाई...जांच शुरू
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गोरखपुर। प्रवेश में फर्जीवाड़ा करने के मामले में राज नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज के संचालक अभिषेक यादव पर वर्ष 2015 में कोतवाली थाने में अलग-अलग तहरीर पर जालसाजी, हत्या की कोशिश और धमकी देने की धाराओं में 14 केस दर्ज किए गए थे। सभी मामलों में 2016 में एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगाकर अभिषेक को राहत दे दी गई थी। शासन के निर्देश पर एक बार फिर नौ साल पुरानी फाइल खोली गई है। एफआर लगाने वाले विवेचकों पर कार्रवाई करने के लिए एसपी उत्तरी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने जांच शुरू कर दी है।
दरअसल, अभिषेक यादव मार्च 2022 में फर्जी लेटर हेड इस्तेमाल से दाखिले के बाद फिर चर्चा में आया। तब वर्ष 2015 के दौरान कोतवाली में दर्ज 14 केस की फाइल फिर से खोली गई थी। पुलिस ने नए सिरे से गोपनीय जांच कर सभी मामलों में चार्जशीट दाखिल की थी। तब जांच में सामने आया था कि सभी मामलों में एक ही दिन में गलत तरीके से फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी। तब एफआर लगाने वाले विवेचक व पुलिसकर्मियों की जांच तत्कालीन एसएसपी ने शुरू कराई थी। यह बाद में ठंडे बस्ते में चली गई थी।
अब शासन ने मामले का फिर संज्ञान लिया है। संचालक अभिषेक के केस में गलत तरीके से एफआर लगाने वाले पर कार्रवाई के बारे में पूछा गया है। इसके बाद यह जांच एसपी उत्तरी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव को सौंपी गई है। उन्होंने मामले में बंद फाइलों को फिर से खोलकर जांच शुरू कर दी है।
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25 से अधिक विवेचकों की होगी जांच
एसपी उत्तरी के अनुसार, 14 केस दर्ज किए गए थे। इसमें अलग-अलग विवेचकों ने जांच की है। इसमें 25 से अधिक विवेचकों के नाम सामने आ रहे हैं। एफआर लगाने में किसकी क्या भूमिका है, इसका पता लगाया जा रहा है। जो भी दोषी होगा, उसपर जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जब्त हो चुकी है अभिषेक की संपत्ति
गैंगस्टर की कार्रवाई कर प्रशासन अभिषेक यादव की 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त कर चुका है। इसमें राज नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज, राज गौशाला, जटेपुर उत्तरी स्थित घर, गाड़ियां और 19 बैंक खाते शामिल हैं।
वर्जन
पुराना मामला है। इसमें गलत तरीके से एफआर लगाई गई थी। बाद में फिर जांच कर चार्जशीट दाखिल की गई, लेकिन एफआर लगाने वाले विवेचकों पर कार्रवाई नहीं हुई थी। जांच कर अब कार्रवाई की जाएगी।
-जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी उत्तरी
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दरअसल, अभिषेक यादव मार्च 2022 में फर्जी लेटर हेड इस्तेमाल से दाखिले के बाद फिर चर्चा में आया। तब वर्ष 2015 के दौरान कोतवाली में दर्ज 14 केस की फाइल फिर से खोली गई थी। पुलिस ने नए सिरे से गोपनीय जांच कर सभी मामलों में चार्जशीट दाखिल की थी। तब जांच में सामने आया था कि सभी मामलों में एक ही दिन में गलत तरीके से फाइनल रिपोर्ट लगा दी गई थी। तब एफआर लगाने वाले विवेचक व पुलिसकर्मियों की जांच तत्कालीन एसएसपी ने शुरू कराई थी। यह बाद में ठंडे बस्ते में चली गई थी।
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अब शासन ने मामले का फिर संज्ञान लिया है। संचालक अभिषेक के केस में गलत तरीके से एफआर लगाने वाले पर कार्रवाई के बारे में पूछा गया है। इसके बाद यह जांच एसपी उत्तरी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव को सौंपी गई है। उन्होंने मामले में बंद फाइलों को फिर से खोलकर जांच शुरू कर दी है।
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25 से अधिक विवेचकों की होगी जांच
एसपी उत्तरी के अनुसार, 14 केस दर्ज किए गए थे। इसमें अलग-अलग विवेचकों ने जांच की है। इसमें 25 से अधिक विवेचकों के नाम सामने आ रहे हैं। एफआर लगाने में किसकी क्या भूमिका है, इसका पता लगाया जा रहा है। जो भी दोषी होगा, उसपर जांच कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जब्त हो चुकी है अभिषेक की संपत्ति
गैंगस्टर की कार्रवाई कर प्रशासन अभिषेक यादव की 100 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त कर चुका है। इसमें राज नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज, राज गौशाला, जटेपुर उत्तरी स्थित घर, गाड़ियां और 19 बैंक खाते शामिल हैं।
वर्जन
पुराना मामला है। इसमें गलत तरीके से एफआर लगाई गई थी। बाद में फिर जांच कर चार्जशीट दाखिल की गई, लेकिन एफआर लगाने वाले विवेचकों पर कार्रवाई नहीं हुई थी। जांच कर अब कार्रवाई की जाएगी।
-जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव, एसपी उत्तरी