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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   In Gorakhpur, Dr. Kumar Satish Ravi was embroiled in controversies even before his appointment.

Gorakhpur News: नियुक्ति से पहले ही विवादों में घिर गए थे डॉ. कुमार सतीश रवि, शुक्रवार से सेवा कर दी गई समाप्त

Sun, 22 Sep 2024 04:02 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sun, 22 Sep 2024 04:02 PM IST
सार

एनाटॉमी के प्रोफेसर डॉ. कुमार सतीश रवि की नियुक्ति को गलत तथ्य प्रस्तुत करने के आरोप में समाप्त कर दिया गया है। शुक्रवार को कार्यकारी निदेशक ने इन्हें एम्स गोरखपुर से कार्यमुक्त करने का आदेश भी जारी कर दिया। आदेश की एक कॉपी एनाटॉमी विभाग के दफ्तर के सामने चस्पा करने के साथ ही इनके घर भी भेज दी गई। डॉ. रवि ने इसे मनमानी करार देते हुए कहा कि गोरखपुर में अभी तक उनके खिलाफ तीन जांच हुई है, जिनमें से दो में उन्हें क्लीन चिट मिली है।

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In Gorakhpur, Dr. Kumar Satish Ravi was embroiled in controversies even before his appointment.
गोरखपुर एम्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एम्स एनाटॉमी के प्रोफेसर डॉ. कुमार सतीश रवि का विवादों से पीछा नहीं छूट रहा है। एम्स ऋषिकेश में भी उनका विवाद कोर्ट तक पहुंचा था। गोरखपुर आए तो नियुक्ति से पहले ही शिकायत आ गई। इनके शोध पत्र से अधिक विवादों की चर्चा है। हालांकि, इनका कहना है कि हर जगह कुछ खास लोग उन्हें टारगेट करते हैं।
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गोरखपुर एम्स में जिस व्यक्ति ने उनके खिलाफ शिकायत की थी, वही जांच अधिकारी बन गया और निर्णय प्रक्रिया में भी पूरी तरह से उनका ही हाथ रहा। वहीं, एम्स प्रशासन का कहना है कि जो भी कार्रवाई हुई है, वह नियमों के आधार पर की
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गई है।

एनाटॉमी के प्रोफेसर डॉ. कुमार सतीश रवि की नियुक्ति को गलत तथ्य प्रस्तुत करने के आरोप में समाप्त कर दिया गया है। शुक्रवार को कार्यकारी निदेशक ने इन्हें एम्स गोरखपुर से कार्यमुक्त करने का आदेश भी जारी कर दिया। आदेश की एक कॉपी एनाटॉमी विभाग के दफ्तर के सामने चस्पा करने के साथ ही इनके घर भी भेज दी गई।
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डॉ. रवि ने इसे मनमानी करार देते हुए कहा कि गोरखपुर में अभी तक उनके खिलाफ तीन जांच हुई है, जिनमें से दो में उन्हें क्लीन चिट मिली है। तीनों ही जांच कमेटियों ने उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका नहीं दिया है। बिना पक्ष सुने ही एकतरफा फैसला सुनाना प्राकृतिक न्याय के नियमों के खिलाफ है।

इनका कहना है कि जिस व्यक्ति ने शिकायत की, उसने ही जांच की। इससे पहले उसी व्यक्ति ने नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान भी अभिलेखों का सत्यापन किया था। इससे प्रतीत हो रहा है कि उनके खिलाफ जान बूझकर षडयंत्र रचा गया है।

एनओसी पर दोनों पक्ष का अलग-अलग तर्क
मामले की जांच करने वाले एम्स के गवर्निंग काउंसिल के सदस्य डॉ. अशोक जान्हवी प्रसाद ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया है कि डॉ. रवि के खिलाफ जो शिकायतें हैं, उससे संबंधित दस्तावेज नहीं दिए गए। उन्होंने तत्कालीन कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर का भी जिक्र करते हुए लिखा है कि कार्यकारी निदेशक ने कहा था कि ये डॉक्यूमेंट मिल जाएंगे, लेकिन मिले नहीं।

एक जगह एनओसी को लेकर भी चर्चा है। जांच अधिकारी ने लिखा है कि डॉ. रवि ने एम्स ऋषिकेश के विभिन्न विभागों से एनओसी ली है। एनओसी को कैरेक्टर सर्टिफिकेट का पर्यायवाची नहीं माना जा सकता। वहीं डॉ. रवि का कहना है कि एम्स ऋषिकेश में ज्वाइनिंग के बाद 10 साल की सेवा में दो प्रमोशन मिले।

जिन डॉक्यूमेंट के आधार पर एम्स ऋषिकेश ने एनओसी दी, बधाई दी, वही गोरखपुर में आकर गलत कैसे हो गए। डॉ. रवि का कहना है कि जिस पद के लिए उन्होंने आवेदन किया था, उसकी न्यूनतम योग्यता के आधार पर ही कोई निर्णय होता है, और वह सब कुछ रिकार्ड में है।

कार्यकारी निदेशक एम्स डॉ जीके पाल ने बताया कि शिकायत एम्स प्रेसिडेंट के पास हुई थी, जिन्होंने डॉ. अशोक जान्हवी प्रसाद से इसकी जांच कराई थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर कमेटी की बैठक में इस पर निर्णय लिया गया था। सब कुछ एम्स के सार्वजनिक प्लेटफार्म पर मौजूद है। किसी को कोई आपत्ति है तो वह अपनी शिकायत भी उचित फोरम पर दर्ज करा सकता है।

सांसद को भेजा गया सात पेज का जवाब
गोरखपुर। एम्स गोरखपुर में कार्यकारी निदेशक के पुत्र के सर्टिफिकेट, कैंटीन समेत सभी विवादों पर सांसद की तरफ से दिए गए प्रश्नों का एम्स प्रशासन ने जवाब भेज दिया है। सांसद ने दो दिन में सभी बिंदुओं पर लिखित जवाब मांगा था।
बीते 30 अगस्त को कार्यकारी निदेशक के पुत्र का नामांकन माइक्रोबायोलॉजी के पीजी सीट पर हुआ था, लेकिन जाति प्रमाणपत्र पर आपत्ति उठने के बाद तीन सितंबर को नामांकन वापस हो गया था।

इसके अगले दिन एम्स की कैंटीन में खराब खाने को लेकर मामला उठा था। तीन दिन पहले सांसद रविकिशन एम्स परिसर में स्वच्छता कार्यक्रम के दौरान पहुंचे तो उन्होंने कार्यकारी निदेशक से सभी बिंदुओं पर बात की। इस दौरान सांसद की तरफ से 23 बिंदुओं का एक पत्र दिया गया था, जिस पर दो दिन में जवाब मांगा गया था। शनिवार की शाम को यह जवाब सांसद को भेज दिया गया।


एम्स में अब फैमिली मेडिसिन विषय की भी होगी पढ़ाई
गोरखपुर। एम्स में इस सत्र से फैमिली मेडिसिन विषय पर भी पढ़ाई शुरू हो गई है। पीजी में तीन सीटें एम्स गोरखपुर को मिली हैं। यह पढ़ाई कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के अधीन ही होगी। शनिवार को कार्यकारी निदेशक ने नए छात्रों का परिचय कराते हुए पढ़ाई शुरू कराई। निदेशक ने बताया कि देश भर में एम्स में फैमिली मेडिसिन की पढ़ाई शुरू कराई गई है।
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