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Gorakhpur News: ध्वस्तीकरण के लिए नीलाम किए जाएंगे जर्जर विद्यालय

Mon, 04 Aug 2025 12:34 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 04 Aug 2025 12:34 AM IST
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Gorakhpur News: Dilapidated schools will be auctioned for demolition
जर्जर विद्यालयों के गिरने की घटना को देखते हुए बीएसए ने दिए निर्देश
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किसी भी तरह की घटना पर प्रधानाध्यापक के साथ खंड शिक्षा अधिकारी होंगे जिम्मेदार
गोरखपुर। जिले के जर्जर हो चुके विद्यालयों को नीलाम कराकर ध्वस्त कराया जाएगा। वहीं अगर विद्यालय के जर्जर भवन के गिरने से किसी तरह की जनहानि होती है तो इसके लिए स्कूल के प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारी जिम्मेदार होंगे।
बीएसए रमेंद्र कुमार सिंह ने खंड शिक्षा अधिकारियों व प्रधानाध्यापकों को निर्देश देते हुए कहा कि विकास खंडों में कुछ विद्यालय भवन की स्थिति बेहद खराब है। इस प्रकार के विद्यालयों में कक्षाओं का संचालन किया जाना छात्र हित में बिल्कुल नहीं है। जिन भी विद्यालयों के भवन जर्जर हैं व तकनीकी रिपोर्ट पहले भेजी जा चुकी है। उन विद्यालयों को नीलाम कराते हुए ध्वस्तीकरण कराएं। कहा कि अगर तकनीकी रिपोर्ट प्राप्त नहीं है और प्रथम दृष्टया भवन जर्जर प्रतीत होता है तो उस पर लाल रंग से चेतावनी लिखें कि ''''भवन जर्जर स्थिति में है यहां प्रवेश सख्त वर्जित है''''।
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बीएसए ने चेताया है कि यदि किसी भी जर्जर भवन पर चेतावनी अंकित नहीं पाया जाता है और किसी भी तरह की अप्रिय घटना घटित होती है तो संबंधित प्रधानाध्यापक एवं खंड शिक्षा अधिकारी को संयुक्त रूप से जिम्मेदार मानते हुए कार्रवाई की जाएगी।
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छत का प्लास्टर गिरने से घायल हो गया था छात्र



बीएसए के निर्देश के बाद भी जिले के कंपोजिट पूर्व माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका द्वारा विद्यालय के जर्जर कक्ष में पढ़ाई कराई जा रही थी। शनिवार को विद्यालय के कमरे की छत का प्लास्टर अचानक टूटकर पांचवी के छात्र विक्रम की सिर पर गिर गया। प्लास्टर गिरने से छात्र का सिर फट गया। इसके अलावा चार अन्य विद्यार्थियों को हल्की चोट आई थी। इस घटना के बाद स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे सहमे हुए हैं। विद्यालय को शिफ्ट करने की कवायद चल रही है।

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जिले में 50 से अधिक विद्यालय जर्जर
जिले के करीब 50 स्कूलों के भवन जर्जर हाल में हैं। इनमें से कई में जहां बच्चे खतरे के बीच पढ़ाई करते हैं तो वहीं, कुछ के बच्चों को निकट के सुरक्षित भवनों में शिफ्ट कर शिक्षा विभाग द्वारा पठन-पाठन की व्यवस्था कराई गई है।

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राजस्थान की घटना के बाद शुरू हुई थी सख्ती
राजस्थान में हुई घटना के बाद शिक्षा विभाग ने सख्ती शुरू कर दी थी। बीएसए ने जर्जर विद्यालयों को चिह्नित कर वहां पठन-पाठन तत्काल बंद कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कुछ प्रधानाध्यापक मनमानी करते हुए अभी भी जर्जर विद्यालयों में कक्षाएं संचालित करा रहे हैं।
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