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Gorakhpur News: धनतेरस आज, छह दिनों के दिवाली पर्व की हो गई शुरुआत
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20 अक्तूबर को दिवाली, 22 को अन्नकूट व 23 को होगा भैया दूज
गोरखपुर। धनतेरस का त्योहार शनिवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। बाजारों में लोग जमकर खरीदारी करेंगे। शाम को भगवान धन्वंतरी की पूजा-अर्चना बड़े ही आस्था के साथ की जाएगी। इसके अलावा साथ ही 20 अक्तूबर को दिवाली, 22 को अन्नकूट व 23 अक्तूबर को भैया दूज मनाया जाएगा। शुक्रवार की शाम को भी बाजारों में काफी चहल-पहल देखी गई।
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार धनतेरस के दिन शनिवार को लोग खरीदारी करेंगे ही त्रियोदशी तिथि के कारण रविवार को भी दोपहर 01: 54 बजे तक खरीदारी की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि इस दिन धनवंतरी की पूजा-अर्चना बड़े ही आस्था भाव के साथ की जाएगी। शाम 06: 41 बजे से 07:53 बजे तक शुभ बेला में धनवंतरी के पूजन के लिए पूर्ण प्रशस्त समय माना गया है। इसी समय के बीच लोग पूजन-अर्चना करेंगे तो शुभ होगा। इस दिन किसी को उधार नहीं देना चाहिए और धन का अपव्यय भी नहीं करना चाहिए। सांयकाल मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपदान करना चाहिए। दीपदान करने से यमराज प्रसन्न रहते हैं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। रात को दीपक में तेल डालकर रुई की बत्ती जलाकर एक कौड़ी डालकर, रोली, चावल गुड़ से नैवेद्य अर्पित कर दीप जलाकर यम की पूजन करनी चाहिए।
गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के सहायक आचार्य डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र के अनुसार धन्वंतरी भगवान विष्णु के अवतार और आरोग्यता के देवता माने जाते हैं। उन्होंने चिकित्सक का पद प्राप्त किया है। वाल्मीकि रामायण, हरिवंश पुराण आदि के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि समुद्र से प्रकट हुए थे। इसी कारण भगवान विष्णु ने उन्हें अब्ज की संज्ञा प्रदान की। मान्यता है कि धनवंतरी का प्राकट्य कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को हुआ। इसी कारण इस तिथि को धन्वंतरि जयंती के रूप में मनाया जाता है। ध्यातव्य है कि समुद्र मंथन के दौरान शरद पूर्णिमा को चंद्रमा का, कार्तिक कृष्ण द्वादशी को कामधेनु का, कार्तिक चतुर्दशी को काली का और कार्तिक अमावस्या को लक्ष्मी का सागर से प्राकट्य हुआ था।
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गोरखपुर। धनतेरस का त्योहार शनिवार को धूमधाम से मनाया जाएगा। बाजारों में लोग जमकर खरीदारी करेंगे। शाम को भगवान धन्वंतरी की पूजा-अर्चना बड़े ही आस्था के साथ की जाएगी। इसके अलावा साथ ही 20 अक्तूबर को दिवाली, 22 को अन्नकूट व 23 अक्तूबर को भैया दूज मनाया जाएगा। शुक्रवार की शाम को भी बाजारों में काफी चहल-पहल देखी गई।
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार धनतेरस के दिन शनिवार को लोग खरीदारी करेंगे ही त्रियोदशी तिथि के कारण रविवार को भी दोपहर 01: 54 बजे तक खरीदारी की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि इस दिन धनवंतरी की पूजा-अर्चना बड़े ही आस्था भाव के साथ की जाएगी। शाम 06: 41 बजे से 07:53 बजे तक शुभ बेला में धनवंतरी के पूजन के लिए पूर्ण प्रशस्त समय माना गया है। इसी समय के बीच लोग पूजन-अर्चना करेंगे तो शुभ होगा। इस दिन किसी को उधार नहीं देना चाहिए और धन का अपव्यय भी नहीं करना चाहिए। सांयकाल मुख्य द्वार के दोनों ओर दीपदान करना चाहिए। दीपदान करने से यमराज प्रसन्न रहते हैं और अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। रात को दीपक में तेल डालकर रुई की बत्ती जलाकर एक कौड़ी डालकर, रोली, चावल गुड़ से नैवेद्य अर्पित कर दीप जलाकर यम की पूजन करनी चाहिए।
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गोरखनाथ मंदिर संस्कृत विद्यापीठ के सहायक आचार्य डॉ. प्रांगेश कुमार मिश्र के अनुसार धन्वंतरी भगवान विष्णु के अवतार और आरोग्यता के देवता माने जाते हैं। उन्होंने चिकित्सक का पद प्राप्त किया है। वाल्मीकि रामायण, हरिवंश पुराण आदि के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि समुद्र से प्रकट हुए थे। इसी कारण भगवान विष्णु ने उन्हें अब्ज की संज्ञा प्रदान की। मान्यता है कि धनवंतरी का प्राकट्य कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी को हुआ। इसी कारण इस तिथि को धन्वंतरि जयंती के रूप में मनाया जाता है। ध्यातव्य है कि समुद्र मंथन के दौरान शरद पूर्णिमा को चंद्रमा का, कार्तिक कृष्ण द्वादशी को कामधेनु का, कार्तिक चतुर्दशी को काली का और कार्तिक अमावस्या को लक्ष्मी का सागर से प्राकट्य हुआ था।
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