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डीडीयू: कला प्रतिभाओं को निखारें, आगे बढ़ने में करेंगे मदद : रवि किशन
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गोरखपुर। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग और दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के ललित कला एवं संगीत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 13 दिवसीय भोजपुरी लोकगीत प्रस्तुतिपरक कार्यशाला का मंगलवार को समापन हो गया। कार्यशाला महाकुंभ प्रयागराज-2025 और मिशन शक्ति के तहत आयोजित थी।
संवाद भवन में आयोजित समापन समारोह के मुख्य अतिथि सांसद रवि किशन शुक्ल ने कहा कि लोक कला तथा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कार्यशाला का आयोजन होना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कला, संस्कृति तथा कलाकारों को हमेशा प्रोत्साहन, सहयोग और सम्मान देते हैं। आश्वासन दिया कि इन प्रतिभावान कलाकारों को आगे बढ़ाने में वे मदद करेंगे।
अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि भोजपुरी लोक संगीत बहुत ही सुनहरी संगीत है। इसे दूषित होने से बचाने के लिए ऐसे कार्यशाला का होना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने मुख्य प्रशिक्षक अंतरराष्ट्रीय लोकगायक राकेश उपाध्याय के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। विशिष्ट अतिथि पूर्व महापौर डॉ सत्या पांडेय ने कहा कि पूर्वांचल की पारंपरिक लोक संगीत में एक ऐसी मिठास है जिसकी गारी भी मनमोहक लगती है।
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ललित कला विभाग की अध्यक्ष प्रो. उषा सिंह ने स्वागत किया। इस अवसर पर डीएसडब्ल्यू प्रो. अनुभूति दुबे, अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. राजवंत राव, डॉ गौरहरि बेहरा, प्रो. उमा श्रीवास्तव, प्रो. शिखा सिंह, प्रो. सुनीता मुर्मू, डॉ. गौरी शंकर चौहान, डॉ प्रदीप साहनी, डॉ प्रदीप राजोरिया आदि मौजूद रहे।
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संवाद भवन में आयोजित समापन समारोह के मुख्य अतिथि सांसद रवि किशन शुक्ल ने कहा कि लोक कला तथा संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए ऐसे कार्यशाला का आयोजन होना बेहद जरूरी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कला, संस्कृति तथा कलाकारों को हमेशा प्रोत्साहन, सहयोग और सम्मान देते हैं। आश्वासन दिया कि इन प्रतिभावान कलाकारों को आगे बढ़ाने में वे मदद करेंगे।
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अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि भोजपुरी लोक संगीत बहुत ही सुनहरी संगीत है। इसे दूषित होने से बचाने के लिए ऐसे कार्यशाला का होना जरूरी है। इसके लिए उन्होंने मुख्य प्रशिक्षक अंतरराष्ट्रीय लोकगायक राकेश उपाध्याय के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। विशिष्ट अतिथि पूर्व महापौर डॉ सत्या पांडेय ने कहा कि पूर्वांचल की पारंपरिक लोक संगीत में एक ऐसी मिठास है जिसकी गारी भी मनमोहक लगती है।
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ललित कला विभाग की अध्यक्ष प्रो. उषा सिंह ने स्वागत किया। इस अवसर पर डीएसडब्ल्यू प्रो. अनुभूति दुबे, अधिष्ठाता कला संकाय प्रो. राजवंत राव, डॉ गौरहरि बेहरा, प्रो. उमा श्रीवास्तव, प्रो. शिखा सिंह, प्रो. सुनीता मुर्मू, डॉ. गौरी शंकर चौहान, डॉ प्रदीप साहनी, डॉ प्रदीप राजोरिया आदि मौजूद रहे।