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Gorakhpur News: पश्चिमी यूपी से आ रहा रंगा आलू, होगी जांच
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उन्नाव और कन्नौज के कोल्ड स्टोरेज से निकला है बड़ी मात्रा में भंडारित आलू
गोरखपुर। अक्तूबर के अंत में आने वाले नए आलू से पहले धंधेबाजों ने गोदामों में पड़े पुराने आलू को रंगकर नया बना दिया है। बताया जा रहा है कि बाराबंकी, उन्नाव व कन्नौज के कोल्ड स्टोरेज से निकले आलू को ऑयरन ऑक्साइड से रंगकर बाजार में बेचा जा रहा है। यह आलू सेहत के लिए नुकसानदेह है। मामला शासन स्तर पर पहुंचने के बाद इसके जांच के निर्देश दिए गए हैं।
लाल आलू (कुफरी लाल प्रजाति) की खेती बाराबंकी और आसपास के जिलाें में होती है। इसके अलावा कन्नौज, उन्नाव, फर्रुखाबाद में राजेंद्र वन प्रजाति के आलू की बुवाई होती है। इसकी रंगत भी कुफरी लाल जैसी ही होती है। इन दोनों प्रजाति के आलू की मांग यूपी के अलावा बिहार से लेकर पड़ोसी देश नेपाल तक में है। यूपी में आलू की बुवाई अक्तूबर-नवंबर और और खोदाई मार्च में होती है। अप्रैल में आलू का भंडारण होती है।
आलू उत्पादक किसान राजेंद्र सिंह बताते हैं कि हर साल 15 सितंबर के बाद लोग बुवाई के लिए आलू बीज की खरीद करने लगते हैं, जिससे रेट बढ़ जाता है। धंधेबाजों ने इसे देखते हुए कोल्ड स्टोरेज में पड़े आलू को निकाल लिया है। खराब और दागदार आलू को आयरन ऑक्साइड से रंगकर बाजार में बेच रहे हैं, जबकि इसका प्रयोग पेंट, सिरेमिक और कॉस्मेटिक्स बनाने में होता है। आलू या किसी भी सब्जी पर कोटिंग के रूप में इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता है। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि जल्द ही अभियान चलाया जाएगा।
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गोरखपुर। अक्तूबर के अंत में आने वाले नए आलू से पहले धंधेबाजों ने गोदामों में पड़े पुराने आलू को रंगकर नया बना दिया है। बताया जा रहा है कि बाराबंकी, उन्नाव व कन्नौज के कोल्ड स्टोरेज से निकले आलू को ऑयरन ऑक्साइड से रंगकर बाजार में बेचा जा रहा है। यह आलू सेहत के लिए नुकसानदेह है। मामला शासन स्तर पर पहुंचने के बाद इसके जांच के निर्देश दिए गए हैं।
लाल आलू (कुफरी लाल प्रजाति) की खेती बाराबंकी और आसपास के जिलाें में होती है। इसके अलावा कन्नौज, उन्नाव, फर्रुखाबाद में राजेंद्र वन प्रजाति के आलू की बुवाई होती है। इसकी रंगत भी कुफरी लाल जैसी ही होती है। इन दोनों प्रजाति के आलू की मांग यूपी के अलावा बिहार से लेकर पड़ोसी देश नेपाल तक में है। यूपी में आलू की बुवाई अक्तूबर-नवंबर और और खोदाई मार्च में होती है। अप्रैल में आलू का भंडारण होती है।
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आलू उत्पादक किसान राजेंद्र सिंह बताते हैं कि हर साल 15 सितंबर के बाद लोग बुवाई के लिए आलू बीज की खरीद करने लगते हैं, जिससे रेट बढ़ जाता है। धंधेबाजों ने इसे देखते हुए कोल्ड स्टोरेज में पड़े आलू को निकाल लिया है। खराब और दागदार आलू को आयरन ऑक्साइड से रंगकर बाजार में बेच रहे हैं, जबकि इसका प्रयोग पेंट, सिरेमिक और कॉस्मेटिक्स बनाने में होता है। आलू या किसी भी सब्जी पर कोटिंग के रूप में इसका प्रयोग नहीं किया जा सकता है। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि जल्द ही अभियान चलाया जाएगा।
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