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Gorakhpur News: रियल नहीं हो पाईं खतौनियां...तीन लाख बैनामे में अंश चढ़े ही नहीं

Thu, 09 Oct 2025 02:00 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Thu, 09 Oct 2025 02:00 AM IST
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Gorakhpur News: CM will inaugurate the Swadeshi fair, will hand over the keys to the allottees of Palm Paradise.
सबसे ज्यादा मामले सदर तहसील में, एक गाटा में हैं कई जमीनें सबका डेटा रहेगा तभी चढ़ पाएगा अंश
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तहसील प्रशासन की अपील- राजस्व बोर्ड की वेबसाइट पर ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं डेटा
गोरखपुर। जमीन की खतौनियों के रियल टाइम होने के बाद भी समस्याएं बनी हुई हैं। करीब तीन लाख बैनामों में अंश निर्धारण नहीं हो पाया है। सबसे ज्यादा सवा लाख मामले शहर से सटे वाले इलाकों के हैं, जिनमें स्वामित्व का नाम तो दर्ज है पर जिनकी जमीनें हैं, उनका पूरा ब्योरा नहीं मिल पा रहा है। ऐसे लोगों की खोजबीन में हलका लेखपाल से लेकर कानूनगो तक जुटे हैं। अब तहसील प्रशासन ने अपील की है कि खतौनी में जिनके अंश नहीं चढ़े हैं, वे राजस्व परिषद की वेबसाइट पर ऑनलाइन जानकारी उपलब्ध करा सकते हैं।

रियल टाइम खतौनी में प्रत्येक गाटा संख्या में जितनी जमीनें हैं, सबका अंश निर्धारण किया जाना है। जिले में कुल 3303 गांवों की खतौनी को अपडेट करना है। इनमें कुल 1660106 गाटा संख्या है। प्रत्येक गाटा संख्या में 10 से 15 खातेदार हैं। राजस्व परिषद का साफ्टवेयर ऐसा है कि अगर एक गाटा में सभी खातेदारों का नाम दर्ज नहीं होगा तो खतौनी अपडेट ही नहीं हो पाएगी।
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मुश्किल यहीं हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा सदर तहसील में 1.25 गाटा नंबर हैं, जिनका अंश निर्धारण लटक गया है। सदर तहसील में बुधवार को दोपहर एक बजे खतौनी में अंश निर्धारण के काम राजस्वकर्मी जुटे थे।
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इसी बीच अपडेट खतौनी लेकर आए चिउंटीजाम के रमेश और उनके भाई राकेश ने कहा कि उनके जमीन का अंश खतौनी में नहीं है। राजस्वकर्मी ने खतौनी लेकर कंप्यूटर चेक किया तो पता चला कि जिस गाटा संख्या में जमीन खरीदे थे उसमें 14 हिस्सेदार हैं। जब तक सभी का ब्योरा नहीं मिलेगा साफ्टवेयर डेटा उठाएगा ही नहीं।
इस तरह के ज्यादातर मामले शहर से सटे वाले ऐसे इलाकों के हैं जहां बाहर से आकर लोगों ने प्लाटिंग वाली जमीनें खरीदी हैं। बड़गो, सेंदुली-बेंदुली, चिउटीजाम, ताल कंदला, खोराबार, झुगियां, मेडिकल रोड, मोतीराम अड्डा, पिपराइच रोड, नौसड़ आदि इलाके में प्लाॅटिंग की जमीनें लोगों ने ज्यादा खरीदी हैं।
बहुत सारे लोगाें ने निवेश के मकसद से जमीनें खरीद कर छोड़ दी हैं। अब उनके बारे में पता ही नहीं है कि वे कहां हैं। तहसीलों में उनका कोई रिकॉर्ड भी नहीं है।

वर्जन
बहुत सारे ऐसे गाटा नंबर हैं जिनमें कई लोगों ने जमीनें खरीदी हैं और सभी डेटा उपलब्ध नहीं है। ऐसे गाटा नंबर वाले जमीनों की खतौनी में अंश निर्धारण में दिक्कतें आ रही हैं। ऐसे लोग तहसील में आकर या राजस्व परिषद की वेबसाइट पर अपना ब्योरा अपलोड करा सकते हैं। इसके बाद उनकी खतौनी में उनके हिस्से का अंश चढ़ जाएगा।
- ज्ञान प्रताप सिंह, सदर तहसीलदार
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