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Gorakhpur News: मुख्यमंत्री जी ! डीजे के शोर से गायें दे रहीं कम दूध..लगाइए रोक

Tue, 12 Nov 2024 02:43 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 12 Nov 2024 02:43 AM IST
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Gorakhpur News: Chief Minister! Cows are giving less milk due to DJ noise...stop it
गोरखपुर। डीजे के शोर से इंसान ही नहीं, जानवर भी परेशान हो रहे हैं। वाराणसी के एक पशुपालक की गायें शोर की वजह से कम दूध दे रही हैं। पशुपालक ने सोमवार को गोरखपुर में मुख्यमंत्री के जनता दर्शन कार्यक्रम में पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से सुना और डीजे के शोर पर नियंत्रण लगाने का आश्वासन दिया।
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वाराणसी जिले के ग्राम दशवतपुर निवासी संदीप सिंह ने कहा कि उन्होंने चार गायें पाल रखी हैं। उनके चाचा के पास भी 10 गायें हैं। गांव के कई और लोग भी पशुपालन करते हैं। पिछले 6-7 वर्षों से ऐसा हो रहा है कि त्योहारों के वक्त जब तेज आवाज में डीजे बजता है, तब गायों का दूध कम हो जा रहा है। पशु चिकित्सक बता रहे हैं कि तेज ध्वनि के कुप्रभाव से ऐसा हो रहा है। पुलिस डीजे की आवाज थोड़ा कम कराती है, लेकिन वह भी 100 डेसिबल से अधिक ही रहता है।
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शिकायतकर्ता संदीप सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और इस पर नियंत्रण की बात कही। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर उपलब्ध आदेश के मुताबिक रात्रि 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच सिवाय साउंड प्रूफ ऑडिटोरियम के किसी भी खुली जगह में लाउडस्पीकर नहीं बजाए जा सकते हैं, मगर नियम का पालन नहीं हो रहा है।
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सत्या फाउंडेशन की तरफ से किया जा रहा है जागरूक



सामाजिक संगठन सत्या फाउंडेशन के संस्थापक सचिव चेतन उपाध्याय ने बताया कि शोर की वजह से मनुष्य ही नहीं जीव-जंतुओं का जीवन भी प्रभावित हो रहा है। दूध उत्पादन पर असर का मामला तो आया ही है, अन्य जानवरों के व्यवहार भी बदल रहे हैं। इसीलिए उनका संगठन वर्ष 2008 से ही शोर के खिलाफ अभियान चला रहा है। स्कूलों में जाकर बच्चों को भी जागरूक किया जा रहा है।




वर्जन--



शोर से जानवर तनाव में आ जाते हैं, जिससे उनका मेटाबॉलिज्म गड़बड़ हो जाता है। इसका असर दूध उत्पादन पर पड़ता है। इसके अलावा दूध निकालने के समय अगर 80 डेसिबल से अधिक शोर होता है तो इस प्रकार के अवरोध से भी पशुओं में दूध उत्पादन पर सीधा असर पड़ेगा।



-डॉ. संजय कुमार श्रीवास्तव, उप मुख्य पशु चिकित्साधिकारी
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