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छठ पूजा : 36 घंटे से अधिक निराजल व्रती सेहत का रखें खास ध्यान
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व्रती महिलाओं का महापर्व आस्था के साथ शारीरिक सहनशक्ति का भी प्रतीक
36 घंटे व्रत के दौरान सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी
गोरखपुर। चार दिवसीय महापर्व छठ अब शनिवार की शाम को नहाय-खाय के साथ आरंभ हो चुका है। महापर्व छठ का सबसे कठिन चरण 36 घंटे का निर्जला व्रत होता है। इस दौरान व्रती महिलाएं बिना अन्न और जल ग्रहण किए सूर्य देव की उपासना करती हैं। चिकित्सकों और डायटीशियन की सलाह है कि व्रत के दौरान थोड़ी सी सावधानी से श्रद्धालु अपनी आस्था और स्वास्थ्य दोनों की रक्षा कर सकती हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीके सुमन ने बताया कि व्रत शुरू करने से पहले महिलाओं को पर्याप्त नींद लेने की जरूरत होती है। ताकि नींद पूरी होने से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिल सके। व्रत के दौरान डिहाइड्रेशन और थकान से बचने के लिए धूप में अधिक देर तक नहीं रहना चाहिए। हार्ट, बीपी या शुगर के मरीज व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें और स्वास्थ्य जांच करा लें। डॉ. विमलेश ने बताया कि बीपी के मरीजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक असर करने वाली दवाएं न लें क्योंकि इनके कारण व्रत के दौरान बीपी असंतुलित हो सकता है। कम अवधि तक असर करने वाली दवाएं ही डॉक्टर की सलाह से लें और पर्व के बाद तीन-चार दिनों तक लगातार बीपी जांच करते रहें।
डायटीशियन अनुपम कौशिक ने बताया कि बीपी के मरीजों को इस व्रत के दौरान नमक का सेवन सीमित रखना चाहिए। शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए खरना के प्रसाद के दौरान तरल पदार्थों का सेवन करें। ब्लड प्रेशर और शुगर की नियमित जांच करें। किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। एम्स की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. आराधना ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को व्रत में खास ध्यान रखना चाहिए। गर्भवती अपने शरीर को डिहाइड्रेट रखें और पानी पीते रहना चाहिए।
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पारण के समय खास सावधानी बरतें
डायटीशियन सुधा राजपूत ने बताया कि 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद पारण के समय काफी ध्यान देने की जरूरत है। व्रत के पारण के दौरान भारी भोजन से परहेज करना चाहिए। शरीर को धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लाना जरूरी है। व्रत तोड़ने की शुरुआत ठेकुआ के साथ पानी या नींबू पानी से करें ताकि शरीर धीरे-धीरे हाइड्रेट हो सके। तुरंत भारी या तला-भुना भोजन न खाएं। व्रत के बाद पहले फल, जूस या हल्का नाश्ता लें और एक-दो घंटे बाद ही सामान्य भोजन करें। पूरे दिन में छोटे-छोटे आहार लेते रहें ताकि पाचन तंत्र पर अचानक भार न पड़े।
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36 घंटे व्रत के दौरान सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी
गोरखपुर। चार दिवसीय महापर्व छठ अब शनिवार की शाम को नहाय-खाय के साथ आरंभ हो चुका है। महापर्व छठ का सबसे कठिन चरण 36 घंटे का निर्जला व्रत होता है। इस दौरान व्रती महिलाएं बिना अन्न और जल ग्रहण किए सूर्य देव की उपासना करती हैं। चिकित्सकों और डायटीशियन की सलाह है कि व्रत के दौरान थोड़ी सी सावधानी से श्रद्धालु अपनी आस्था और स्वास्थ्य दोनों की रक्षा कर सकती हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. बीके सुमन ने बताया कि व्रत शुरू करने से पहले महिलाओं को पर्याप्त नींद लेने की जरूरत होती है। ताकि नींद पूरी होने से शरीर को पर्याप्त ऊर्जा मिल सके। व्रत के दौरान डिहाइड्रेशन और थकान से बचने के लिए धूप में अधिक देर तक नहीं रहना चाहिए। हार्ट, बीपी या शुगर के मरीज व्रत शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श अवश्य लें और स्वास्थ्य जांच करा लें। डॉ. विमलेश ने बताया कि बीपी के मरीजों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक असर करने वाली दवाएं न लें क्योंकि इनके कारण व्रत के दौरान बीपी असंतुलित हो सकता है। कम अवधि तक असर करने वाली दवाएं ही डॉक्टर की सलाह से लें और पर्व के बाद तीन-चार दिनों तक लगातार बीपी जांच करते रहें।
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डायटीशियन अनुपम कौशिक ने बताया कि बीपी के मरीजों को इस व्रत के दौरान नमक का सेवन सीमित रखना चाहिए। शरीर में पानी की कमी न हो, इसके लिए खरना के प्रसाद के दौरान तरल पदार्थों का सेवन करें। ब्लड प्रेशर और शुगर की नियमित जांच करें। किसी भी असामान्य लक्षण पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। एम्स की महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. आराधना ने बताया कि गर्भवती महिलाओं को व्रत में खास ध्यान रखना चाहिए। गर्भवती अपने शरीर को डिहाइड्रेट रखें और पानी पीते रहना चाहिए।
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पारण के समय खास सावधानी बरतें
डायटीशियन सुधा राजपूत ने बताया कि 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद पारण के समय काफी ध्यान देने की जरूरत है। व्रत के पारण के दौरान भारी भोजन से परहेज करना चाहिए। शरीर को धीरे-धीरे सामान्य अवस्था में लाना जरूरी है। व्रत तोड़ने की शुरुआत ठेकुआ के साथ पानी या नींबू पानी से करें ताकि शरीर धीरे-धीरे हाइड्रेट हो सके। तुरंत भारी या तला-भुना भोजन न खाएं। व्रत के बाद पहले फल, जूस या हल्का नाश्ता लें और एक-दो घंटे बाद ही सामान्य भोजन करें। पूरे दिन में छोटे-छोटे आहार लेते रहें ताकि पाचन तंत्र पर अचानक भार न पड़े।