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Gorakhpur News: बीआरडीः तीमारदारों की पिटाई...फिर जांच कमेटी गठित
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गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी एवं ट्रामा सेंटर के सामने शनिवार सुबह शव रखकर धरना दे रहे तीमारदारों को पीटने के एक और मामले में भी जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया है। एसआईसी डॉ. कंचन श्रीवास्तव की अगुवाई में बनी यह कमेटी एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर कार्रवाई होगी। हालांकि पहले के ऐसे मामलों में कमेटी की जांच रिपोर्ट कभी सामने नहीं आई।
पिपराइच के जंगल धूसड़ निवासी कमलेश निषाद (40) की दो दिन से तबीयत खराब थी। भतीजे अनिरुद्ध ने बताया कि शनिवार सुबह उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर लेकर आए। वहां करीब एक घंटे तक इलाज चला। इलाज के दौरान ही कमलेश ने दम तोड़ दिया। घरवालों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण कमलेश की मौत हो गई। इसको लेकर तीमारदार और डॉक्टरों में कहासुनी हुई। डॉक्टर ने तीमारदार को गाली दे दी, जिसके बाद विरोध बढ़ गया।
नाराज घरवालों ने ट्रामा सेंटर के सामने शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। वहां भीड़ जमा हो गई। इमरजेंसी के पास ड्यूटी कर रहे सुरक्षा गार्डों ने भीड़ हटवाने का प्रयास किया। इस दौरान गार्डों ने धरना दे रहे तीमारदारों पर लाठियां भांजीं। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। मामला बढ़ता देख पुलिस पहुंची। मामला शांत कराते हुए इस मामले में किसी प्रकार की विधिक कार्रवाई से बचने का नसीहत देकर घर भेज दिया था।
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मामला सुर्खियों में आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सोमवार को एसआईसी डॉ. कंचन श्रीवास्तव की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी। इस कमेटी में डॉ. बीएन शुक्ला और डॉ. शहनवाज को भी सदस्य बनाया गया है। यह कमेटी एक सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट देगी। प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
कमेटी पर कमेटी... नतीजा सिफर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पहले भी बन चुकी हैं कमेटियां, आरोपी हो जाते हैं निर्दोष
इससे पहले महराजगंज के मां-बेटे की पिटाई मामले की जांच के लिए बनी थी कमेटी
पिछले साल पंचायतीराज विभाग के कर्मचारी की पिटाई मामले की जांच के लिए भी बनी थी कमेटी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीज या तीमारदार की पिटाई के मामले सामने आने पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन जांच कमेटी तो बना देता है, लेकिन रिपोर्ट में आरोपी ही निर्दोष साबित हो जाते हैं या फिर शिकायतकर्ता अपनी बात से मुकर जाता है। बीते पांच साल में एक भी कमेटी की जांच रिपोर्ट में कोई आरोपी जूनियर डॉक्टर या कर्मचारी दोषी नहीं मिला है। इसलिए पिटाई के किसी मामले में आरोपियों पर कोई कार्रवाई भी नहीं होती है।
यहां तक कि जिन मामलों में मौके पर पहुंचकर पुलिस वाले पीड़ित को बचाकर परिसर से बाहर निकालते हैं, उसमें भी गलती पीड़ित की ही पाई जाती है। जांच समिति को आरोपी ही निरीह और बेचारे नजर आते हैं, जबकि पीड़ित को मनबढ़, उपद्रवी और व्यवस्था बिगाड़ने वाला माना जाता है। प्राचार्य ने फिर एक जांच टीम गठित की है। जिस प्रकरण की जांच के लिए टीम गठित हुई है, उसकी वीडिया सोशल मीडिया में वायरल है। देखना है कि इस बार जांच समिति की रिपोर्ट में कोई आरोपी दोषी पाया जाता है या गलती पीड़ितों की ही मिलती है।
प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल का कहना है कि अधिकांश शिकायतकर्ता जांच समिति के सामने आते ही नहीं हैं। जांच में जैसे ही उनकी गलती सामने आती है तो वे या तो समझौता कर लेते हैं या फिर शिकायत वापस ले लेते हैं। शिकायतकर्ता पुलिस केस भी दर्ज नहीं कराते, क्योंकि जांच में वे ही फंसेंगे। जांच समिति हर बार निष्पक्ष जांच करती है।
केस एक-
15 मई 2024 को महराजगंज जिले के पनियरा थाना क्षेत्र का रहने वाला प्रिंस कुमार गुप्ता मां का इलाज कराने बीआरडी मेडिकल कॉलेज आया था। ट्रामा सेंटर के पास एक जूनियर डॉक्टर से वार्ड का पता पूछने पर विवाद हो गया। जूनियर डॉक्टरों ने मां के सामने ही बेटे को घसीटकर पीटा। प्रकरण की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया। तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच में पीड़ित को ही आरोपी बना दिया और अंतत: मामले में समझौता हो गया।
केस-2
02 जून 2023 को देवरिया जिले के बरहज थाना क्षेत्र के कपरवार निवासी संदीप सिंह (35) को बीआरडी मेडिकल के मेडिसिन वार्ड में पत्नी अंकिता सिंह के सामने ही पीटा गया था। दंपती का दोष केवल इतना था कि डिस्चार्ज करने की बात पर गाली दे रहे जूनियर डॉक्टर का विरोध किया था। जूनियर डॉक्टरों ने संदीप को ड्यूटी रूम में बंद कर लात, जूतों और बेल्ट से पीटा। पत्नी का मोबाइल छीन लिया और बाद में सादे कागज पर धमका कर अपने पक्ष में हस्ताक्षर करवा लिए। इसकी जांच के लिए कमेटी बनी, लेकिन रिपोर्ट का पता नहीं चला।
बीआरडी में हो चुकी हैं मारपीट की ये घटनाएं
13 अगस्त 2024 : बस्ती के भाई-बहन को मेडिसिन वार्ड से लेकर मेन गेट तक जूनियर डॉक्टरों ने दौड़ाकर पीटा। देर शाम समझौता करा दिया गया।
25 मई 2024 : बस्ती से आए मरीज के परिजनों ने हालत पूछ लिया, जिससे नाराज जूनियर डॉक्टरों ने महिला तीमारदार की पिटाई कर दी। जूनियर डॉक्टरों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
21 अप्रैल 2024 : संतकबीरनगर के बेलौली निवासी रामसेवक त्रिपाठी के इलाज के बारे में पूछने से नाराज डॉक्टरों ने वेंटिलेटर ही बंद कर दिया, जिससे मरीज की मौत का आरोप लगा। पुलिस को तहरीर भी दी गई, लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ। कॉलेज प्रशासन ने जांच भी नहीं कराई।
03 फरवरी 2023 : मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में देवरिया के मदनपुर निवासी शैला देवी को देखने आए उनके भतीजे अजय को जूनियर डॉक्टरों ने पीट दिया। पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
29 अक्तूबर 2022 : पिपराइच के घनश्याम राजभर को जूनियर डॉक्टरों ने पीटा। इनकी शिकायत पर भी विचार नहीं किया गया।
21 अगस्त 2021 : पिता की पिटाई का वीडियो बनाने पर जूनियर डॉक्टरों ने युवती को पीटा। प्रकरण की जांच भी नहीं हुई।
25 जुलाई 2019 : मेडिसिन वार्ड नंबर नौ में रामदुलारे को जूनियर डॉक्टरों ने दौड़ाकर पीटा। प्रकरण की जांच भी नहीं हुई।
12 मई 2019 : मेडिसिन विभाग में इलाज कराने आए आनंद कुमार चौरसिया की मौत हो गई थी। परिजनों ने एक बार जांच करने को कहा तो जूनियर डॉक्टरों ने पीटा। प्रकरण की जांच भी नहीं हुई।
22 अप्रैल 2019 : मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान अंशू की मौत हुई। पूछताछ करने पर परिजनों को जूनियर डॉक्टरों ने पीटा। प्रकरण की जांच भी नहीं हुई।
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पिपराइच के जंगल धूसड़ निवासी कमलेश निषाद (40) की दो दिन से तबीयत खराब थी। भतीजे अनिरुद्ध ने बताया कि शनिवार सुबह उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ट्रामा सेंटर लेकर आए। वहां करीब एक घंटे तक इलाज चला। इलाज के दौरान ही कमलेश ने दम तोड़ दिया। घरवालों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर की लापरवाही के कारण कमलेश की मौत हो गई। इसको लेकर तीमारदार और डॉक्टरों में कहासुनी हुई। डॉक्टर ने तीमारदार को गाली दे दी, जिसके बाद विरोध बढ़ गया।
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नाराज घरवालों ने ट्रामा सेंटर के सामने शव रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। वहां भीड़ जमा हो गई। इमरजेंसी के पास ड्यूटी कर रहे सुरक्षा गार्डों ने भीड़ हटवाने का प्रयास किया। इस दौरान गार्डों ने धरना दे रहे तीमारदारों पर लाठियां भांजीं। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। मामला बढ़ता देख पुलिस पहुंची। मामला शांत कराते हुए इस मामले में किसी प्रकार की विधिक कार्रवाई से बचने का नसीहत देकर घर भेज दिया था।
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मामला सुर्खियों में आने के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने सोमवार को एसआईसी डॉ. कंचन श्रीवास्तव की अगुवाई में तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी। इस कमेटी में डॉ. बीएन शुक्ला और डॉ. शहनवाज को भी सदस्य बनाया गया है। यह कमेटी एक सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट देगी। प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि कमेटी की जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी।
कमेटी पर कमेटी... नतीजा सिफर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पहले भी बन चुकी हैं कमेटियां, आरोपी हो जाते हैं निर्दोष
इससे पहले महराजगंज के मां-बेटे की पिटाई मामले की जांच के लिए बनी थी कमेटी
पिछले साल पंचायतीराज विभाग के कर्मचारी की पिटाई मामले की जांच के लिए भी बनी थी कमेटी
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मरीज या तीमारदार की पिटाई के मामले सामने आने पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन जांच कमेटी तो बना देता है, लेकिन रिपोर्ट में आरोपी ही निर्दोष साबित हो जाते हैं या फिर शिकायतकर्ता अपनी बात से मुकर जाता है। बीते पांच साल में एक भी कमेटी की जांच रिपोर्ट में कोई आरोपी जूनियर डॉक्टर या कर्मचारी दोषी नहीं मिला है। इसलिए पिटाई के किसी मामले में आरोपियों पर कोई कार्रवाई भी नहीं होती है।
यहां तक कि जिन मामलों में मौके पर पहुंचकर पुलिस वाले पीड़ित को बचाकर परिसर से बाहर निकालते हैं, उसमें भी गलती पीड़ित की ही पाई जाती है। जांच समिति को आरोपी ही निरीह और बेचारे नजर आते हैं, जबकि पीड़ित को मनबढ़, उपद्रवी और व्यवस्था बिगाड़ने वाला माना जाता है। प्राचार्य ने फिर एक जांच टीम गठित की है। जिस प्रकरण की जांच के लिए टीम गठित हुई है, उसकी वीडिया सोशल मीडिया में वायरल है। देखना है कि इस बार जांच समिति की रिपोर्ट में कोई आरोपी दोषी पाया जाता है या गलती पीड़ितों की ही मिलती है।
प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल का कहना है कि अधिकांश शिकायतकर्ता जांच समिति के सामने आते ही नहीं हैं। जांच में जैसे ही उनकी गलती सामने आती है तो वे या तो समझौता कर लेते हैं या फिर शिकायत वापस ले लेते हैं। शिकायतकर्ता पुलिस केस भी दर्ज नहीं कराते, क्योंकि जांच में वे ही फंसेंगे। जांच समिति हर बार निष्पक्ष जांच करती है।
केस एक-
15 मई 2024 को महराजगंज जिले के पनियरा थाना क्षेत्र का रहने वाला प्रिंस कुमार गुप्ता मां का इलाज कराने बीआरडी मेडिकल कॉलेज आया था। ट्रामा सेंटर के पास एक जूनियर डॉक्टर से वार्ड का पता पूछने पर विवाद हो गया। जूनियर डॉक्टरों ने मां के सामने ही बेटे को घसीटकर पीटा। प्रकरण की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया। तीन सदस्यीय कमेटी ने जांच में पीड़ित को ही आरोपी बना दिया और अंतत: मामले में समझौता हो गया।
केस-2
02 जून 2023 को देवरिया जिले के बरहज थाना क्षेत्र के कपरवार निवासी संदीप सिंह (35) को बीआरडी मेडिकल के मेडिसिन वार्ड में पत्नी अंकिता सिंह के सामने ही पीटा गया था। दंपती का दोष केवल इतना था कि डिस्चार्ज करने की बात पर गाली दे रहे जूनियर डॉक्टर का विरोध किया था। जूनियर डॉक्टरों ने संदीप को ड्यूटी रूम में बंद कर लात, जूतों और बेल्ट से पीटा। पत्नी का मोबाइल छीन लिया और बाद में सादे कागज पर धमका कर अपने पक्ष में हस्ताक्षर करवा लिए। इसकी जांच के लिए कमेटी बनी, लेकिन रिपोर्ट का पता नहीं चला।
बीआरडी में हो चुकी हैं मारपीट की ये घटनाएं
13 अगस्त 2024 : बस्ती के भाई-बहन को मेडिसिन वार्ड से लेकर मेन गेट तक जूनियर डॉक्टरों ने दौड़ाकर पीटा। देर शाम समझौता करा दिया गया।
25 मई 2024 : बस्ती से आए मरीज के परिजनों ने हालत पूछ लिया, जिससे नाराज जूनियर डॉक्टरों ने महिला तीमारदार की पिटाई कर दी। जूनियर डॉक्टरों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
21 अप्रैल 2024 : संतकबीरनगर के बेलौली निवासी रामसेवक त्रिपाठी के इलाज के बारे में पूछने से नाराज डॉक्टरों ने वेंटिलेटर ही बंद कर दिया, जिससे मरीज की मौत का आरोप लगा। पुलिस को तहरीर भी दी गई, लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ। कॉलेज प्रशासन ने जांच भी नहीं कराई।
03 फरवरी 2023 : मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में देवरिया के मदनपुर निवासी शैला देवी को देखने आए उनके भतीजे अजय को जूनियर डॉक्टरों ने पीट दिया। पिटाई का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। आरोपियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
29 अक्तूबर 2022 : पिपराइच के घनश्याम राजभर को जूनियर डॉक्टरों ने पीटा। इनकी शिकायत पर भी विचार नहीं किया गया।
21 अगस्त 2021 : पिता की पिटाई का वीडियो बनाने पर जूनियर डॉक्टरों ने युवती को पीटा। प्रकरण की जांच भी नहीं हुई।
25 जुलाई 2019 : मेडिसिन वार्ड नंबर नौ में रामदुलारे को जूनियर डॉक्टरों ने दौड़ाकर पीटा। प्रकरण की जांच भी नहीं हुई।
12 मई 2019 : मेडिसिन विभाग में इलाज कराने आए आनंद कुमार चौरसिया की मौत हो गई थी। परिजनों ने एक बार जांच करने को कहा तो जूनियर डॉक्टरों ने पीटा। प्रकरण की जांच भी नहीं हुई।
22 अप्रैल 2019 : मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान अंशू की मौत हुई। पूछताछ करने पर परिजनों को जूनियर डॉक्टरों ने पीटा। प्रकरण की जांच भी नहीं हुई।