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Gorakhpur News: पहिए की गिनती करके ट्रेन गुजरने की सटीक सूचना देता है ''''बीपीएसी''''
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गोरखपुर-लखनऊ समेत सात रेल खंडों पर इस उपकरण से बढ़ गई है ट्रेनों की स्पीड
गोरखपुर। रेलवे ट्रैक पर क्षमता विस्तार के लिए रेल प्रशासन ने गोरखपुर-लखनऊ समेत सात रेल खंडों पर ब्लॉक प्रूविंग एक्सल काउंटर (बीपीएसी) लगा दिया है। यह उपकरण ट्रेन या मालगाड़ी के पहिए की गिनती करके उसके गुजरने की सटीक सूचना देता है। इसके लगने से ट्रेनों की गति भी बढ़कर 110 किमी प्रति घंटे हो गई है।
अभी तक एब्सोल्यूट ब्लॉक सिस्टम के तहत एक ट्रेन के गुजरने के बाद स्टेशन मास्टर रेलवे स्टॉफ से संपर्क कर यह सत्यापित करते थे कि ट्रेन पूरी तरह से गुजर गई है कि नहीं। इसमें समय भी जाया होता था। लेकिन अब एक्सल काउंटर प्रणाली पहिए की गिनती करके ऑटोमेटिक सूचना उपलब्ध करा देता है। एक्सल काउंटर बॉक्स ट्रेन की पटरियों पर हर 3-5 किलोमीटर की दूरी पर लगाया जाता है। इसमें एक स्टोरेज डिवाइस होती है, जो सीधे पटरियों से जुड़ी होती है। जब ट्रेन गुजरती है, तो यह ट्रेन के एक्सल (दो पहियों को जोड़ने वाला रॉड) को गिनता है। इसके साथ ही यह ट्रेन की गति को रिकॉर्ड कर लेता है। रेल प्रशासन के मुताबिक, डबल लाइन में अब ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम लगाया जा रहा है लेकिन सिंगल लाइन वाले रेलवे ट्रैक पर ब्लॉक प्रूविंग एक्सल काउंटर लगाया जा रहा है।
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गोरखपुर। रेलवे ट्रैक पर क्षमता विस्तार के लिए रेल प्रशासन ने गोरखपुर-लखनऊ समेत सात रेल खंडों पर ब्लॉक प्रूविंग एक्सल काउंटर (बीपीएसी) लगा दिया है। यह उपकरण ट्रेन या मालगाड़ी के पहिए की गिनती करके उसके गुजरने की सटीक सूचना देता है। इसके लगने से ट्रेनों की गति भी बढ़कर 110 किमी प्रति घंटे हो गई है।
अभी तक एब्सोल्यूट ब्लॉक सिस्टम के तहत एक ट्रेन के गुजरने के बाद स्टेशन मास्टर रेलवे स्टॉफ से संपर्क कर यह सत्यापित करते थे कि ट्रेन पूरी तरह से गुजर गई है कि नहीं। इसमें समय भी जाया होता था। लेकिन अब एक्सल काउंटर प्रणाली पहिए की गिनती करके ऑटोमेटिक सूचना उपलब्ध करा देता है। एक्सल काउंटर बॉक्स ट्रेन की पटरियों पर हर 3-5 किलोमीटर की दूरी पर लगाया जाता है। इसमें एक स्टोरेज डिवाइस होती है, जो सीधे पटरियों से जुड़ी होती है। जब ट्रेन गुजरती है, तो यह ट्रेन के एक्सल (दो पहियों को जोड़ने वाला रॉड) को गिनता है। इसके साथ ही यह ट्रेन की गति को रिकॉर्ड कर लेता है। रेल प्रशासन के मुताबिक, डबल लाइन में अब ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम लगाया जा रहा है लेकिन सिंगल लाइन वाले रेलवे ट्रैक पर ब्लॉक प्रूविंग एक्सल काउंटर लगाया जा रहा है।
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