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Gorakhpur News: रहें सावधान, खुले पिसे मसालों में धंधेबाज लगा रहे मिलावट का तड़का- बिक रहे खुलेआम

Mon, 27 May 2024 12:18 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 27 May 2024 12:18 PM IST
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Gorakhpur News: Be careful.. Traders are adding adulteration to loosely ground spices
मसाला- (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

मसालेदार भोजन के शौकीन हैं, तो यह आपको सावधान करने वाली खबर है। धंधेबाज सस्ते का लालच देकर खुले पिसे मसालों में सिंथेटिक कलर और खराब सामग्री का प्रयोग कर आपकी सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। यह समस्या इसलिए भी बड़ी है, क्योंकि खाद्य सुरक्षा विभाग को मिलावटखोर ढूंढ़े नहीं मिल रहे।

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खुले पिसे मसालों की बिक्री पर रोक है, लेकिन साहबगंज और लालडिग्गी की दुकानों में ये मसाले खुलेआम बिक रहे हैं। ऐसे में आपको सावधान रहने की जरूरत है। खाद्य सुरक्षा विभाग ने अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक पैकेट वाले मसालों के 35 नमूने लिए थे। इसकी रिपोर्ट में मिलावट की पुष्टि नहीं हुई।
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हांगकांग और फिलीपींस में दो प्रमुख कंपनियों के ब्रांडेड मसालों के नमूने फेल हुए तो तीन स्थानीय कंपनियों के मसालों के नौ नमूने लिए गए। इसकी रिपोर्ट अभी नहीं आई है। व्यापारियों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी पैकेट वाले और खड़े मसालों की जांच करते हैं, जबकि पिसे हुए खुले मसालों की जांच प्रयोगशाला में हो तो मिलावट की रिपोर्ट प्राप्त होगी।
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लालडिग्गी और रकाबगंज के खोखा टोला की आटा चक्कियों में धंधेबाजों के मसाले पिसे जा रहे हैं, लेकिन उनकी जांच नहीं की जा रही है। साहबगंज में पड़ताल की गई तो पिसे हुए खुले मसाले खुलेआम बिकते मिले। 250-250 ग्राम खरीदने पर भी मसाले आसानी से मिल गए।

दुकान में काम करने वाले कर्मचारी ने बताया कि पैकेट वाले मसाले की अपेक्षा खुले हुए मसाले सस्ते मिलते हैं, इसलिए कुछ ढाबा और चाट-फुल्की वाले मिलावटी मसाले खरीदने आते हैं। उसने बताया कि आम लोग भी ये मसाले खरीदकर ले जाते हैं।

इस प्रकार मिलावट से करते हैं कमाई
खेत में पौधे पर लगी कुछ मिर्च का रंग लाल के बजाए सफेद हो जाता है। इसकी कीमत 25 प्रतिशत कम हो जाती है। आटा चक्की में इसकी पिसाई कराई जाती है और रंग लाने के लिए सस्ती कीमत वाला सिंथेटिक कलर मिलाया जाता है।

धनिया में कुछ दाने टूटकर दो टुकड़े में बंट जाते हैं। बाजार में इसकी कीमत आधी हो जाती है। इसकी पिसाई कराने पर पूरी कीमत मिलती है। धंधेबाज इसमें कढ़ी पत्ती भी मिला देते हैं।
हल्दी में भी छोटे-छोटे सबसे कम कीमत वाले टुकड़ों की पिसाई की जाती है। इसमें चावल की खुद्दी और सिंथेटिक रंग मिलाया जाता है। इससे मसाले का वजन भी बढ़ जाता है।

खड़े मसाले खरीदें
असिस्टेंट प्रोफेसर, गृह विज्ञान डॉ अनुपमा कौशिक ने बताया कि बिना प्रयोगशाला में जांच किए मसालों की शुद्धता की जानकारी नहीं हो सकती। मसालों में मिलावट से बचने के लिए खड़े मसाले खरीदकर इस्तेमाल करने की आवश्यकता है। मिलावटी मसालों के सेवन से पाचन तंत्र पर खराब असर पड़ता है, इस कारण विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याएं होती हैं।


मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी हितेंद्र मोहन त्रिपाठी ने बताया कि पिसे हुए खुले मसालों की बिक्री प्रतिबंधित है। बाजारों में मसालों की नियमित जांच की जा रही है। यदि कोई दुकानदार खुले हुए पिसे मसाले की बिक्री करते हुए पकड़ा गया तो कार्रवाई की जाएगी।
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