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Gorakhpur News: मुंडेरा बाजार में दुकान से दो लाख की प्रतिबंधित दवाएं जब्त
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सरदारनगर/गोरखपुर। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने सोमवार को मुंडेरा बाजार के खेतान मेडिकल स्टोर पर छापा मारा। मेडिकल स्टोर से करीब दो लाख रुपये की प्रतिबंधित दवाएं पकड़ी गईं। इसे जब्त करने के साथ दुकान सील कर दी गई। जांच में पता चला की मेडिकल स्टोर का लाइसेंस भी नहीं है। विभाग अगली कार्रवाई में जुटा है।
जब्त माल में पैरासिटामॉल, एजीथ्रो, डाइक्लो समेत करीब 15 प्रतिबंधित दवाएं शामिल हैं। ये वे दवाएं हैं, जिन्हें पिछले सप्ताह ही सैंपल फेल होने के बाद प्रतिबंधित श्रेणी में डाला गया था। गोरखपुर के बड़े स्टाकिस्टों ने ग्रामीण क्षेत्र के फुटकर दुकानदारों को 10 प्रतिशत रेट कम कर ये दवाएं बेच दी हैं। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि दुकान में रखी कुछ दवाएं बिना बिल के पाई गईं। दुकान को सील कर दिया गया है। दवाओं की जांच के बाद इस मामले में केस दर्ज कराया जाएगा।
अमर उजाला ने रविवार के अंक में-प्रतिबंध लगाया तो धंधेबाजों ने फुटकर बाजार में खपाई आठ करोड़ की दवाएं, शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। सहायक आयुक्त औषधि के निर्देश पर सोमवार शाम को ड्रग इंस्पेक्टर राहुल कुमार ने औषधि अनुसेवक मोहन तिवारी और चौरीचौरा पुलिस के साथ विद्युत उपकेंद्र मुंडेरा बाजार के पास स्थित खेतान मेडिकल स्टोर पर छापा मारा।
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ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि मौके पर पता चला कि दुकान का निर्धारित स्थान भी बदल दिया गया है। जांच के दौरान दुकान में पैरासिटामॉल, एजीथ्रो, डाइक्लो समेत 15 दवाएं और इंजेक्शन मिलीं। कुछ दवाएं बिना बिल की रखी गई थीं। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि दुकानदार मुकेश खेतान कई दवाओं का बिल प्रस्तुत नहीं कर पाया। कई दवाएं जेनरिक कंपनियों की थीं, जिन्हें हाल ही में प्रतिबंधित सूची में डाला गया है। इस वजह दवाओं को जब्त कर दुकान सील कर दी गई।
छापा की सूचना फैलते ही कस्बे की कई दुकानें बंद हो गईं। कार्रवाई करने वाली टीम का पुलिस सब इंस्पेक्टर पुनीत यादव, कांस्टेबल ओमप्रकाश आदि ने सहयोग किया। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे। जांच रिपोर्ट और विवेचना पूर्ण होने के बाद कोर्ट में वाद दाखिल किया जाएगा।
जांच शुरू होने से दवा माफिया में हड़कंप
प्रतिबंधित श्रेणी की दवाएं फुटकर बाजार में खपाने की खबर आम होने के बाद दवा माफिया सकते में हैं। सोमवार शाम जैसे ही उन्हें मुंडेरा बाजार में छापा पड़ने की जानकारी हुई, वे इस कोशिश में लग गए कि कहीं दुकान से कोई बिल या ऐसे कागज तो जांच अधिकारी के हाथ नहीं लगे हैं, ताकि थोक व्यापारी का नाम सामने आ जाए। देर शाम तक व्यापारी इस कार्रवाई के बारे में इधर-उधर से सूचनाएं जुटाते रहे।
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जब्त माल में पैरासिटामॉल, एजीथ्रो, डाइक्लो समेत करीब 15 प्रतिबंधित दवाएं शामिल हैं। ये वे दवाएं हैं, जिन्हें पिछले सप्ताह ही सैंपल फेल होने के बाद प्रतिबंधित श्रेणी में डाला गया था। गोरखपुर के बड़े स्टाकिस्टों ने ग्रामीण क्षेत्र के फुटकर दुकानदारों को 10 प्रतिशत रेट कम कर ये दवाएं बेच दी हैं। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि दुकान में रखी कुछ दवाएं बिना बिल के पाई गईं। दुकान को सील कर दिया गया है। दवाओं की जांच के बाद इस मामले में केस दर्ज कराया जाएगा।
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अमर उजाला ने रविवार के अंक में-प्रतिबंध लगाया तो धंधेबाजों ने फुटकर बाजार में खपाई आठ करोड़ की दवाएं, शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। सहायक आयुक्त औषधि के निर्देश पर सोमवार शाम को ड्रग इंस्पेक्टर राहुल कुमार ने औषधि अनुसेवक मोहन तिवारी और चौरीचौरा पुलिस के साथ विद्युत उपकेंद्र मुंडेरा बाजार के पास स्थित खेतान मेडिकल स्टोर पर छापा मारा।
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ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि मौके पर पता चला कि दुकान का निर्धारित स्थान भी बदल दिया गया है। जांच के दौरान दुकान में पैरासिटामॉल, एजीथ्रो, डाइक्लो समेत 15 दवाएं और इंजेक्शन मिलीं। कुछ दवाएं बिना बिल की रखी गई थीं। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि दुकानदार मुकेश खेतान कई दवाओं का बिल प्रस्तुत नहीं कर पाया। कई दवाएं जेनरिक कंपनियों की थीं, जिन्हें हाल ही में प्रतिबंधित सूची में डाला गया है। इस वजह दवाओं को जब्त कर दुकान सील कर दी गई।
छापा की सूचना फैलते ही कस्बे की कई दुकानें बंद हो गईं। कार्रवाई करने वाली टीम का पुलिस सब इंस्पेक्टर पुनीत यादव, कांस्टेबल ओमप्रकाश आदि ने सहयोग किया। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि दवाओं के सैंपल जांच के लिए भेजे जाएंगे। जांच रिपोर्ट और विवेचना पूर्ण होने के बाद कोर्ट में वाद दाखिल किया जाएगा।
जांच शुरू होने से दवा माफिया में हड़कंप
प्रतिबंधित श्रेणी की दवाएं फुटकर बाजार में खपाने की खबर आम होने के बाद दवा माफिया सकते में हैं। सोमवार शाम जैसे ही उन्हें मुंडेरा बाजार में छापा पड़ने की जानकारी हुई, वे इस कोशिश में लग गए कि कहीं दुकान से कोई बिल या ऐसे कागज तो जांच अधिकारी के हाथ नहीं लगे हैं, ताकि थोक व्यापारी का नाम सामने आ जाए। देर शाम तक व्यापारी इस कार्रवाई के बारे में इधर-उधर से सूचनाएं जुटाते रहे।