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Gorakhpur News: तस्करों की गाड़ी पर फेंक रहे मोबिल भरा गुब्बारा, पिकअप छोड़ भाग रहे तस्कर
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गोरखपुर। पशु तस्करों को पकड़ने के लिए पुलिस मोबिल भरे गुब्बारे का इस्तेमाल कर रही है। तेज रफ्तार में बैरियर तोड़कर भागने वाली पशु तस्करों की गाड़ियों के शीशे पर मोबिल गिरने पर दिखाई देना बंद हो जा रहा है। इस वजह से तस्कर मजबूरी में गाड़ी छोड़कर भाग जा रहे हैं। इस तरकीब से इधर दो दिन की कार्रवाई में पुलिस ने शाहपुर, खोराबार और चौरीचौरा में गोवंश लदी गाड़ियां पकड़ी हैं।
जिले में पशु तस्करों को पकड़ने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है। रात 11 से भोर में पांच बजे तक पुलिस सड़क पर चेकिंग अभियान चला रही है। सड़क पर पुलिस कुछ इस तरह जाल बिछा रही है। बैरिकेडिंग के पास संदिग्ध वाहनों को एक टीम हाथ देती है, वहां से गाड़ी भगाने पर थोड़ी दूर आगे खड़ी दूसरी टीम मोबिल भरा गुब्बारा व पॉलिथिन शीशे पर निशाना लगाकर फेंकती है। वहीं पुलिस की एक टीम सड़कों पर केवल संदिग्ध पिकअप वॉच करती है, उसका काम केवल सूचना देना है।
पशु तस्कर पुलिस को मात देने के लिए पिकअप में डीजल के साथ 20 फीसदी पेट्रोल (रॉकेट फ्यूल) डलवा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इससे गाड़ी की स्पीड तेज हो जा रही है। पकड़े गए पशु तस्करों ने यह बात बताई है। इसके बाद पुलिस ने भी पकड़ने के लिए नई तरकीब लगाई है। तस्करों की माने तो गोवंश उठाने वाले पिकअप को पहले बिहार में ले जाकर मॉडिफाई कराया जा रहा है। गाड़ी में मोटे लोहे के बंपर, पीछे धूल उड़ाने के लिए दोनों पहियों पर नीचे तक रबर, गोवंश चढ़ाने के लिए सीढ़ीनुमा बड़ा ढाला लगाया जाता है। बिहार में 20 से 25 हजार में गाड़ियां मॉडिफाई हो जाती हैं।
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जिले में पशु तस्करों को पकड़ने के लिए विशेष रणनीति बनाई गई है। रात 11 से भोर में पांच बजे तक पुलिस सड़क पर चेकिंग अभियान चला रही है। सड़क पर पुलिस कुछ इस तरह जाल बिछा रही है। बैरिकेडिंग के पास संदिग्ध वाहनों को एक टीम हाथ देती है, वहां से गाड़ी भगाने पर थोड़ी दूर आगे खड़ी दूसरी टीम मोबिल भरा गुब्बारा व पॉलिथिन शीशे पर निशाना लगाकर फेंकती है। वहीं पुलिस की एक टीम सड़कों पर केवल संदिग्ध पिकअप वॉच करती है, उसका काम केवल सूचना देना है।
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पशु तस्कर पुलिस को मात देने के लिए पिकअप में डीजल के साथ 20 फीसदी पेट्रोल (रॉकेट फ्यूल) डलवा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इससे गाड़ी की स्पीड तेज हो जा रही है। पकड़े गए पशु तस्करों ने यह बात बताई है। इसके बाद पुलिस ने भी पकड़ने के लिए नई तरकीब लगाई है। तस्करों की माने तो गोवंश उठाने वाले पिकअप को पहले बिहार में ले जाकर मॉडिफाई कराया जा रहा है। गाड़ी में मोटे लोहे के बंपर, पीछे धूल उड़ाने के लिए दोनों पहियों पर नीचे तक रबर, गोवंश चढ़ाने के लिए सीढ़ीनुमा बड़ा ढाला लगाया जाता है। बिहार में 20 से 25 हजार में गाड़ियां मॉडिफाई हो जाती हैं।
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