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Gorakhpur News: पैरामेडिकल फंड से पैथोलॉजी मरम्मत की कोशिश, भुगतान रुका
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज का मामला
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजी विभाग की मरम्मत और सुंदरीकरण का कार्य पैरामेडिकल कोर्स के फंड से कराने की कोशिश की गई। भुगतान के लिए बिल बैंक भेजा गया लेकिन नियमों के उल्लंघन पर बैंक ने आपत्ति जता दी और भुगतान रोक दिया। अब कॉलेज प्रशासन इस व्यय और भुगतान को लेकर असमंजस में है।
जानकारी के मुताबिक, स्टेट कॉन्फ्रेंस पैथोकॉन से पहले पैथोलॉजी विभाग और लेक्चर थिएटर में फॉल सीलिंग, पर्दे, कुर्सी, मेज खरीदने के साथ रंगाई-पुताई कराई गई। इस कार्य पर करीब 22 लाख रुपये खर्च हुए। कॉलेज के इंजीनियरिंग विभाग ने इस रकम का भुगतान पैरामेडिकल कोर्स के फंड से करने के लिए बिल भेजा है, जबकि यह फंड छात्रों की फीस से जमा होकर प्रस्तावित पैरामेडिकल कॉलेज पर खर्च होना है।
नियमों के अनुसार, पैरामेडिकल फंड से खर्च की मंजूरी चार सदस्यीय कमेटी से लेना जरूरी है, जिसमें प्राचार्य, डीन पैरामेडिकल, डीन मेडिकल कॉलेज और वित्त नियंत्रक शामिल होते हैं। इस मामले में कमेटी की बैठक ही नहीं हुई। बिल सीधे प्राचार्य और विभागाध्यक्ष के हस्ताक्षर से बैंक भेज दिया गया। बैंक अधिकारियों ने प्रक्रिया पर सवाल उठाया तो मामला खुला। कमेटी के एक सदस्य ने फाइल पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया।
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इस संबंध में प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि प्रक्रियागत चूक हुई है। इस खर्च का भुगतान सामान्य मद से कराया जाएगा।
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गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में पैथोलॉजी विभाग की मरम्मत और सुंदरीकरण का कार्य पैरामेडिकल कोर्स के फंड से कराने की कोशिश की गई। भुगतान के लिए बिल बैंक भेजा गया लेकिन नियमों के उल्लंघन पर बैंक ने आपत्ति जता दी और भुगतान रोक दिया। अब कॉलेज प्रशासन इस व्यय और भुगतान को लेकर असमंजस में है।
जानकारी के मुताबिक, स्टेट कॉन्फ्रेंस पैथोकॉन से पहले पैथोलॉजी विभाग और लेक्चर थिएटर में फॉल सीलिंग, पर्दे, कुर्सी, मेज खरीदने के साथ रंगाई-पुताई कराई गई। इस कार्य पर करीब 22 लाख रुपये खर्च हुए। कॉलेज के इंजीनियरिंग विभाग ने इस रकम का भुगतान पैरामेडिकल कोर्स के फंड से करने के लिए बिल भेजा है, जबकि यह फंड छात्रों की फीस से जमा होकर प्रस्तावित पैरामेडिकल कॉलेज पर खर्च होना है।
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नियमों के अनुसार, पैरामेडिकल फंड से खर्च की मंजूरी चार सदस्यीय कमेटी से लेना जरूरी है, जिसमें प्राचार्य, डीन पैरामेडिकल, डीन मेडिकल कॉलेज और वित्त नियंत्रक शामिल होते हैं। इस मामले में कमेटी की बैठक ही नहीं हुई। बिल सीधे प्राचार्य और विभागाध्यक्ष के हस्ताक्षर से बैंक भेज दिया गया। बैंक अधिकारियों ने प्रक्रिया पर सवाल उठाया तो मामला खुला। कमेटी के एक सदस्य ने फाइल पर हस्ताक्षर करने से इन्कार कर दिया।
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इस संबंध में प्राचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने बताया कि प्रक्रियागत चूक हुई है। इस खर्च का भुगतान सामान्य मद से कराया जाएगा।