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संशोधित: आध्यात्मिक फिल्म महोत्सव-1

Sat, 22 Mar 2025 12:59 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sat, 22 Mar 2025 12:59 AM IST
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Gorakhpur News: Artists cannot speak Hindi, Bollywood is getting ruined
द कश्मीर फाइल्स से चर्चित विवेक रंजन अग्निहोत्री बोले- स्वतंत्र निर्माता की कमी चिंता का कारण
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फिल्म निर्माण में कंपनियों के वर्चस्व पर जताई चिंता
गोरखपुर। आजकल के कलाकार ठीक से हिंदी नहीं बोल पाते, इस वजह से बॉलीवुड बर्बाद होता जा रहा है। स्वतंत्र निर्माता नाम मात्र के रह गए हैं। फिल्म निर्माण में कंपनियों का वर्चस्व बढ़ता जा रहा है। यह चिंता का विषय है। सत्य घटनाओं पर आधारित फिल्में देखने से इंसान को सही-गलत की पहचान होती है। पुराने समय में जो गलतियां हुई हैं, वे दोबारा न हों, उसपर विचार करने के लिए ये फिल्में प्रेरित करती हैं।

ये बातें द कश्मीर फाइल्स से चर्चित फिल्मकार विवेक रंजन अग्निहोत्री ने शुक्रवार को अमर उजाला से विशेष बातचीत के दौरान कहीं। वह योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित आध्यात्मिक फिल्म महोत्सव में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने गोरखपुर आए हैं।
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बच्चों के टैलेंट को संवारने के लिए खोल रहा हूं स्कूल
विवेक रंजन ने कहा-जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, इंसान को कुछ भी समझाना मुश्किल होता जाता है। वहीं अगर किसी पांच साल के बच्चे के अंदर प्रतिभा है, उसको आगे बढ़ाना बहुत आसान होता है। बहुत से लोगों में प्रतिभा होती है, लेकिन अच्छा प्लेटफार्म या मार्गदर्शक नहीं मिलने से वह खत्म हो जाती है। देशभर के बच्चों की क्रिएटिविटी की पहचान कर उसे निखारने के लिए स्कूल खोल रहा हूंं। इसका नाम स्कूल ऑफ क्रिएटिविटी रखा है। इसमें पूर्वांचल से लगायत देशभर के बच्चे कला सीख सकेंगे।
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दूसरों की नकल से कभी आगे नहीं बढ़ सकते
विवेक रंजन ने बताया कि एक हीरो की तरह बाल संवारने से कोई एक्टर नहीं बन जाता। एक्टिंग शक्ल-सूरत से नहीं बल्कि खुद की क्रिएटिविटी से निखरती है। आप अपनी खुद की पहचान बनाएं, जो बिल्कुल अलग हो, उससे आप जाने जाएं। ऐसे ही लोगों को लोग देखना और सुनना चाहते हैं। इसमें चाहे गायकी का क्षेत्र हो या फिर एक्टिंग का हो।

सत्य आधारित फिल्म बनाने में लग जाते हैं कई साल
विवेक रंजन ने बताया कि सत्य आधारित फिल्म बनाने में कई साल लग जाते हैं। इसके लिए जमीन पर उतरना होता है। आम आदमी के बीच रहकर उनको महसूस करना होता है। द कश्मीर फाइल्स फिल्म बनाने में चार साल लगे थे। जबकि आने वाली द देलही फाइल्स फिल्म को बनाने में पांच साल लग गए। इसको देखने के बाद आप अपने आस-पास होने वाली घटनाओं और सचाई से रूबरू हो सकेंगे। उन्हाेंने देश के विभाजन पर फिल्म बनाई है। इसका एक ही उद्देश्य है, विभाजन का क्या कारण था, इसको समझ सकें। जो गलतियां हमसे उस समय हुई थीं, वे फिर से न दोहराई जाएं।
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