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अर्पित हॉस्पिटल : विवेक ने बनवाई अर्मेनिया से एमबीबीएस की फर्जी डिग्री, जांच शुरू
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अर्पित हॉस्पिटल के संचालक प्रवीण सिंह के पास है अर्मेनिया की डिग्री
डॉ. शमीम को बिना बताए उनके नाम पर कराया था अस्पताल का पंजीकरण
गोरखपुर। अर्पित हॉस्पिटल प्रकरण की जांच में अर्मेनिया की फर्जी एमबीबीएस की डिग्री बनवाने का मामला सामने आया है। डॉ. शमीम अंसारी का आरोप है कि अर्पित हॉस्पिटल के संचालक प्रवीण सिंह ने विवेक सिंह नाम के व्यक्ति से अर्मेनिया की फर्जी एमबीबीएस की डिग्री बनवाई है। मामले में पुलिस ने डॉक्टर की तहरीर पर अर्पित हॉस्पिटल के संचालक प्रवीण सिंह और विवेक सिंह पर केस दर्ज किया है। संचालक पर तीसरा यह केस है।
डॉक्टर शमीम ने बताया कि अर्मेनिया (पश्चिम एशिया के काकेशस क्षेत्र में स्थित एक देश) में डीएनबी कोर्स में एडमिशन कराने के नाम पर प्रवीण ने मुझसे भी पांच लाख रुपये हड़प लिए। यह भी पता चला है कि बिना इजाजत के मेरी डिग्री का इस्तेमाल कर अर्पित हॉस्पिटल का पंजीकरण कराया है। शिकायत पर गुलरिहा पुलिस ने संचालक प्रवीण सिंह और विवेक सिंह पर केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।
चिलुआताल क्षेत्र के करीमनगर निवासी डॉ. शमीम अंसारी वर्तमान में जिला क्षय रोग केंद्र गोरखपुर में नियुक्त हैं। उनकी ड्यूटी बीआरडी मेडिकल में है। डॉक्टर का कहना है कि वर्ष 2015 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से संबद्ध जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पास किया है। आरोप है कि 2020–21 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में प्रवीण सिंह से मुलाकात हुई। इसके बाद अर्पित हॉस्पिटल में ऑनकाल डॉक्टर के रूप में डिग्री दी थी। इस संबंध में एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि डॉक्टर की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है। फर्जी डिग्री बनवाने के आरोप की जांच की जा रही है।
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वर्ष 2023 में काम से कर दिया था मना, सीएमओ दफ्तर में दी थी सूचना
डॉ. शमीम अंसारी ने बताया कि वर्ष 2023 में अर्पित हॉस्पिटल में काम करने से मना करते हुए सीएमओ दफ्तर में सूचना दे दी थी। आरोप है कि हॉस्पिटल में काम करने से मना करने के बावजूद प्रवीण सिंह अर्पित हॉस्पिटल का संचालन उनके नाम पर (शमीम अंसारी) करता रहा। डॉक्टर ने बताया कि वर्ष 2024 में नीट पीजी की परीक्षा में कम नंबर आए थे। इस दौरान मुलाकात होने पर प्रवीण सिंह ने अपने परिचित विवेक सिंह के माध्यम से अर्मेनिया में डीएनबी कोर्स में एडमिशन कराने के लिए 25 लाख रुपये में ठेका ले लिया। इसके बदले प्रवीण सिंह ने पांच लाख रुपये खाते में लिए। काउंसिलिंग प्रक्रिया समाप्त होने के बाद एडमिशन नहीं हुआ तो जालसाजी की जानकारी हुई। डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि प्रवीण सिंह ने बिना अर्मेनिया गए ही घर बैठे डिग्री प्राप्त कर ली है। जो फर्जी है।
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डॉ. शमीम को बिना बताए उनके नाम पर कराया था अस्पताल का पंजीकरण
गोरखपुर। अर्पित हॉस्पिटल प्रकरण की जांच में अर्मेनिया की फर्जी एमबीबीएस की डिग्री बनवाने का मामला सामने आया है। डॉ. शमीम अंसारी का आरोप है कि अर्पित हॉस्पिटल के संचालक प्रवीण सिंह ने विवेक सिंह नाम के व्यक्ति से अर्मेनिया की फर्जी एमबीबीएस की डिग्री बनवाई है। मामले में पुलिस ने डॉक्टर की तहरीर पर अर्पित हॉस्पिटल के संचालक प्रवीण सिंह और विवेक सिंह पर केस दर्ज किया है। संचालक पर तीसरा यह केस है।
डॉक्टर शमीम ने बताया कि अर्मेनिया (पश्चिम एशिया के काकेशस क्षेत्र में स्थित एक देश) में डीएनबी कोर्स में एडमिशन कराने के नाम पर प्रवीण ने मुझसे भी पांच लाख रुपये हड़प लिए। यह भी पता चला है कि बिना इजाजत के मेरी डिग्री का इस्तेमाल कर अर्पित हॉस्पिटल का पंजीकरण कराया है। शिकायत पर गुलरिहा पुलिस ने संचालक प्रवीण सिंह और विवेक सिंह पर केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू की।
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चिलुआताल क्षेत्र के करीमनगर निवासी डॉ. शमीम अंसारी वर्तमान में जिला क्षय रोग केंद्र गोरखपुर में नियुक्त हैं। उनकी ड्यूटी बीआरडी मेडिकल में है। डॉक्टर का कहना है कि वर्ष 2015 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से संबद्ध जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस पास किया है। आरोप है कि 2020–21 में बीआरडी मेडिकल कॉलेज में प्रवीण सिंह से मुलाकात हुई। इसके बाद अर्पित हॉस्पिटल में ऑनकाल डॉक्टर के रूप में डिग्री दी थी। इस संबंध में एसपी सिटी अभिनव त्यागी ने बताया कि डॉक्टर की तहरीर पर केस दर्ज कर लिया गया है। फर्जी डिग्री बनवाने के आरोप की जांच की जा रही है।
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वर्ष 2023 में काम से कर दिया था मना, सीएमओ दफ्तर में दी थी सूचना
डॉ. शमीम अंसारी ने बताया कि वर्ष 2023 में अर्पित हॉस्पिटल में काम करने से मना करते हुए सीएमओ दफ्तर में सूचना दे दी थी। आरोप है कि हॉस्पिटल में काम करने से मना करने के बावजूद प्रवीण सिंह अर्पित हॉस्पिटल का संचालन उनके नाम पर (शमीम अंसारी) करता रहा। डॉक्टर ने बताया कि वर्ष 2024 में नीट पीजी की परीक्षा में कम नंबर आए थे। इस दौरान मुलाकात होने पर प्रवीण सिंह ने अपने परिचित विवेक सिंह के माध्यम से अर्मेनिया में डीएनबी कोर्स में एडमिशन कराने के लिए 25 लाख रुपये में ठेका ले लिया। इसके बदले प्रवीण सिंह ने पांच लाख रुपये खाते में लिए। काउंसिलिंग प्रक्रिया समाप्त होने के बाद एडमिशन नहीं हुआ तो जालसाजी की जानकारी हुई। डॉक्टर ने आरोप लगाया है कि प्रवीण सिंह ने बिना अर्मेनिया गए ही घर बैठे डिग्री प्राप्त कर ली है। जो फर्जी है।