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Gorakhpur News: सेंट्रल लैब में होंगे सभी सरकारी अस्पतालों के जांच, स्थानीय स्तर पर मिलेगी रिपोर्ट
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सभी सरकारी अस्पतालों की जांच अब सेंट्रल लैब में होगी, रिपोर्ट मिलने में नहीं लगेगा समय
इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब से मरीजों को मिलेगी जांच में सुविधा साथ ही क्षेत्र विशेष में बीमारियों को इकट्ठा होगा डाटा
गोरखपुर। अब ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को जांच के लिए जिला अस्पताल आने की जहमत नहीं पड़ेगी। सभी सरकारी अस्पतालों में होने वाली जांच जिला अस्पताल में नवनिर्मित सेंट्रल लैब में होंगी। मरीजों के खून, यूरिन, स्लाइवा, स्टूल सहित विभिन्न प्रकार के नमूनों को एकत्र कर सेंट्रल लैब भेज दिया जाएगा और मरीज स्थानीय अस्पताल से ही रिपोर्ट प्राप्त कर सकेंगे।
जिला अस्पताल में एक करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब में जल्द ही काम कर दिया जाएगा। इस अत्याधुनिक लैब से न केवल जांच रिपोर्ट समय पर मिलेगी बल्कि जिले में बीमारियों के फैलाव का क्षेत्रीय डाटा भी तैयार किया जा सकेगा। अभी सीएचसी और पीएचसी पर पर्याप्त जांच सुविधाएं नहीं होने के कारण मरीजों को जिला अस्पताल आकर जांच करानी पड़ती है। इसमें दो से तीन दिन लग जाते है जिससे इलाज में देरी होती है। लेकिन अब जिले की 19 सीएचसी और 7 पीएचसी पर मरीजों से सैंपल लिए जाएंगे और उन्हें सीधे सेंट्रल लैब भेजा जाएगा। जांच के बाद रिपोर्ट संबंधित केंद्र और स्वास्थ्य विभाग को भेंज दी जाएगी। इस सेंट्रल लैब में रक्त, बलगम, यूरिन से संबंधित सभी जांचों, कल्चर टेस्ट, टीबी, कुष्ठ (लेप्रोसी), महिलाओं से जुड़ी सभी पैथोलॉजिकल जांचें की जाएंगी। अत्याधुनिक उपकरणों से युक्त इस लैब में सीएचसी और पीएचसी से 24 घंटे सैंपल लेकर आने और उसकी जांच की सुविधा रहेगी।
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डाटा संग्रह भी करेगा सेंट्रल लैब
सेंट्रल लैब से मरीजों को जांच सुविधा तो मिलेगी ही साथ ही जिला स्तर पर स्वास्थ्य अनुसंधान की दिशा में काम किया जा सकेगा। किस क्षेत्र में कौन-सी बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है, इसकी जानकारी समय रहते मिल सकेगी। इसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग बीमारियों से जुड़े डाटा भी इकट्ठा करेगा। जिससे बीमारियों के रोकथाम और नियंत्रण के लिए रणनीति बनाई जा सकेगी।
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लैब पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी है। कुछ अंतिम तकनीकी काम बचे हैं जो जल्द ही पूरे कर लिए जाएंगे। इसके बाद कार्यदायी संस्था इस अस्पताल को हैंडओवर कर देगी। इसके बाद सभी जांच कार्य सेंट्रल लैब में होने लगेंगे।
- डॉ. संजय कुमार, एसआईसी
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इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब से मरीजों को मिलेगी जांच में सुविधा साथ ही क्षेत्र विशेष में बीमारियों को इकट्ठा होगा डाटा
गोरखपुर। अब ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को जांच के लिए जिला अस्पताल आने की जहमत नहीं पड़ेगी। सभी सरकारी अस्पतालों में होने वाली जांच जिला अस्पताल में नवनिर्मित सेंट्रल लैब में होंगी। मरीजों के खून, यूरिन, स्लाइवा, स्टूल सहित विभिन्न प्रकार के नमूनों को एकत्र कर सेंट्रल लैब भेज दिया जाएगा और मरीज स्थानीय अस्पताल से ही रिपोर्ट प्राप्त कर सकेंगे।
जिला अस्पताल में एक करोड़ रुपये की लागत से तैयार की गई इंटीग्रेटेड पब्लिक हेल्थ लैब में जल्द ही काम कर दिया जाएगा। इस अत्याधुनिक लैब से न केवल जांच रिपोर्ट समय पर मिलेगी बल्कि जिले में बीमारियों के फैलाव का क्षेत्रीय डाटा भी तैयार किया जा सकेगा। अभी सीएचसी और पीएचसी पर पर्याप्त जांच सुविधाएं नहीं होने के कारण मरीजों को जिला अस्पताल आकर जांच करानी पड़ती है। इसमें दो से तीन दिन लग जाते है जिससे इलाज में देरी होती है। लेकिन अब जिले की 19 सीएचसी और 7 पीएचसी पर मरीजों से सैंपल लिए जाएंगे और उन्हें सीधे सेंट्रल लैब भेजा जाएगा। जांच के बाद रिपोर्ट संबंधित केंद्र और स्वास्थ्य विभाग को भेंज दी जाएगी। इस सेंट्रल लैब में रक्त, बलगम, यूरिन से संबंधित सभी जांचों, कल्चर टेस्ट, टीबी, कुष्ठ (लेप्रोसी), महिलाओं से जुड़ी सभी पैथोलॉजिकल जांचें की जाएंगी। अत्याधुनिक उपकरणों से युक्त इस लैब में सीएचसी और पीएचसी से 24 घंटे सैंपल लेकर आने और उसकी जांच की सुविधा रहेगी।
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डाटा संग्रह भी करेगा सेंट्रल लैब
सेंट्रल लैब से मरीजों को जांच सुविधा तो मिलेगी ही साथ ही जिला स्तर पर स्वास्थ्य अनुसंधान की दिशा में काम किया जा सकेगा। किस क्षेत्र में कौन-सी बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है, इसकी जानकारी समय रहते मिल सकेगी। इसके आधार पर स्वास्थ्य विभाग बीमारियों से जुड़े डाटा भी इकट्ठा करेगा। जिससे बीमारियों के रोकथाम और नियंत्रण के लिए रणनीति बनाई जा सकेगी।
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लैब पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी है। कुछ अंतिम तकनीकी काम बचे हैं जो जल्द ही पूरे कर लिए जाएंगे। इसके बाद कार्यदायी संस्था इस अस्पताल को हैंडओवर कर देगी। इसके बाद सभी जांच कार्य सेंट्रल लैब में होने लगेंगे।
- डॉ. संजय कुमार, एसआईसी