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Gorakhpur News:रात में मरीज की मौत- सुबह तक रोके लगा डेथ सर्टिफिकेट, हंगामे के बाद किया जारी

Tue, 18 Mar 2025 12:35 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Tue, 18 Mar 2025 12:35 AM IST
सार

तुर्कमानपुर में 19 वर्षीय राज नाम का युवक चार मार्च को गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। कई जगह इलाज के बाद 13 मार्च को परिजन दाउदपुर स्थित इस अस्पताल में मरीज लेकर पहुंचे। अस्पताल संचालक डॉ. डीपी सिंह का कहना है कि घरवाले जब मरीज लेकर आए तभी उन्हें बताया गया था कि इसकी जान नहीं बच पाएगी।

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In Gorakhpur, After the death of the patient, the death certificate was stopped for money, there was a ruckus
स्वास्थ्य विभाग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर। कैंट थाना क्षेत्र के दाउदपुर इलाके के एक अस्पताल में पांच दिन से भर्ती मरीज की रविवार देर रात मौत हो गई। सुबह करीब छह बजे घरवालों ने बकाया रुपये के लिए शव और डेथ सर्टिफिकेट रोकने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। घरवालों का आरोप था कि पांच दिन में 73 हजार रुपये का बिल बना दिया।
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वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि शव नहीं रोका गया, बल्कि उन्हें यह कहा गया कि बाद में बकाया 50 हजार रुपये जमा करने पर डेथ सर्टिफिकेट दिया जाएगा। लेकिन परिजन बकाया रुपये देने की बजाय हंगामा कर रहे थे।
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तुर्कमानपुर में 19 वर्षीय राज नाम का युवक चार मार्च को गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। कई जगह इलाज के बाद 13 मार्च को परिजन दाउदपुर स्थित इस अस्पताल में मरीज लेकर पहुंचे। अस्पताल संचालक डॉ. डीपी सिंह का कहना है कि घरवाले जब मरीज लेकर आए तभी उन्हें बताया गया था कि इसकी जान नहीं बच पाएगी।
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उनके आग्रह पर आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। घरवालों ने पैसे नहीं दिए तो दवा अपने पास से दी। वहीं, मृत युवक के चाचा गौतम कुशवाहा का कहना था कि 16 मार्च को 16,100 रुपये जमा किए गए। इसके बाद मरीज को वेंटीलेटर से हटा दिया गया। रात दो बजे भतीजे की मौत हो गई।

सुबह अस्पताल प्रबंधन ने बिल भुगतान करने पर शव देने की बात कही। जिस युवक की मौत हुई है, उसके पिता लकवाग्रस्त हैं। मां रुपये का प्रबंध नहीं कर पाई थी। वहीं, एसओ कैंट संजय सिंह ने बताया कि उनके पास ऐसा कोई मामला नहीं आया था।


अस्पताल संचालक डीपी सिंह का कहना था कि हमने शव नहीं रोका था, बल्कि यह कहा कि शव ले जाएं और दो चार दिन में बकाया 50 हजार रुपये जमा कर डेथ सर्टिफिकेट भी ले जाएं। लेकिन, घरवाले और उनके साथ आए लोग रुपये नहीं देना चाहते थे। इसी बात को लेकर वे लोग हंगामा करने लगे। हम जितना छोड़ सकते थे, उतना छोड़ दिया।
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