फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Gorakhpur News: After passing high school, the sisters had told their mother that the days of sorrow will pass in a few days... darkness prevailed

Gorakhpur News: हाईस्कूल पास कर बहनों ने मां से कहा था कुछ दिन में कट जाएंगे दुख के दिन...छा गया अंधेरा

Wed, 28 May 2025 01:13 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Wed, 28 May 2025 01:13 AM IST
विज्ञापन
Gorakhpur News: After passing high school, the sisters had told their mother that the days of sorrow will pass in a few days... darkness prevailed
कैंपियरगंज में तीन बहनों के डूबने के बाद घर में मचा कोहराम
विज्ञापन

नदी डूबी किशोरियों को नहीं ढूंढ पाई एसडीआरएफ टीम, बुधवार को फिर ढूंढेंगी टीम
गोरखपुर। इस वर्ष आफरीन (16) और साबरीन (14) ने एक साथ हाईस्कूल की परीक्षा पास की थी। इसके बाद बोला था कि मां अब कुछ दिन की बात है, दुख के दिन कट जाएंगे। दोनों ने कहा था कि पढ़-लिखकर नौकरी करेंगे तब सभी लोग आराम करना, हमलोग कमाकर लाएंगे। यह कहते हुए उनकी मां नाजिमा खातून फफक पड़ीं। कैंपियरगंज इलाके के मिरहिरिया गांव में तीन किशोरियों के डूबने के बाद कोहराम मच गया।
नाजिमा ने बताया कि मजदूरी कर चार बच्चों को पाल रही थी। आठ साल पहले ही पति की मौत हो गई। इसके बाद से ही बच्चों की पढ़ाई के साथ हर सपना पूरा करने की कोशिश करती हूं। दोनों बेटियां घर के हालात को समझती थीं, इसलिए मेहनत से पढ़ाई कर रही थीं। घर के काम में भी हाथ बंटाती थी। कभी मुझे अकेलापन महसूस नहीं होने दिया। वहीं, चचेरी बहन नाजिया (12) के पिता मुस्तकीम ने बताया कि मेरी बेटी बोली थी, अभी थोड़ी देर में आ रही हूं, कब वो राप्ती नदी के किनारे पहुंच गई, पता नहीं चल पाया। कई बार नदी में नहाने के लिए डांट-फटकार लगाई है। लेकिन, वो नहीं मानी। इसका अंजाम आज यह सब देखने को मिल रहा है। बच्चों की खुशी के लिए ही दिन भर मेहनत-मजदूरी करता हूं। कभी ये नहीं सोचा था कि बेटी असमय इस तरह चली जाएगी।
विज्ञापन


सिर पर हाथ रखकर नदी किनारे बैठे रहे परिजन
आफरीन, साबरीन और नाजिया के परिजन देर शाम तक राप्ती नदी के किनारे सिर पर हाथ रखकर बैठे हुए थे। एक तरफ तीनों के नहीं मिलने का गम उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। दूसरी तरफ कई बार उन्हें ऐसा भी लग रहा था कि उनके बच्चे जिंदा बाहर निकलेंगे। इस उम्मीद में रात तक वहीं बैठकर नदी किनारे टकटकी लगाए रहे। वहीं, सूचना मिलने पर उनके सभी रिश्तेदार भी वहां पहुंच गए थे। नदी किनारे हर तरफ चीखने-चिल्लाने की आवाज आती रही।
विज्ञापन
विज्ञापन


चीखती रही, देखते-देखते डूब गईं तीनों
इस घटना को नजरीन और सकीना ने देखा था। इसमें सकीना भी नदी में डूब रही थी, जिसे मछुआरों ने बचा लिया। नजरीन और सकीना ने बताया कि तीनों को डूबता देखकर हमलोग काफी देर तक चीखते-चिल्लाते रहे। शोर सुनकर पास से मछुआरे दौड़ते हुए आए। लेकिन, तब तक तीनों गहरे पानी में समा चुकी थीं। काफी देर तक मछुआरे पानी के अंदर जाकर उन्हें ढूंढते रहे, लेकिन कहीं पता नहीं चला।


बुधवार को फिर ढूंढेगी टीम
कैंपियरगंज थाना प्रभारी राकेश रोशन ने बताया कि देर शाम तक किशोरियों को एसडीआरएफ की टीम राप्ती नदी में ढूंढती रही। कहीं कुछ पता नहीं चल पाया है। बुधवार को एसडीआरएफ टीम सुबह फिर तलाश शुरू करेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed