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Gorakhpur News: सर्दी में डंप हो गई थी करीब 30 लाख बोतलें..गर्मी बढ़ते ही थी खपाने की तैयारी
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शहर की एक एजेंसी पर पकड़ी गई कोल्ड ड्रिंक्स का मामला
बोतलों पर एक्सपायरी डेट बदलने के लिए एक गिरोह कर रहा है काम
गोरखपुर। शहर में गीडा में बनी कोल्ड ड्रिंक्स के अलावा रायबरेली और अयोध्या से बड़ी मात्रा में कोल्ड ड्रिंक्स की खेप आती है। गर्मी के दिनों में यहां प्रतिदिन छोटी बड़ी करीब तीन लाख बोतल कोल्ड ड्रिंक्स की खपत होती है। बीते नवंबर में कंपनियों ने एजेंसी को जो माल भेजा था, वह सर्दी शुरू होने पर बिका नहीं। इस वजह से एजेंसी व थोक विक्रेताओं के पास विभिन्न कंपनियों की करीब 30 लाख बोतलें डंप हो गई थीं। इन बोतलों को मार्च में ही वापस जाना था, लेकिन धंधेबाजों ने औने-पौने दाम पर इसे खरीदकर खपाने की तैयारी की थी।
कोल्ड ड्रिंक्स के कारोबार से जुड़े राजेश जायसवाल ने बताया कि कोल्ड ड्रिंक्स की बोतल पर एक्सपायरी डेट उत्पादन की तारीख से छह माह तक होती है। आमतौर पर माल दो से तीन महीने में खप जाता है, इसलिए कोई खास दिक्कत नहीं होती। अगर नहीं बिका तो माल वापस हो जाता है। नवंबर में बहुत कम माल मंगाया जाता है, क्योंकि फरवरी तक इनकी बिक्री कम होती है। मार्च में स्टॉक आता है जो बरसात तक रहता है और फिर बरसात में आया स्टाक नवंबर तक चलता है। बाजार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जो माल पकड़ा गया, वह एक्सपायर हो चुका है। नियमानुसार उसकी कंपनी में वापसी की जाएगी और बदले में दूसरा माल आएगा। धंधेबाजों ने इसमें अपना दिमाग लगाया और खराब माल को यहीं रोक लिया और उस पर एक्सपायरी डेट बदल दी। अब इसे ही बाजार में खपा दिया जाता।
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लेजर से बदला गया था नाम, नए तरह की धंधेबाजी
खराब माल को अच्छा बताकर बेचने के लिए धंधेबाजों ने लेजर प्रिंटिंग का नया तरीका खोजा है। इसमें लेजर के जरिए बोतल पर पहले से प्रिंट एक्सपायरी डेट को नई डेट में तब्दील किया गया है। बोतलों पर एक्सपायरी डेट फरवरी की थी, जिसे अब सीधे अगस्त का बना दिया। डेट बदलने के साथ ही सारा माल नए सिरे से बाजार में भेजने की तैयारी थी, जबकि यह सब एक्सपायर हो चुका है और कंपनी को भेजकर नष्ट कराया जाना था।
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हो सकता है गंभीर संक्रमण
एक्सपायर कोल्ड ड्रिंक्स में बैक्टीरिया और वायरस आ जाते हैं, जिससे फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। इसके अलावा एलर्जी की समस्या भी हो सकती है। कोल्ड ड्रिंक्स में कार्बोनेटेड पानी होता है, जो पानी में कार्बन डाइऑक्साइड को मिलाकर बनाया जाता है। इसके अलावा हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप होता है, जो उसके स्वाद को मीठा बनाता है। एक्सपायर होने पर इन रसायनों का शरीर पर दुष्प्रभाव हो सकता है।
- डॉ. राजेश कुमार, फिजिशियन
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बोतलों पर एक्सपायरी डेट बदलने के लिए एक गिरोह कर रहा है काम
गोरखपुर। शहर में गीडा में बनी कोल्ड ड्रिंक्स के अलावा रायबरेली और अयोध्या से बड़ी मात्रा में कोल्ड ड्रिंक्स की खेप आती है। गर्मी के दिनों में यहां प्रतिदिन छोटी बड़ी करीब तीन लाख बोतल कोल्ड ड्रिंक्स की खपत होती है। बीते नवंबर में कंपनियों ने एजेंसी को जो माल भेजा था, वह सर्दी शुरू होने पर बिका नहीं। इस वजह से एजेंसी व थोक विक्रेताओं के पास विभिन्न कंपनियों की करीब 30 लाख बोतलें डंप हो गई थीं। इन बोतलों को मार्च में ही वापस जाना था, लेकिन धंधेबाजों ने औने-पौने दाम पर इसे खरीदकर खपाने की तैयारी की थी।
कोल्ड ड्रिंक्स के कारोबार से जुड़े राजेश जायसवाल ने बताया कि कोल्ड ड्रिंक्स की बोतल पर एक्सपायरी डेट उत्पादन की तारीख से छह माह तक होती है। आमतौर पर माल दो से तीन महीने में खप जाता है, इसलिए कोई खास दिक्कत नहीं होती। अगर नहीं बिका तो माल वापस हो जाता है। नवंबर में बहुत कम माल मंगाया जाता है, क्योंकि फरवरी तक इनकी बिक्री कम होती है। मार्च में स्टॉक आता है जो बरसात तक रहता है और फिर बरसात में आया स्टाक नवंबर तक चलता है। बाजार से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जो माल पकड़ा गया, वह एक्सपायर हो चुका है। नियमानुसार उसकी कंपनी में वापसी की जाएगी और बदले में दूसरा माल आएगा। धंधेबाजों ने इसमें अपना दिमाग लगाया और खराब माल को यहीं रोक लिया और उस पर एक्सपायरी डेट बदल दी। अब इसे ही बाजार में खपा दिया जाता।
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लेजर से बदला गया था नाम, नए तरह की धंधेबाजी
खराब माल को अच्छा बताकर बेचने के लिए धंधेबाजों ने लेजर प्रिंटिंग का नया तरीका खोजा है। इसमें लेजर के जरिए बोतल पर पहले से प्रिंट एक्सपायरी डेट को नई डेट में तब्दील किया गया है। बोतलों पर एक्सपायरी डेट फरवरी की थी, जिसे अब सीधे अगस्त का बना दिया। डेट बदलने के साथ ही सारा माल नए सिरे से बाजार में भेजने की तैयारी थी, जबकि यह सब एक्सपायर हो चुका है और कंपनी को भेजकर नष्ट कराया जाना था।
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हो सकता है गंभीर संक्रमण
एक्सपायर कोल्ड ड्रिंक्स में बैक्टीरिया और वायरस आ जाते हैं, जिससे फूड प्वाइजनिंग हो सकती है। इसके अलावा एलर्जी की समस्या भी हो सकती है। कोल्ड ड्रिंक्स में कार्बोनेटेड पानी होता है, जो पानी में कार्बन डाइऑक्साइड को मिलाकर बनाया जाता है। इसके अलावा हाई फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप होता है, जो उसके स्वाद को मीठा बनाता है। एक्सपायर होने पर इन रसायनों का शरीर पर दुष्प्रभाव हो सकता है।
- डॉ. राजेश कुमार, फिजिशियन