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Gorakhpur News: पनीर ही नहीं खोवा भी मिलावटी... 84 में से 48 नमूने फेल

Fri, 07 Feb 2025 01:05 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Feb 2025 01:05 AM IST
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Gorakhpur News: 25 children lost their eyesight in the womb, surgery brightened the world
खाद्य सुरक्षा विभाग ने अप्रैल से दिसंबर के बीच लिए थे नमूने, पनीर के 60 में से 54 सैंपल अधोमानक
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पूर्वांचल में खोवा की सबसे बड़ी मंडी है गोरखपुर, हर दिन 20 से 25 क्विंटल होती है खपत
ग्रामीण क्षेत्र के बाजारों में दूसरी जगहों से भी आता है खोवा

गोरखपुर। पनीर ही नहीं, दुकानों पर शुद्ध खोवा से बनी मिठाई मिलनी बहुत मुश्किल है। वजह यह है कि पनीर के 60 में से 54 और खोवा के 84 में से 48 नमूने फेल हो गए हैं। ये वे नमूने हैं, जो हर माह मिठाई की अलग-अलग दुकानों से संदेह के आधार पर लिए गए हैं। इनसे बनीं मिठाइयां लोग बड़े चाव से खा रहे हैं, जबकि नमूनों की रिपोर्ट बता रही है कि ये सभी अधोमानक (मिलावटी) हैं। जानकारों का कहना है कि पनीर की तरह खोवा भी पाउडर और रिफाइंड ऑयल से बनाया जा रहा है। अकेले गोरखपुर शहर में हर दिन 20 से 25 क्विंटल खोवा की खपत होती है।
शहर में मिठाई की लगभग 800 दुकानें हैं। खोवा से बनी मिठाई हर जगह बिकती है, लेकिन इतनी बड़ी मात्रा में इसका उत्पादन शहर में होता ही नहीं है। इसकी पूर्ति के लिए कानपुर से बड़ी मात्रा में मिलावटी खोवा आता है। इसके अलावा शहर में भी कई जगह खोवा बनाने का धंधा होता है। नवंबर 2024 में खाद्य सुरक्षा विभाग ने कई दुकानों से बड़ी मात्रा में मिलावटी खोवा पकड़ा था। विभाग की तरफ से भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट चौंकाने वाली है।
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विभागीय जानकारों ने बताया कि अप्रैल से दिसंबर के बीच पनीर के 60 नमूने जांच के लिए भेजे गए थे, जिनमें से 54 की रिपोर्ट मानक के अनुरूप नहीं मिली है। पनीर के अधिकांश मामलों में फैट मिला ही नहीं, जबकि उच्च श्रेणी के पनीर में 50 प्रतिशत, मध्यम में 30 से 50 प्रतिशत और सामान्य श्रेणी में भी 18 से 20 प्रतिशत फैट होना जरूरी है। यही हाल खोवा का भी है। अप्रैल से दिसंबर तक लिए गए 84 में से 48 नमूने फेल हो गए हैं।
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सर्विलांस के बाद दोबारा लिए गए ये नमूने
विभागीय नियमों के जानकारों के अनुसार, खाद्य सुरक्षा विभाग को अगर किसी दुकान से खराब सामान बिकने की जानकारी मिलती है तो पहले वहां सर्विलांस नमूना लिया जाता है, जिसे जांच के लिए भेजकर रिपोर्ट का इंतजार किया जाता है। रिपोर्ट में अगर आशंका की पुष्टि होती है तो फिर वहां छापा मारकर नमूना लिया जाता है और उसे भी टेस्ट के लिए भेजा जाता है। पनीर और खोवा के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई। पनीर की स्थिति अधिक खराब पाई गई है। इसके अलावा खोवा के भी 50 प्रतिशत से अधिक नमूने फेल हो गए हैं।
सिद्धार्थनगर से आता था शुद्ध खोवा, अब कानपुर से आता है मिलावटी
मिठाई की दुकान चलाने वाले राजकुमार मद्धेशिया ने बताया कि पहले शुद्ध खोवा सिद्धार्थनगर की तरफ से आता था। उधर नदी के किनारे लोग पशुपालन करते थे और वहीं दूध निकालकर उससे शुद्ध खोवा तैयार करते थे। जंगल की लकड़ी की आंच पर पके दूध से तैयार खोवा की खुशबू ही उसकी असलियत की पहचान होती थी। हालांकि, वह महंगा पड़ता था। दुकानों पर बड़ी मांग और रेट की लड़ाई में कानपुर से आने वाले मिलावटी खोवा ने पूरे बाजार में कब्जा कर लिया है। पाउडर और रिफाइंड ऑयल से बना खोवा थोक मंडी के विक्रेताओं को 200 रुपये किलो के भाव मिल जाता है, जिसे वे 280 रुपये किलो मिठाई के दुकानदारों को बेच देते हैं।
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दूध और घी की जगह डालते हैं रिफाइंड ऑयल
खोवा दूध का ठोस पदार्थ है। एक लीटर दूध को वाष्पित होने तक उबालें तो केवल 200 ग्राम ठोस पदार्थ बचता है, जिसे खोवा कहा जाता है। एक किलो शुद्ध खोवा बनाने के लिए पांच लीटर शुद्ध दूध को कम से कम दो घंटे तक एक समान आंच पर गर्म करना पड़ता है। मतलब यह कि 60 रुपये लीटर के हिसाब से पांच लीटर दूध की कीमत 300 रुपये हुई। इसे रसोई गैस पर करीब दो घंटे तक लगातार उबालने में दो किलोग्राम गैस (180 रुपये) जलता है। इसके अलावा 100 रुपये कारीगर की मजदूरी जोड़ दें तो इसका खर्च करीब 580 रुपये आता है। इतना महंगा खोवा खरीदने के बजाय मिठाई के दुकानदार मिल्क पाउडर से बना खोवा खरीदते हैं।
सेवानिवृत्त फूड इंस्पेक्टर राजमणि गुप्ता बताते हैं कि मिल्क पाउडर से खोवा बनाने के लिए धंधेबाज दूध और घी का प्रयोग बिल्कुल नहीं करते। इसकी जगह वे पाउडर में रिफाइंड ऑयल डालकर उसे आटे जैसा गूंथ देते हैं। मिल्क पाउडर होने के चलते खाने में तो इसका स्वाद खोवा जैसा ही आता है, लेकिन इसमें पड़ा रिफाइंड ऑयल सेहत को नुकसान पहुंचाता है।

एक्सपर्ट कमेंटलिवर को खराब कर देगा खराब खोवा
मिलावटी खोवा से बना खाद्य पदार्थ लिवर को प्रभावित करता है। इसके अलावा इसमें मौजूद केमिकल कई बार एलर्जी का कारण बन जाता है। इसे खाने वाले को फूड पॉइजनिंग हो सकती है। इसलिए खाने के वस्तुओं की गुणवत्ता का विशेष ख्याल रखना चाहिए।

- डॉ. राजेश कुमार, फिजिशियन

वर्जनयहां पनीर और खोवा की स्थिति बहुत खराब है। जितना दूध का उत्पादन नहीं होता, उससे अधिक पनीर और खोवा बिक रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में लगातार नमूने फेल हो रहे हैं। जिन दुकानों से लिए गए नमूने फेल हुए हैं, उन्हें नोटिस भेजा जा रहा है। केस भी दर्ज कराया जाएगा।

- डॉ. सुधीर कुमार सिंह, सहायक आयुक्त खाद्य
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