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Gorakhpur News: 10 साल पुरानी डीजल बसें बनेंगी इलेक्ट्रिक
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रोडवेज में शुरू हुआ प्रयोग, कानपुर में दो बसें बनकर तैयार, झांसी से ललितपुर रूट पर होगा ट्रायल
ट्रायल सफल रहा तो अन्य बसों को भी इलेक्ट्रिक बसों में बदला जाएगा, लोकल रूटों पर चलेंगी ये बसें
गोरखपुर। परिवहन निगम की 10 साल पुरानी बसें अब नीलाम नहीं होंगी। निगम की ओर से 11 लाख किलोमीटर चल चुकीं या 10 साल पुरानी बसों को इलेक्ट्रिक बसों में बदला जाएगा। इस योजना के पहले चरण में परिवहन निगम ने कानपुर स्थित राम मनोहर लोहिया वर्कशॉप में दो डीजल बसों को इलेक्ट्रिक में बदल दिया है। इनका ट्रायल झांसी से ललितपुर रूट पर किया जाएगा। ट्रायल सफल रहा तो अन्य बसों को भी इलेक्ट्रिक बसों में तब्दील किया जाएगा। लोकल रूटों पर ये बसें चलेंगी।
परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक लव कुमार सिंह ने बताया कि रोडवेज की जिन डीजल बसों ने 10 वर्ष या 11 लाख किलोमीटर का सफर पूरा कर लिया है, उन्हें हटाया जाना अनिवार्य है। हर साल बड़ी संख्या में इन बसों की नीलामी होती है। अब इनकी जगह उन्हें इलेक्ट्रिक में बदला जाएगा। इससे नई बसों की खरीद पर आने वाला खर्च बचेगा।
उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत रिट्रोफिटमेंट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक से बस को इलेक्ट्रिक वाहन में बदला जाएगा। जहां इसकी बॉडी का निर्माण परिवहन निगम करेगा और बैटरी-सिस्टम जैसी तकनीकी सुविधाएं निजी कंपनियां जैसे कल्याणी पावर ट्रेन और जीरो 21 उपलब्ध कराएंगी।
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ट्रायल सफल रहा तो अन्य बसों को भी इलेक्ट्रिक बसों में बदला जाएगा, लोकल रूटों पर चलेंगी ये बसें
गोरखपुर। परिवहन निगम की 10 साल पुरानी बसें अब नीलाम नहीं होंगी। निगम की ओर से 11 लाख किलोमीटर चल चुकीं या 10 साल पुरानी बसों को इलेक्ट्रिक बसों में बदला जाएगा। इस योजना के पहले चरण में परिवहन निगम ने कानपुर स्थित राम मनोहर लोहिया वर्कशॉप में दो डीजल बसों को इलेक्ट्रिक में बदल दिया है। इनका ट्रायल झांसी से ललितपुर रूट पर किया जाएगा। ट्रायल सफल रहा तो अन्य बसों को भी इलेक्ट्रिक बसों में तब्दील किया जाएगा। लोकल रूटों पर ये बसें चलेंगी।
परिवहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक लव कुमार सिंह ने बताया कि रोडवेज की जिन डीजल बसों ने 10 वर्ष या 11 लाख किलोमीटर का सफर पूरा कर लिया है, उन्हें हटाया जाना अनिवार्य है। हर साल बड़ी संख्या में इन बसों की नीलामी होती है। अब इनकी जगह उन्हें इलेक्ट्रिक में बदला जाएगा। इससे नई बसों की खरीद पर आने वाला खर्च बचेगा।
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उन्होंने बताया कि इस प्रक्रिया के तहत रिट्रोफिटमेंट तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। इस तकनीक से बस को इलेक्ट्रिक वाहन में बदला जाएगा। जहां इसकी बॉडी का निर्माण परिवहन निगम करेगा और बैटरी-सिस्टम जैसी तकनीकी सुविधाएं निजी कंपनियां जैसे कल्याणी पावर ट्रेन और जीरो 21 उपलब्ध कराएंगी।
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