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उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं में अव्वल जिलों में शामिल हुआ गोरखपुर, वजह जान लें
Thu, 16 Jan 2020 01:35 PM IST
विजय जैन
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
Published by: विजय जैन
Updated Thu, 16 Jan 2020 01:35 PM IST
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केंद्रीय मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने मो. मुस्तफा को एनक्वास सर्किफिकेट दिया।
- फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में सर्वाधिक दस कायाकल्प अवार्ड और दो एनक्वास सर्टिफिकेट पाकर गोरखपुर जिला स्वास्थ्य सेवाओं में प्रदेश के अव्वल जिलों में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि दिलाने में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों की अनुशासित टीम के साथ ही जिला क्वालिटी कंसल्टेंट डॉ. मो. मुस्तफा ने अहम भूमिका निभाई। इस उपलब्धि का श्रेय सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी भी डॉ. मो. मुस्तफा के बेहतरीन प्रबंधन को देते हैं। स्वास्थ्य विभाग के सभी आला अधिकारियों का मानना है कि डेरवा पीएचसी और बसंतपुर यूपीएचसी को एनक्वास प्रमाणन मिलने से दूसरे स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी भी उत्साहित हैं।
डॉ. मो. मुस्तफा के अनुसार क्वालिटी से जुड़े कामों को स्वास्थ्य कर्मी अतिरिक्त बोझ मानते थे। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लगातार प्रयास किए। इसका नतीजा स्वास्थ्य सेवाओं में सकारात्मक बदलाव के रूप में सामने आया। स्वास्थ्य कर्मियों का नजरिया बदला तो परिणाम दस कायाकल्प अवार्ड और दो एनक्वास प्रमाणन के रूप में जिले के प्रदेश के टॉप जिलों में शामिल होने के रूप में आया। सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी कहते हैं कि अब कायाकल्प एवार्ड और एनक्वास प्रमाणन मिलने से विभागीय अधिकारी उत्साह में हैं। कई हेल्थ फैसिलिटी के अधिकारियों ने खुद आकर उनकी फैसिलिटी को एनक्वास मानक के अनुरूप तैयार करने की इच्छा जताई है।
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डॉ. मो. मुस्तफा के अनुसार क्वालिटी से जुड़े कामों को स्वास्थ्य कर्मी अतिरिक्त बोझ मानते थे। उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी और कर्मचारियों के बीच समन्वय स्थापित करने के लगातार प्रयास किए। इसका नतीजा स्वास्थ्य सेवाओं में सकारात्मक बदलाव के रूप में सामने आया। स्वास्थ्य कर्मियों का नजरिया बदला तो परिणाम दस कायाकल्प अवार्ड और दो एनक्वास प्रमाणन के रूप में जिले के प्रदेश के टॉप जिलों में शामिल होने के रूप में आया। सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी कहते हैं कि अब कायाकल्प एवार्ड और एनक्वास प्रमाणन मिलने से विभागीय अधिकारी उत्साह में हैं। कई हेल्थ फैसिलिटी के अधिकारियों ने खुद आकर उनकी फैसिलिटी को एनक्वास मानक के अनुरूप तैयार करने की इच्छा जताई है।
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2016 में शुरू हुआ प्रयास 2019 में मिली सफलता
2016 मे जिला क्वालिटी कंसल्टेंट पद पर तैनात हुए डॉ. मो. मुस्तफा ने विभागीय अधिकारियों की अनिच्छा के बावजूद सीएचसी पिपराइच और पीएचसी ब्रह्मपुर को कायाकल्प के सभी सात मानकों पर तैयार किया। यह दोनों स्वास्थ्य केंद्र कायाकल्प अवार्ड के लिए चुने गए तो अन्य का तैयार किया गया। दूसरे चरण में कैंपियरगंज सीएचसी, जंगल कौड़िया, कौड़ीराम और डेरवा पीएचसी को कायाकल्प एवार्ड के लिए तैयार किया गया।
नतीजा आया कि तीसरे चरण में कैंपियरगंज सीएची को कायाकल्प में पूरे प्रदेश में पहला स्थान, डेरवा पीएचसी को भी पूरे प्रदेश में पहला स्थान जबकि गोरखपुर की बसंतपुर यूपीएचसी को अपनी श्रेणी में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल हुआ। इनके अलावा जिला अस्पताल, कौड़ीराम, खोराबार, जंगल कौड़िया पीएचसी, पिपराईच सीएचसी, दीवान बाजार और गोरखनाथ यूपीएचसी को भी कायाकल्प एवार्ड हासिल हुआ।
नतीजा आया कि तीसरे चरण में कैंपियरगंज सीएची को कायाकल्प में पूरे प्रदेश में पहला स्थान, डेरवा पीएचसी को भी पूरे प्रदेश में पहला स्थान जबकि गोरखपुर की बसंतपुर यूपीएचसी को अपनी श्रेणी में पूरे प्रदेश में पहला स्थान हासिल हुआ। इनके अलावा जिला अस्पताल, कौड़ीराम, खोराबार, जंगल कौड़िया पीएचसी, पिपराईच सीएचसी, दीवान बाजार और गोरखनाथ यूपीएचसी को भी कायाकल्प एवार्ड हासिल हुआ।