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गोरखपुर आईटीआई: 4.99 करोड़ खर्च करने के बाद भी कार्यशाला में टपक रहा पानी, इन कार्यों पर उठे सवाल
Wed, 01 Feb 2023 03:43 PM IST
vivek shukla
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 01 Feb 2023 03:43 PM IST
सार
आईटीआई चरगांवा के कायाकल्प को लेकर वर्ष 2017-18 में 4.99 करोड़ की धनराशि प्रदेश सरकार की ओर से जारी की गई। कार्य का जिम्मा कार्यदायी संस्था यूपी सिडको को सौंपा। कार्यदायी संस्था ने वर्ष 2022 में कार्य बिना पूरा किए ही हैंडओवर कर दिया।
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आईटीआई चरगांवा
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
राजकीय औद्योगिक संस्थान (आईटीआई) चरगांवा की वर्कशॉप में तय काम मानक के मुताबिक हुए ही नहीं और उन्हें हैंडओवर कर दिया गया। संस्थान के प्राचार्य ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्यदायी संस्था से अधूरे निर्माण कार्य को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। उधर, कार्यदायी संस्था के जिम्मेदार खुद की कमियां स्वीकार करने की बजाय, आईटीआई के पूर्व प्राचार्य को ही कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।
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उनकी दलील है कि यदि निर्माण अधूरा होता तो पूर्व प्राचार्य वर्कशॉप को हैंडओवर नहीं लेते। पूरे मामले को लेकर आईटीआई के प्राचार्य ने कार्यदायी संस्था यूपी सिडको को पत्र लिखा है।
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पत्र के अनुसार, अतिरिक्त कार्यशाला, मशीनिष्ट और टर्नर वर्कशॉप, वेल्डर, इलेक्ट्रिशियन वर्कशॉप में शीट नहीं बदलने, सभी खिड़कियों पर जाली न लगने, फर्श न बनने सहित 25 से अधिक बिंदुओं को गिनाया है। साथ ही बरसात के समय सभी कार्यशाला, टिनशेड और प्रशासनिक भवन में छत से पानी टपकने की बात कही है। बता दें कि आईटीआई चरगांवा के कायाकल्प को लेकर वर्ष 2017-18 में 4.99 करोड़ की धनराशि प्रदेश सरकार की ओर से जारी की गई। कार्य का जिम्मा कार्यदायी संस्था यूपी सिडको को सौंपा। कार्यदायी संस्था ने वर्ष 2022 में कार्य बिना पूरा किए ही हैंडओवर कर दिया।
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इन कार्यों पर उठे सवाल
ट्रस पर प्राइमर नहीं लगाने, ट्रस को नहीं बदलने, सभी खिड़कियों पर जाली नहीं लगाने, वेंटिलेटर न बदलने, फर्श की मरम्मत न होने, वर्कशॉप की दीवारों की मरम्मत और पेंट न होने, केवल टूटे हुए शीशे बदलने, ड्रेनेज का कार्य न होने, पूरी वर्कशॉप का पेंट न होने, रोलिंग शटर न बदलने, चौखट नहीं बदलने, जाली नहीं बदलने सहित अन्य बिंदु।
आईटीआई चरगांवा में मानक के अनुरूप कार्य हुआ है। जब से कार्य चल रहा है दो प्रधानाचार्य बदल गए हैं। तत्कालीन ,प्रधानाचार्य की ओर से कार्यों को देख कर ही हैंड वर्क की प्रक्रिया वर्ष 2022 में पूरी की गई है । वर्तमान, प्रधानाचार्य ने जिन निर्माण कार्यों पर सवाल उठाया है। उसका जवाब उनको भेजा गया है।-सुभाष चंद, अवर अभियंता (रिटेनर) यूपी सिडको
टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर हैंडओवर लिया गया है। अगर, निर्माण कार्य मानक के अनुरूप नहीं है तो उसे कार्यदायी संस्था से कहकर पूरा कराया जाना चाहिए। हैंडओवर के बाद भी व्यवहारिक रूप से कार्य कराया जाता है।-सत्यकान्त, पूर्व प्रधानाचार्य, आईटीआई चरगांवा
कार्यदायी संस्था की ओर से कार्य हैंडओवर होने के बाद भी भवन के रखरखाव या मरम्मत को लेकर धनराशि होती है। कार्य मानक के अनुरूप न होने की वजह से पत्र लिखकर सभी बिंदुओं को गिनाया गया है। मगर, समस्या का हल नहीं निकला है।-शरद चंद सागरबाल, प्रधानाचार्य, आईटीआई चरगांवा
आईटीआई चरगांवा में मानक के अनुरूप कार्य हुआ है। जब से कार्य चल रहा है दो प्रधानाचार्य बदल गए हैं। तत्कालीन ,प्रधानाचार्य की ओर से कार्यों को देख कर ही हैंड वर्क की प्रक्रिया वर्ष 2022 में पूरी की गई है । वर्तमान, प्रधानाचार्य ने जिन निर्माण कार्यों पर सवाल उठाया है। उसका जवाब उनको भेजा गया है।-सुभाष चंद, अवर अभियंता (रिटेनर) यूपी सिडको
टास्क फोर्स की रिपोर्ट पर हैंडओवर लिया गया है। अगर, निर्माण कार्य मानक के अनुरूप नहीं है तो उसे कार्यदायी संस्था से कहकर पूरा कराया जाना चाहिए। हैंडओवर के बाद भी व्यवहारिक रूप से कार्य कराया जाता है।-सत्यकान्त, पूर्व प्रधानाचार्य, आईटीआई चरगांवा
कार्यदायी संस्था की ओर से कार्य हैंडओवर होने के बाद भी भवन के रखरखाव या मरम्मत को लेकर धनराशि होती है। कार्य मानक के अनुरूप न होने की वजह से पत्र लिखकर सभी बिंदुओं को गिनाया गया है। मगर, समस्या का हल नहीं निकला है।-शरद चंद सागरबाल, प्रधानाचार्य, आईटीआई चरगांवा