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गोरखपुर महोत्सव : परलोक की अदालत में हुआ झूठे प्रेम और आत्महत्या का न्याय
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- ‘प्रेमियों की वापसी’ ने दर्शकों को हंसाया और सोचने पर किया मजबूर
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखपुर महोत्सव के तहत नाट्य प्रस्तुतियों की श्रृंखला में रविवार को गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में सांस्कृतिक संगम समिति ने हास्य नाटक ‘प्रेमियों की वापसी’ का मंचन किया। इसका उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ सच्चे प्रेम की परिभाषा को उजागर करना है। इसमें प्रेम को केवल आकर्षण या वासनात्मक समझने वालों की भूल को दर्शाया गया है।
नाटक की शुरुआत ऐसे प्रेमियों से होती है, जो मजबूरी और आकर्षण को सच्चा प्रेम समझते हैं। वे आत्महत्या करके परलोक जाने का निर्णय लेते हैं, ताकि बिना रोक-टोक के एक-दूसरे से विवाह कर सकें। परलोक पहुंचने पर कहानी में मोड़ आता है। नायिका प्रियसी, नायक परमेन्द्र से विवाह करने से इन्कार कर देती है, क्योंकि उसे वहां उसका पुराना प्रेमी मिल जाता है। नायक इस घटना को परलोक की अदालत में प्रस्तुत करता है। परमात्मा फैसला सुनाते हैं कि उनका प्रेम झूठा था। सच्चा प्रेम त्याग और समर्पण का नाम है, जबकि उनके प्रेम में केवल पाने की इच्छा थी।
मूल कहानी सुप्रसिद्ध साहित्यकार हरिशंकर परसाई की है। नाट्य रूपांतरण व निर्देशन राधेश्याम गुप्ता ने किया। कलाकारों में सनी सिंह, शीलम राव, अशोक महर्षि, अनिल गौड़, अनुप्रिया चौहान, प्रो. रंजना, नवनीत कुमार, अमृत आनंद गुप्ता, डिंपल श्रीवास्तव, अखिलेश कसौधन, कुलदीप श्रीवास्तव, शुभम कुमारी आदि ने नाटक को जीवंत कर दिया। संचालन मानवेंद्र त्रिपाठी ने किया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखपुर महोत्सव के तहत नाट्य प्रस्तुतियों की श्रृंखला में रविवार को गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में सांस्कृतिक संगम समिति ने हास्य नाटक ‘प्रेमियों की वापसी’ का मंचन किया। इसका उद्देश्य मनोरंजन के साथ-साथ सच्चे प्रेम की परिभाषा को उजागर करना है। इसमें प्रेम को केवल आकर्षण या वासनात्मक समझने वालों की भूल को दर्शाया गया है।
नाटक की शुरुआत ऐसे प्रेमियों से होती है, जो मजबूरी और आकर्षण को सच्चा प्रेम समझते हैं। वे आत्महत्या करके परलोक जाने का निर्णय लेते हैं, ताकि बिना रोक-टोक के एक-दूसरे से विवाह कर सकें। परलोक पहुंचने पर कहानी में मोड़ आता है। नायिका प्रियसी, नायक परमेन्द्र से विवाह करने से इन्कार कर देती है, क्योंकि उसे वहां उसका पुराना प्रेमी मिल जाता है। नायक इस घटना को परलोक की अदालत में प्रस्तुत करता है। परमात्मा फैसला सुनाते हैं कि उनका प्रेम झूठा था। सच्चा प्रेम त्याग और समर्पण का नाम है, जबकि उनके प्रेम में केवल पाने की इच्छा थी।
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मूल कहानी सुप्रसिद्ध साहित्यकार हरिशंकर परसाई की है। नाट्य रूपांतरण व निर्देशन राधेश्याम गुप्ता ने किया। कलाकारों में सनी सिंह, शीलम राव, अशोक महर्षि, अनिल गौड़, अनुप्रिया चौहान, प्रो. रंजना, नवनीत कुमार, अमृत आनंद गुप्ता, डिंपल श्रीवास्तव, अखिलेश कसौधन, कुलदीप श्रीवास्तव, शुभम कुमारी आदि ने नाटक को जीवंत कर दिया। संचालन मानवेंद्र त्रिपाठी ने किया।
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