यूपी: शिक्षक एमएलसी चुनाव में राजनीतिक दलों की नहीं गली ‘दाल’, भाजपा ने किया किनारा
- 1968 से ही गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र सीट पर शिक्षक संघों के प्रत्याशियों का कब्जा
- शर्मा गुट के पास 30 वर्षों से है सीट, निवर्तमान एमएलसी तीसरी बार चुनाव मैदान में
विस्तार
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में राजनीतिक दलों की ‘दाल’ नहीं गल सकी है। जब से चुनाव हो रहा है, तभी से शिक्षक गुटों को प्रतिनिधित्व मिलता रहा है। मुख्य मुकाबला शर्मा गुट और पांडेय गुट के बीच होता रहा है। हालांकि पिछले चुनाव से समीकरण बदले थे। वित्त विहीन शिक्षकों के प्रत्याशी ने मजबूती से चुनाव लड़ा था।
इस बार भी वित्त विहीन शिक्षकों की भलाई का मुद्दा जोरशोर से उठाया जा रहा है। इस सीट का सियासी समीकरण समझकर ही भाजपा ने चुनाव से दूरी बना ली है। भाजपा ने पहले चुनाव लड़ने का एलान किया था लेकिन अचानक प्रत्याशी न उतरने का फैसला कर चौंका दिया। गोरखपुर सीट से सपा और कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे हैं।
शिक्षक निर्वाचन सीट पिछले 30 वर्षों से शिक्षक संघ शर्मा गुट के पास है। निर्वाचन अधिकारी के पास जो आंकड़े हैं, उसके मुताबिक 2014 का चुनाव दिलचस्प था। शर्मा गुट के प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी और वित्त विहीन शिक्षकों के प्रत्याशी लाल बिहारी यादव के बीच कांटे का मुकाबला हुआ था। प्रथम वरीयता के मतों में लाल बिहारी यादव भारी पड़े थे लेकिन दूसरे वरीयता के मतों से मात खा गए थे। जीत शर्मा गुट के प्रत्याशी को मिली थी। ध्रुव कुमार त्रिपाठी को 9250 तो लाल बिहारी यादव को 8764 मत मिले थे।
लाल बिहारी यादव इस बार वाराणसी क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। गोरखपुर क्षेत्र से वित्त विहीन शिक्षक संघ के पदाधिकारी अजय सिंह चुनाव मैदान में हैं। कुल 16 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। दरअसल, गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव 1968 से कराया जा रहा है। 1980-84 दौर ऐसा था, जब चुनाव नहीं हुआ था।
निर्वाचन अधिकारी के पास उपलब्ध आंकड़ों पर गौर करें तो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव में राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों को जीत नहीं मिल सकी है। इस सीट पर पहले शिक्षक संघ पांडेय गुट का कब्जा था। बाद में शर्मा गुट का कब्जा हो गया। यह सिलसिला जारी है। इस बार एक दिसंबर को मतदान है। तीन दिसंबर को मतगणना होगी। जीत किसकी होगी, यह तो समय बताएगा लेकिन प्रत्याशियों के बीच लड़ाई दिलचस्प है।
इस सीट से अब तक रहे शिक्षक एमएलसी
- आरएन ठकुराई (1968-1974) शिक्षक एमएसआई गोरखपुर व प्रदेश अध्यक्ष उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ
- माया ओझा (1974-1980), शिक्षक मारवाड़ इंटर कॉलेज (पांडेय गुट)
- शिवाकांत ओझा(1984-1990), शिक्षक नेशनल इंटर कॉलेज बड़हलगंज (पांडेय गुट)
- रवींद्र मिश्र (1990-1996), शिक्षक डीएवी इंटर कॉलेज गोरखपुर (शर्मा गुट)
- पंचानन राय (1996-2002), शिक्षक आजमगढ़ (शर्मा गुट)
- पंचानन राय (2002-2007), शिक्षक आजमगढ़ (शर्मा)
- ध्रुव कुमार त्रिपाठी (2008-2014), शिक्षक सिद्धार्थनगर (शर्मा गुट)
- ध्रुव कुमार त्रिपाठी (2014-2020), शिक्षक सिद्धार्थनगर (शर्मा गुट)
एक दिसंबर को मतदान, 40 हजार से ज्यादा मतदाता
शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के एक दिसंबर को होने वाले मतदान की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इस चुनाव में गोरखपुर सहित 17 जिलों के 40 हजार 164 मतदाता मतदान करेंगे। सबसे ज्यादा 6170 मतदाता गोरखपुर में हैं। आजमगढ़ में दूसरे पायदान पर है। आजमगढ़ में 5184 मतदाता हैं। निर्वाचन अधिकारी के मुताबिक 3 दिसंबर को मतगणना कराई जाएगी। सभी जिलों की मतगणना गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में कराई जाएगी।
शिक्षक, जो करेंगे मतदान
यूपी बोर्ड, सीबीएसई और सीआईएससीई से मान्यता प्राप्त सरकारी व गैर सरकारी इंटर कॉलेज, अनुदानित इंटर कॉलेज, मदरसा व संस्कृत विद्यालय, आईटीआई, पॉलीटेक्निक व अन्य मतदाता शिक्षक।
भाजपा एमएलसी ने जारी किया वीडियो संदेश
भाजपा ने आधिकारिक रूप से भले ही चुनाव मैदान में प्रत्याशी नहीं उतारा और किसी को समर्थन नहीं दिया लेकिन पार्टी के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह खुलकर वित्त विहीन शिक्षक संघ के पदाधिकारी और ठकुराई गुट से समर्थित प्रत्याशी अजय सिंह का समर्थन कर रहे हैं। सड़क हादसे में घायल होने वाले एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने अस्पताल से ही मतदाता शिक्षकों के नाम एक वीडियो संदेश भी जारी किया है।
ये प्रत्याशी चुनाव मैदान में
ध्रुव कुमार त्रिपाठी निवर्तमान एमएलसी, अजय सिंह, विभ्राट चन्द कौशिक, अवधेश यादव सपा, नागेंद्र दत्त त्रिपाठी कांग्रेस, देशबंधु शुक्ला, रामजनम सिंह, राम प्रताप राम, रमेश कुमार विमल, अनिल कुमार गौतम, लाल बहादुर यादव, राजीव यादव, अरुण सिंह, नागेंद्र प्रताप सिंह, अनिल कुमार श्रीवास्तव व नरेंद्र सिंह।
ये हैं जिले, जहां होगा मतदान
गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, आजमगढ़, मऊ, अयोध्या, सुल्तानपुर, अमेठी, अंबेडकरनगर, बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती और बलरामपुर।