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Exclusive: गोरखपुर के इंजीनियर ने बनाया चलता फिरता तारामंडल, मोबाइल से चलता है नक्षत्रशाला

Mon, 06 Feb 2023 03:13 PM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
विवेक सिंह, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Mon, 06 Feb 2023 03:13 PM IST
सार

सचिन ने बताया कि मोबाइल नक्षत्रशाला का बेस मॉडल को तैयार करने में तकरीबन चार से पांच लाख रुपये का खर्च आता है। इससे एडवांस नक्षत्रशाला सात से आठ और अत्याधुनिक नक्षत्रशाला की कीमत 15 लाख से प्रारंभ होती है। नक्षत्रशाला को तैयार करने में बाहर ब्लैक आउट फैबरीक और अंदर भी विशेष फैबरीक का इस्तेमाल होता है।

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Gorakhpur engineer made a moving planetarium
मोबाइल नक्षत्रशाला बनाने वाले सचिंद्रनाथ निषाद। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

बाबा गोरखनाथ की धरती पर होनहारों की कमी नहीं है। यहां के युवाओं ने समय-समय पर अपनी प्रतिभा का लोहा राष्ट्रीय फलक पर मनवाया है। आज, हम ऐसे ही इंजीनियर से आपकी मुलाकात कराने जा रहे हैं, जिसने स्टार्टअप के रूप में चलते फिरते तारामंडल(मोबाइल प्लेनेटोरियम) को बनाया है। जहां, रियायती दरों पर विद्यार्थियों को ब्रह्मांड का दर्शन कराया जाता है।

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साथ ही साथ अब नागालैंड, हरियाणा, बिहार, उड़ीसा सहित दूसरे राज्यों में भी संचालित सरकारी और निजी नक्षत्रशालाओं में उपकरण लगाने का कार्य मुफीद दरों पर किया जा रहा है। नकहा नंबर दो, भगवानपुर के रहने वाले सचिंद्रनाथ निषाद ने हाईस्कूल और इंटर की पढ़ाई  कोलकाता से पूरी की है। वहीं, बीटेक (आईटी) आईटीएम गीडा से वर्ष 2007 में उर्त्तीण किया।
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बचपन से ही उन्हें आकाश तारों की दुनिया बेहद रूचिपूर्ण लगती थी। इंजीनियरिंग के बाद पहले दिल्ली स्थित सॉफ्टवेयर कंपनी फिर बैंगलोर में दो वर्षों तक काम किया। मगर, कुछ अलग करने की चाहत में गोरखपुर लौटे और 2016 में गोरखपुर में अपने शौक को पूरा करने के लिए व्रतिनो टेक्नोलॉजी के माध्यम से स्टार्टअप को प्रारंभ किया।
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अपनी टीम के साथ मिलकर मोबाइल प्लेनेटोरियम का अविष्कार किया। शुरुआती अड़चनों के बाद अब उन्हें धीरे धीरे स्कूलों में काम तो मिल ही रहा है। गोरखपुर महोत्सव में भी मोबाइल नक्षत्रशाला आकर्षण का केंद्र रही है। कोरोना काल से पहले की बात करें तो सचिन की संस्था 6-7 लाख रुपये वार्षिक की आमदनी कर रही थी।

कोरोना काल में कोई कार्य नहीं हुआ। इस दौरान संस्था की ओर से देश की नक्षत्रशालाओं से संपर्क कर अपने प्रस्ताव का प्रेजेंटेशन किया गया। इसी का परिणाम है कि हालात सामान्य होने पर वर्तमान वर्ष में तकरीबन 38 लाख रुपये का टर्न ओवर व्रतिनो टेक्नोलॉजी ने किया है।
 

एक बार में 40-50 विद्यार्थी उठा सकते हैं लुत्फ

सचिन ने बताया कि मोबाइल नक्षत्रशाला के बेस मॉडल को तैयार करने में तकरीबन चार से पांच लाख रुपये का खर्च आता है। इससे एडवांस नक्षत्रशाला सात से आठ और अत्याधुनिक नक्षत्रशाला की कीमत 15 लाख से प्रारंभ होती है। नक्षत्रशाला को तैयार करने में बाहर ब्लैक आउट फैबरीक और अंदर भी विशेष फैबरीक का इस्तेमाल होता है। इसके साथ ही ब्लोअर, 360 डिग्री प्रोजेक्शन मशीन सहित अन्य आवश्यक सामग्री की जरूरत पड़ती थी। विद्यार्थियों के लिए न्यूनतम शुल्क 25-30 रुपये प्रति छात्र रखा है।

क्या है मोबाइल नक्षत्रशाला
मोबाइल नक्षत्रशाला एक आसमानी थिएटर है जो मुख्य रूप से खगोल विज्ञान और रात के आकाश के बारे में शैक्षिक और मनोरंजक शो प्रस्तुत करने या आकाशीय नेविगेशन में प्रशिक्षण के लिए बनाया गया है। आकार में छोटा और एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई परेशानी न होने की वजह से इसे विज्ञान के प्रति जागरूक करने के लिए बेहद पसंद किया जा रहा है। सचिन का दावा है कि सरकार की ओर से संचालित नक्षत्रशालाओं में अगर उन्हें उपकरण लगाने का मौका मिले तो वो इसे आधी से कम कीमत में लगा सकते हैं।
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