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यूपी: जिम्मेदार खामोश बैठे रहे, गोरखपुर में बसती रहीं अवैध कॉलोनियां, अब झेल रहे दाग
Wed, 04 Aug 2021 10:59 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Wed, 04 Aug 2021 10:59 AM IST
सार
अवैध निर्माण के मामले में गोरखपुर विकास प्राधिकरण पूरे प्रदेश में दूसरे पायदान पर। शहर के भीतर से बाहर तक अवैध कॉलोनियों का फैला है जाल, 153 जीडीए ने ही चिह्नित की हैं।
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जीडीए द्वारा अवैध कॉलोनी के रूप में चिह्नित जूही एन्क्लेव में मूलभूत सुविधाएं भी नहीं।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की सीमा के भीतर से लेकर बाहर तक फैले अवैध कॉलोनियों के जाल का दाग प्राधिकरण के माथे से चिपक सा गया है। आवास विभाग की समीक्षा में एक बार फिर सर्वाधिक अवैध निर्माण के मामले में प्राधिकरण पूरे प्रदेश में दूसरे पायदान पर है। पहले नंबर पर प्रयागराज, तीसरे पर वाराणसी और लखनऊ चौथे नंबर पर है।
आवासीय और व्यावसायिक इमारतों के निर्माण व कॉलोनियां विकसित करते वक्त ही कार्रवाई करने के बजाए जिम्मेदारों की चुप्पी अवैध निर्माण को बढ़ावा दे रही है। ऐसा नहीं कि क्षेत्र के अवर अभियंताओं को अवैध निर्माण की जानकारी नहीं होती है। आरोप है कि उन्हें पता सब रहता है, मगर वे सक्रिय तब होते हैं, जब निर्माण छत तक पहुंच जाए, इसके पीछे वजह क्या है, सभी जानते हैं।
22 हजार से अधिक मामलों की फाइलें तो ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद भी धूल फांक रही हैं। अवैध कॉलोनियां बसाने वाले भाग जाते हैं और प्लॉट खरीदने वाले या मकान बनाने वाले फंस जाते हैं। गोरखपुर से देवरिया, देवरिया बाईपास, पिपराइच रोड, महराजगंज रोड, सोनौली रोड और गोरखपुर से वाराणसी व लखनऊ मार्ग पर शहर से 20-25 किलोमीटर दूर तक तमाम अवैध कॉलोनियां बस गई हैं। साल भर पहले खुद जीडीए ने ही 153 अवैध कॉलोनियां और उन्हें बसाने वालों को चिह्नित किया था। सितंबर 2020 में इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए रेरा को लिखा गया, मगर नतीजा शून्य।
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आवासीय और व्यावसायिक इमारतों के निर्माण व कॉलोनियां विकसित करते वक्त ही कार्रवाई करने के बजाए जिम्मेदारों की चुप्पी अवैध निर्माण को बढ़ावा दे रही है। ऐसा नहीं कि क्षेत्र के अवर अभियंताओं को अवैध निर्माण की जानकारी नहीं होती है। आरोप है कि उन्हें पता सब रहता है, मगर वे सक्रिय तब होते हैं, जब निर्माण छत तक पहुंच जाए, इसके पीछे वजह क्या है, सभी जानते हैं।
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22 हजार से अधिक मामलों की फाइलें तो ध्वस्तीकरण के आदेश के बाद भी धूल फांक रही हैं। अवैध कॉलोनियां बसाने वाले भाग जाते हैं और प्लॉट खरीदने वाले या मकान बनाने वाले फंस जाते हैं। गोरखपुर से देवरिया, देवरिया बाईपास, पिपराइच रोड, महराजगंज रोड, सोनौली रोड और गोरखपुर से वाराणसी व लखनऊ मार्ग पर शहर से 20-25 किलोमीटर दूर तक तमाम अवैध कॉलोनियां बस गई हैं। साल भर पहले खुद जीडीए ने ही 153 अवैध कॉलोनियां और उन्हें बसाने वालों को चिह्नित किया था। सितंबर 2020 में इनके खिलाफ कार्रवाई के लिए रेरा को लिखा गया, मगर नतीजा शून्य।
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प्लॉट लेने वाले ही नहीं काश्तकार भी फंस रहे, सिस्टम फेल
बड़ी संख्या में रियल एस्टेट कारोबारी काश्तकारों से मौखिक अनुबंध पर प्लॉटिंग कर रहे हैं। जैसे-जैसे प्लॉट बिकता है, काश्तकारों को तय रकम देते हैं। ऐसे में बिना जमीन की रजिस्ट्री कराए या पंजीकृत अनुबंध कराए न तो ले-आउट पास हो सकता और न रेरा में पंजीकरण। 153 अवैध कॉलोनियों चिह्नित करने के बावजूद जीडीए इस पर कोई कार्रवाई रेरा से भी नहीं करा पाया। नतीजतन इन कॉलोनियों को बसाने वाले धड़ल्ले से प्लॉट बेच रहे हैं। रियल एस्टेट कारोबार की मनमानी पर शिकंजा कसने के लिए रेरा का गठन तो हो गया, मगर निगरानी की सुचारू व्यवस्था नहीं हो पाई। यही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में ले-आउट स्वीकृत करने के लिए कोई नियम नहीं बन पाया।
लंबे समय से जिला पंचायत में प्रस्ताव लंबित है। सिस्टम में यह छेद अवैध कॉलोनियों के कारोबार को और बढ़ावा दे रहा है। प्राधिकरण क्षेत्र के बाहर प्लॉटिंग कर कॉलोनी बसा रहे कॉलोनाइजर्स अपने बचाव में तर्क देते हैं कि जब ले-आउट ही नहीं पास हो पा रहा है तो वे रेरा में पंजीकरण कैसे कराएं? मानें तो बात सही भी है। जिला पंचायत के अफसरों के मुताबिक ले-आउट स्वीकृत करने संबंधी उपविधि अभी बन नहीं पाई है। प्रस्ताव विचाराधीन है। प्रयास किया जा रहा है कि इसे स्वीकृत कराया जा सके।
यह हो सकती है कार्रवाई
अवैध कालोनियां बसाने वाले कालोनाइजर पर रेरा परियोजना की कुल लागत (जमीन की कीमत व विकास पर खर्च) का 10 फीसदी जुर्माना लगा सकता है। इसके अतिरिक्त तीन साल की जेल भी हो सकती है।
लंबे समय से जिला पंचायत में प्रस्ताव लंबित है। सिस्टम में यह छेद अवैध कॉलोनियों के कारोबार को और बढ़ावा दे रहा है। प्राधिकरण क्षेत्र के बाहर प्लॉटिंग कर कॉलोनी बसा रहे कॉलोनाइजर्स अपने बचाव में तर्क देते हैं कि जब ले-आउट ही नहीं पास हो पा रहा है तो वे रेरा में पंजीकरण कैसे कराएं? मानें तो बात सही भी है। जिला पंचायत के अफसरों के मुताबिक ले-आउट स्वीकृत करने संबंधी उपविधि अभी बन नहीं पाई है। प्रस्ताव विचाराधीन है। प्रयास किया जा रहा है कि इसे स्वीकृत कराया जा सके।
यह हो सकती है कार्रवाई
अवैध कालोनियां बसाने वाले कालोनाइजर पर रेरा परियोजना की कुल लागत (जमीन की कीमत व विकास पर खर्च) का 10 फीसदी जुर्माना लगा सकता है। इसके अतिरिक्त तीन साल की जेल भी हो सकती है।
जीडीए द्वारा चिह्नित अवैध कॉलोनियां
जोन 1(क)- आदित्यपुरम-तरहवा, शेख बहादुर अली शाह मोहरीपुर, उमापुरी बरगदवा, बजरंग कालोनी बरगदवां, संकट मोचन नगर माधोपुर, मनमोहन माधोपुर बंधे के पास, ग्रीन सिटी-2, विनायक नगर नथमलपुर, हरीकृष्ण नगर टैगोर टाउन के पास, टैगोर टाउन, लच्छीपुर दस नंबर बोरिंग के पास, द्वारिकापुरी बरगदवां, गणेशपुरम प्रथम व द्वितीय।
जोन 1(ख)- गायत्रीपुरम द्वितीय नकहा नकहा नंबर एक, चमनगंज नकहा नंबर एक, राजीव नगर बशारतपुर, चन्द्रगुप्त नगर बशारतपुर, हरिद्वारपुरम बशारतपुर, हरिद्वारपुरम द्वितीय, चंद्र विहार कालोनी, कृष्णानगर प्राइवेट कालोनी, प्रोफेसर कालोनी रामजानकी नगर, कौशलपुरम रामजानकी नगर, हरिहरपुरम, इंद्रप्रस्थ कालोनी, करीमनगर, मिलियम सिटी द्वितीय, शिवाजी नगरजोन 2(क)- शक्तिनगर बशारतपुर पूर्वी, महादेवपुरम, सुशांत सिटी जंगल धूसड़, गांधी नगर हरिसेवक पुर, सुभाषिनी नगर, जंगल धूसड़, बशारतपुर, हनुमंत नगर, लतीफ नगर, महावीरपुरम, पवनपुरम, रेल विहार/साईधाम कालोनी हरसेवकपुर, हैदरगंज, कमलानगर सेमरा नंबर एक, पार्वतीपुरम, नारायण नगरी, लक्ष्मीनगर, मायानगरी, तारानगरी, द्वारिकापुरम सेमरा, स्नेह सिटी सेमरा
जोन 2(ख)- ईस्टनपुर कालोनी, आर्यापुरम, विवेकानंदपुरी, श्रीराम नगर कालोनी, गायत्रीनगर लालगंज, मौर्या टोला, नंदानगर दरगहिया, सैनिक कुंज, सैनिक विहार विस्तार, काशीपुरम, आदर्श नगर, राहुल नगर अकोलवा, पवन विहार, बेनाम कालोनी, मैत्रीपुरम कालोनी, सरस्वतीपुरम, नारायण पुरम, जंगल हकीम नंबर दो, विश्वनाथपुरम, सैनिक विहार, पवन विहार, आकाश विहार गेट, नंदानगर, मुक्तेश्वर नगर सिंहासनपुर, तुलसीपुरम, काशीपुरम, सर्वोदय नगर, खुद्दी टोला, झरना टोला, गायत्रीनगर, राहुल नगर, विवेक नगर, मोहम्मद नगर कालोनी, आमिना नगर, मीरापुरम कालोनी, जानकीपुरम
जोन 3(क)- बहादुर शाह जफर कालोनी बहरामपुर, माईधिया इलाहीबाग, सुमेर सागर,
जोन 3(ख)- मुंडेरी चक, मुंडेरी चक दो, चकरा अब्वलजोन 4(क)- स्वर्ण सिटी, स्वर्ण सिटी दो, कबीरनगर, कबीर नगर दो, मजिठिया श्रवण नगर, मजिठिया श्रवण नगर दो, तीन, चार, पांच व छह, जंगल सिकरी खोराबार, जंगल सिकरी दो व तीन, वंश राजपुरम, दो व तीन, जंगल सिकरी खोराबार एक कव दो, रानीडिहा, दो व तीन, आरके पुरम, दो व तीन।
जोन 4(ख)- विवेकपुरम कालोनी, प्रयागपुरम कालोनी, पथरा कालोनी, महुईसुधरपुर, सिद्धार्थनगर, पार्वतीपुरम, साउथ बेतियाहाता, महेवा, शक्तिनगर, साकेत नगर, राजीव नगर, अश्वमेध नगर, बुद्ध विहार, चिलमापुर, न्यू शिवपुरी कालोनी, शिवाजी नगर,
जोन 4(ग)- गोकुल नगरी रामपुर उर्फ चकरी, गोरखधाम रामपुर चकरी, डिभिया महादेव झारखंडी टुकड़ा नगर एक, मून इन्फ्रासीट रामपुर उर्फ चकरी, शैलम सिटी, शिव नगरी जंगल सिकरी खोराबार, राधे गोविंद सिटी, सिक्टौर जूही इन्क्लेव, राम अवध नगर जंगल सिकरी, अल्कापुरी सिक्टौर, मालवीयी नगर कौशलपुर, अभिषेक नर्ग, गोरक्षपुरम, भरवलिया।
जोन 1(ख)- गायत्रीपुरम द्वितीय नकहा नकहा नंबर एक, चमनगंज नकहा नंबर एक, राजीव नगर बशारतपुर, चन्द्रगुप्त नगर बशारतपुर, हरिद्वारपुरम बशारतपुर, हरिद्वारपुरम द्वितीय, चंद्र विहार कालोनी, कृष्णानगर प्राइवेट कालोनी, प्रोफेसर कालोनी रामजानकी नगर, कौशलपुरम रामजानकी नगर, हरिहरपुरम, इंद्रप्रस्थ कालोनी, करीमनगर, मिलियम सिटी द्वितीय, शिवाजी नगरजोन 2(क)- शक्तिनगर बशारतपुर पूर्वी, महादेवपुरम, सुशांत सिटी जंगल धूसड़, गांधी नगर हरिसेवक पुर, सुभाषिनी नगर, जंगल धूसड़, बशारतपुर, हनुमंत नगर, लतीफ नगर, महावीरपुरम, पवनपुरम, रेल विहार/साईधाम कालोनी हरसेवकपुर, हैदरगंज, कमलानगर सेमरा नंबर एक, पार्वतीपुरम, नारायण नगरी, लक्ष्मीनगर, मायानगरी, तारानगरी, द्वारिकापुरम सेमरा, स्नेह सिटी सेमरा
जोन 2(ख)- ईस्टनपुर कालोनी, आर्यापुरम, विवेकानंदपुरी, श्रीराम नगर कालोनी, गायत्रीनगर लालगंज, मौर्या टोला, नंदानगर दरगहिया, सैनिक कुंज, सैनिक विहार विस्तार, काशीपुरम, आदर्श नगर, राहुल नगर अकोलवा, पवन विहार, बेनाम कालोनी, मैत्रीपुरम कालोनी, सरस्वतीपुरम, नारायण पुरम, जंगल हकीम नंबर दो, विश्वनाथपुरम, सैनिक विहार, पवन विहार, आकाश विहार गेट, नंदानगर, मुक्तेश्वर नगर सिंहासनपुर, तुलसीपुरम, काशीपुरम, सर्वोदय नगर, खुद्दी टोला, झरना टोला, गायत्रीनगर, राहुल नगर, विवेक नगर, मोहम्मद नगर कालोनी, आमिना नगर, मीरापुरम कालोनी, जानकीपुरम
जोन 3(क)- बहादुर शाह जफर कालोनी बहरामपुर, माईधिया इलाहीबाग, सुमेर सागर,
जोन 3(ख)- मुंडेरी चक, मुंडेरी चक दो, चकरा अब्वलजोन 4(क)- स्वर्ण सिटी, स्वर्ण सिटी दो, कबीरनगर, कबीर नगर दो, मजिठिया श्रवण नगर, मजिठिया श्रवण नगर दो, तीन, चार, पांच व छह, जंगल सिकरी खोराबार, जंगल सिकरी दो व तीन, वंश राजपुरम, दो व तीन, जंगल सिकरी खोराबार एक कव दो, रानीडिहा, दो व तीन, आरके पुरम, दो व तीन।
जोन 4(ख)- विवेकपुरम कालोनी, प्रयागपुरम कालोनी, पथरा कालोनी, महुईसुधरपुर, सिद्धार्थनगर, पार्वतीपुरम, साउथ बेतियाहाता, महेवा, शक्तिनगर, साकेत नगर, राजीव नगर, अश्वमेध नगर, बुद्ध विहार, चिलमापुर, न्यू शिवपुरी कालोनी, शिवाजी नगर,
जोन 4(ग)- गोकुल नगरी रामपुर उर्फ चकरी, गोरखधाम रामपुर चकरी, डिभिया महादेव झारखंडी टुकड़ा नगर एक, मून इन्फ्रासीट रामपुर उर्फ चकरी, शैलम सिटी, शिव नगरी जंगल सिकरी खोराबार, राधे गोविंद सिटी, सिक्टौर जूही इन्क्लेव, राम अवध नगर जंगल सिकरी, अल्कापुरी सिक्टौर, मालवीयी नगर कौशलपुर, अभिषेक नर्ग, गोरक्षपुरम, भरवलिया।
सहारा इस्टेट परिसर में अवैध निर्माण की भरमार
देवरिया बाईपास रोड स्थित सहारा इस्टेट परिसर का ले-आउट जीडीए से पास है, फिर भी अवैध निर्माण की भरमार है। कामन एरिया में निर्माण करा लिया गया है। सबसे ज्यादा कब्जा मल्हार आवासीय सेक्टर में है। गांधार व वृंदावनी कॉलोनी में भी अवैध निर्माण कराए गए हैं। यमन व बहार में भूतल के मकान बनाए गए थे। सहारा कंपनी ने जो नक्शा पास कराया था, उसके विपरीत दो या तीन मंजिल के मकान बना दिए गए हैं। इस पर सहारा इस्टेट आवासीय कल्याणकारी समिति के पदाधिकारियों ने नाराजगी जताई है। पदाधिकारियों का कहना है कि अभियान चलाकर अवैध निर्माण हटाया जाना चाहिए। मामले की जानकारी जल्द जीडीए उपाध्यक्ष को दी जाएगी।
आम आदमी नहीं होगा परेशान, पहले अपनी कमी सुधारेंगे, फिर करेंगे सख्ती: प्रेम रंजन
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा प्राधिकरण में पदभार ग्रहण करने के बाद उनके पास भी अवैध निर्माण के बारे में कई शिकायतें आई हैं। अवैध निर्माण पर लगाम लगाने और उसे नियमित करने के लिए प्राधिकरण विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगा। प्रयास होगा कि आम आदमी परेशान न हो। पूर्व में जिम्मेदारों की लापरवाही से हुई चूक की वजह से कई अवैध कॉलोनियों में जानकारी के अभाव में आम आदमी ने मकान बनवा लिए। योजना के तहत प्राधिकरण, एक-एक मोहल्ले का रोस्टर के मुताबिक सर्वे कराएगा। पहले यह जांचा जाएगा कि किसी का मानचित्र जीडीए में लंबित तो नहीं है। उसे स्वीकृत कराने के साथ ही बाकी निर्माण को वैध कराने का प्रयास होगा। इससे आम आदमी परेशान नहीं होगा और जीडीए की आय भी बढ़ेगी। भू-उपयोग आवासीय नहीं होने की वजह से भी कई कॉलोनियां अवैध की श्रेणी में हैं। महायोजना में भू-उपयोग बदलवाने का प्रयास किया जाएगा। सभी अवर अभियंताओं को चेतावनी दी गई है कि यदि उनके क्षेत्र में चालानी रिपोर्ट के बाद भी निर्माण होता मिला तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नींव पड़ने के समय ही अवैध निर्माण रोका नहीं गया तो भी अवर अभियंता जिम्मेदार होंगे।
आम आदमी नहीं होगा परेशान, पहले अपनी कमी सुधारेंगे, फिर करेंगे सख्ती: प्रेम रंजन
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा प्राधिकरण में पदभार ग्रहण करने के बाद उनके पास भी अवैध निर्माण के बारे में कई शिकायतें आई हैं। अवैध निर्माण पर लगाम लगाने और उसे नियमित करने के लिए प्राधिकरण विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेगा। प्रयास होगा कि आम आदमी परेशान न हो। पूर्व में जिम्मेदारों की लापरवाही से हुई चूक की वजह से कई अवैध कॉलोनियों में जानकारी के अभाव में आम आदमी ने मकान बनवा लिए। योजना के तहत प्राधिकरण, एक-एक मोहल्ले का रोस्टर के मुताबिक सर्वे कराएगा। पहले यह जांचा जाएगा कि किसी का मानचित्र जीडीए में लंबित तो नहीं है। उसे स्वीकृत कराने के साथ ही बाकी निर्माण को वैध कराने का प्रयास होगा। इससे आम आदमी परेशान नहीं होगा और जीडीए की आय भी बढ़ेगी। भू-उपयोग आवासीय नहीं होने की वजह से भी कई कॉलोनियां अवैध की श्रेणी में हैं। महायोजना में भू-उपयोग बदलवाने का प्रयास किया जाएगा। सभी अवर अभियंताओं को चेतावनी दी गई है कि यदि उनके क्षेत्र में चालानी रिपोर्ट के बाद भी निर्माण होता मिला तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। नींव पड़ने के समय ही अवैध निर्माण रोका नहीं गया तो भी अवर अभियंता जिम्मेदार होंगे।