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UP: प्रसिद्ध समाजसेवी बालकृष्ण सराफ का निधन, श्रीराम मंदिर आंदोलन में निभाई थी बड़ी भूमिका

Sat, 04 Jul 2026 04:26 PM IST
Rohit Singh अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: Rohit Singh Updated Sat, 04 Jul 2026 04:26 PM IST
सार

शनिवार को दिवंगत हुए वरिष्ठ उद्योगपति, समाजसेवी और आभूषण व्यवसायी बालकृष्ण सराफ उस समय विश्व हिंदू परिषद (तत्कालीन काशी प्रांत) के गोरखपुर विभाग के अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1992 में कारसेवकों की सहायता करने के आरोप में पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची। अधिकारियों ने माफीनामे पर हस्ताक्षर करने पर रिहाई की बात कही, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए माफी से इनकार कर दिया कि 'श्रीराम का काम करके माफी मांगने से अच्छा गिरफ्तार होना है, हम अपने श्रीरामलला के लिए लड़ रहे हैं, कोई अपराध नहीं कर रहे'।

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Gorakhpur Balakrishna Sarraf Passed Away Golghar Businessman Ram Mandir Andolan
मृतक बाल कृष्ण सराफ( फाइल फोटो) - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

शहर के वरिष्ठ समाजसेवी, सराफा कारोबारी व ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स के निदेशक बाल कृष्ण सराफ का शनिवार को गांधी गली स्थित उनके निज आवास पर दोपहर 2:30 बजे निधन हो गया। वह 97 वर्ष के थे। उनके निधन की सूचना से परिवार, शुभचिंतकों और समाज में शोक की लहर है।

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उनके पुत्र अतुल सराफ व अनूप सराफ ने बताया कि उनकी उम्र 97 वर्ष थी। शुक्रवार को थोड़ी तबीयत बिगड़ी थी, जिसके बाद उनका निजी अस्पताल ले जाया गया था उसके बाद उपचार के बाद उन्हें आवास पर ले आया गया।

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इसके बाद शनिवार दोपहर 2:30 बजे निज आवास पर उन्होंने अंतिम सांस ली। अनूप सराफ ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार रविवार सुबह नौ बजे राजघाट पर किया जाएगा। इसके पहले आवाज पर पार्थिव शरीर को लोग श्रद्धांजलि देंगे।

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बालकृष्ण सराफ शहर के जाने-माने व्यवसायी होने के साथ-साथ समाजसेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय थे। उन्होंने गरीबों की मदद, धार्मिक और सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बालकृष्ण सराफ ने श्रीराम मंदिर आंदोलन में बड़ी भूमिका निभाई थी। आंदोलन के दौरान उन्होंने तन-मन-धन से सहयोग किया और समाज को एकजुट करने का काम किया।

शनिवार को दिवंगत हुए वरिष्ठ उद्योगपति, समाजसेवी और आभूषण व्यवसायी बालकृष्ण सराफ का जीवन केवल व्यापार और सामाजिक सेवा तक सीमित नहीं था। पूर्वांचल में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और आंदोलन के प्रमुख सहयोगियों में गिने गए।
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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 1990 से 1992 के बीच, जब श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े लोग प्रशासन की निगरानी में थे, उस समय बालकृष्ण सराफ कारसेवकों के सहयोग और आंदोलन के संचालन में सक्रिय रहे। उन्होंने अपने घर और कार्यालय को आंदोलन की गोपनीय बैठकों का केंद्र बनाया तथा कारसेवकों के भोजन, आवास और परिवहन जैसी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी निभाई।

आंदोलन के दौरान अशोक सिंघल, गिरिराज किशोर, विष्णुहरि डालमिया, साध्वी ऋतंभरा, विनय कटियार, प्रवीण तोगड़िया और राजेन्द्र सिंह पंकज सहित कई प्रमुख नेताओं का उनके आवास पर आना-जाना रहा।

बालकृष्ण सराफ उस समय विश्व हिंदू परिषद (तत्कालीन काशी प्रांत) के गोरखपुर विभाग के अध्यक्ष भी रहे। वर्ष 1992 में कारसेवकों की सहायता करने के आरोप में पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने पहुंची। अधिकारियों ने माफीनामे पर हस्ताक्षर करने पर रिहाई की बात कही, लेकिन उन्होंने यह कहते हुए माफी से इनकार कर दिया कि "श्रीराम का काम करके माफी मांगने से अच्छा गिरफ्तार होना है।

 हम अपने श्रीरामलला के लिए लड़ रहे हैं, कोई अपराध नहीं कर रहे।" बाद में पर्याप्त साक्ष्य न मिलने पर उन्हें रिहा कर दिया गया। बालकृष्ण सराफ अपने योगदान का श्रेय अपनी पत्नी प्रकाशी देवी सराफ को भी देते थे।

उनका कहना था कि  कारसेवकों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था में उनकी पत्नी हमेशा सबसे आगे रहती थीं। वर्ष 2005 में उनकी पत्नी के निधन के बाद भी वे उनके योगदान को भावुक होकर याद करते रहे।

श्रीराम मंदिर निर्माण का सपना साकार होने पर भी वे अत्यंत भावुक थे। चंपत राय ने स्वयं उन्हें अयोध्या आने का निमंत्रण दिया था। उन्होंने भीड़ कम होने के बाद दर्शन करने की इच्छा जताई थी और कहा था कि अब श्रीरामलला अपने भव्य मंदिर में प्रतिष्ठित हो चुके हैं, यह उनके जीवन का सबसे सुखद क्षण रहा।

गोरखपुर के प्रतिष्ठित आभूषण उद्योग को नई पहचान देने वाले बाल कृष्ण सराफ
वरिष्ठ उद्योगपति एवं समाजसेवी स्वर्गीय बाल कृष्ण सराफ ने पूर्वांचल के आभूषण कारोबार को नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स (पूर्व नाम हरि प्रसाद गोपी कृष्ण सराफ) के संस्थापक एवं मार्गदर्शक थे।

उन्होंने अपने बड़े भाई स्वर्गीय गोपी कृष्ण सराफ के साथ वर्ष 1940 में गोरखपुर के हिंदी बाजार स्थित लगभग 100 वर्गफुट की एक छोटी दुकान से जरी-गोटा के व्यापार की शुरुआत की। बाद में चांदी और फिर सोने के आभूषणों का कारोबार शुरू किया, जो समय के साथ पूर्वांचल की प्रमुख आभूषण श्रृंखला के रूप में स्थापित हुआ।

बाल कृष्ण सराफ ने व्यवसाय में गुणवत्ता, पारदर्शिता और ग्राहक विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी, जिससे प्रतिष्ठान को व्यापक पहचान मिली। उनके पुत्र अतुल सराफ और अनूप सराफ ने इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए ब्रांड को ऐश्प्रा जेम्स एंड ज्वेल्स के रूप में विकसित किया।

आज यह प्रतिष्ठित आभूषण समूह उत्तर प्रदेश के कई शहरों में अपने शोरूम के माध्यम से ग्राहकों को सेवाएं प्रदान कर रहा है। शोकाकुल परिवार में पुत्र अतुल सराफ, अनूप सराफ तथा पौत्र वैभव, सौमित्र और शांतनु सराफ सहित समस्त सराफ परिवार शामिल हैं।

 
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