यूपी: चीन की गतिविधियों पर अंकुश था गोरखपुर आकाशवाणी केंद्र, 49 साल पहले ऐसे स्थापित हुआ था शक्तिशाली प्रसारण केंद्र
नेपाल में चीन की सांस्कृतिक और रणनीतिक गतिविधियों को रोकने के मद्देनजर 1972 में स्थापित किया गया था अति शक्तिशाली प्रसारण केंद्र, पूरे नेपाल तक गोरखपुर आकाशवाणी के प्रसारण की थी पहुंच।
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गोरखपुर आकाशवाणी केंद्र प्रदेश का पहला 100 किलोवाट ट्रांसमिशन क्षमता वाला केंद्र बना था। 1972 में जब प्रदेश के अन्य जिलों में दस किलोवाट क्षमता के ट्रांसमिशन केंद्र थे तब सरकार ने यहां इतना शक्तिशाली केंद्र इसलिए स्थापित किया था कि पड़ोसी देश नेपाल में चीन की गतिविधियों का प्रतिकार किया जा सके। नेपाल में भारतीय संस्कृति का प्रसार किया जा सके। आकाशवाणी गोरखपुर के पूर्व उद्घोषक सर्वेश दुबे ने यह जानकारी दी।
सर्वेश दुबे कहते हैं कि 1971 में भारत के सहयोग से बांग्लादेश आजाद हुआ। इस घटना से भारत एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में उभरा। भारत की बढ़ती शक्ति को देखते हुए चीन ने नेपाल में अपनी पैठ बनाने का प्रयास किया। नेपाल को चीन के प्रोपेगंडा से बचाने और भारत के साथ बेहतर सांस्कृतिक-रणनीतिक संबंध विकसित करने के उद्देश्य से 1972 में गोरखपुर में 100 किलोवाट ट्रांसमिशन क्षमता का केंद्र स्थापित किया गया था। तब गोरखपुर इतना विकसित भी नहीं था।
शक्तिशाली ट्रांसमिशन के कारण यहां से प्रसारित किए गए कार्यक्रम पूरे नेपाल में रेडियो पर सुने जाते थे। यहां से दोपहर साढ़े बारह बजे से आधे घंटे का नेपाली भाषा का कार्यक्रम भी प्रसारित किया जाता रहा है। वर्तमान में ट्रांसमिशन क्षमता दस किलोवाट कर दी गई है। नेपाली भाषा के कार्यक्रम तो अब भी प्रसारित किए जाते हैं लेकिन क्षमता घटने से अब पहुंच काफी कम हो गई है।
सिद्धार्थनगर-महराजगंज में एफएम स्टेशन खोलने की तैयारी
आकाशवाणी कलाकार सनीशा श्रीवास्तव बताती हैं कि सेना की ही तरह आकाशवाणी और दूरदर्शन भी इमरजेंसी सेवाओं शामिल हैं। विपरीत हालात में भी दूरदर्शन और आकाशवाणी का प्रसारण बंद नहीं होता। सीमावर्ती रेडियो स्टेशन का महत्व इसलिए ज्यादा होता है कि यह संचारतंत्र के रूप में काम करते हैं। इस नजरिए से गोरखपुर का केंद्र महत्वपूर्ण है।
सर्वेश दुबे कहते हैं कि गोरखुपर से सौ किलोवाट मीडियम वेव ट्रांसमिशन बंद कर एफएम प्रसारण शुरू किया गया है। इसकी पहुंच नेपाल तक नहीं है। इसके लिए सिद्धार्थनगर और महराजगंज जिलों में भी एफएम ट्रांसमिशन स्टेशन खोलने की तैयारी चल रही है। एफएम ट्रांसमिशन की पहुंच 50 से 60 किलोमीटर परिधि तक होती है। पहाड़ आदि होने पर प्रसारण का क्षेत्र घट जाता है।