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UP: गोरखपुर एम्स में अवसाद में भी 'मुस्कुराता सुन्न'- शांत हो चुका युवक अब हकीकत में खिलखिलाएगा

Thu, 25 Apr 2024 10:24 AM IST
रोहित सिंह रोहित सिंह, गोरखपुर
रोहित सिंह, गोरखपुर Published by: रोहित सिंह Updated Thu, 25 Apr 2024 10:24 AM IST
सार

वह अवसाद में था, मगर चेहरे पर मुस्कान थी। शरीर पूरी तरह सुन्न-शांत हो चुका था और बड़े से बड़ा दर्द उसे महसूस ही नहीं होता था। अलग-अलग किरदार में वह खुद को पेश करके अजीब सी हरकतें करने लगा था। परिवार ने मान लिया था कि अब उनका जवान बेटा शरीर में दर्द लिए अवसाद की हालत में ही किसी दिन पूरी तरह शांत हो जाएगा।

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Gorakhpur AIIMS has cured the first nitrous oxide patient in the country
गोरखपुर एम्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

वह अवसाद में था, मगर चेहरे पर मुस्कान थी। शरीर पूरी तरह सुन्न-शांत हो चुका था और बड़े से बड़ा दर्द उसे महसूस ही नहीं होता था। अलग-अलग किरदार में वह खुद को पेश करके अजीब सी हरकतें करने लगा था। परिवार ने मान लिया था कि अब उनका जवान बेटा शरीर में दर्द लिए अवसाद की हालत में ही किसी दिन पूरी तरह शांत हो जाएगा।

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एम्स के काबिल डाक्टरों ने इसे चुनौती मानकर इलाज में पूरी ताकत झोंकी और युवक को उबारने में सफल भी हो गए। उनका दावा है कि अब अवसाद में बनावटी नहीं, असली मुस्कुराहट नजर आएगी। वह असलियत में खिलखिलाएगा भी।      
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सेहत के लिए बेहद खतरनाक नाइट्रस ऑक्साइड के नशे के आदी एक मरीज को एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों ने इलाज कर ठीक किया गया है। एम्स प्रशासन का दावा है कि देश में इस नशे का आदी यह पहला मरीज है जिसे ठीक किया गया है।
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डॉक्टरों ने उसे डिस्चार्ज भी कर दिया है। सामान्य बीमारी के उपचार के लिए मरीज के परिजन उसे एम्स लाए थे, लेकिन जांच की गई तो पता लगा कि ये नशे की बीमारी तो है, लेकिन एकदम नए तरीके की। बीमारी के लक्षणों की जांच में नाइट्रस नशे की पुष्टि हुई है। एक सप्ताह के उपचार करने के बाद उसके परीक्षण में सामान्य अवस्था दर्शाए जाने के आधार पर अभिभावकों को कुछ जानकारी के साथ डिस्चार्ज कर दिया।

एम्स प्रबंधन ने देश के सबसे बड़े संस्थान दिल्ली एम्स के राष्ट्रीय औषध निर्भरता उपचार केंद्र( एनडीडीटीसी) में इस मरीज को लेकर मेडिकल हिस्ट्री की जांच करवाई। संस्थान में इस मरीज से पहले ऐसे किसी नाइट्रस ऑक्साइड के मरीज की ट्रैवल हिस्ट्री, मेडिकल हिस्ट्री दर्ज नहीं थी।

ऐसे में इस मरीज को देश का पहले नाइट्रस ऑक्साइड के नशे का मरीज मानते हुए उसके सफल उपचार की पूरी हिस्ट्री गोरखपुर एम्स तैयार कर रहा है। इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रबंधन रखेगा।

एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर( एडिक्शन) डॉ सामंत सिंह ने बताया कि एक 27 वर्ष के मरीज को लेकर परिजन एम्स आए थे। उन्होंने बताया कि उनका बेटा खुद को अलग-अलग किरदार के साथ पेश करता है। अजीब सी हरकत करने लगता है। बिना बात के हंसते हुए तो कभी घंटों घर में गुमसुम रहता है। पूरी-पूरी रात सोता नहीं है। हावभाव से लगता है कि जैसे डिप्रेशन में जा रहा, लेकिन चेहरे पर हंसी दिखती रहती।

डॉक्टर ने मरीज के लक्षण को लेकर एसोसिएट प्रोफेसर डॉ रिचा त्रिपाठी से चर्चा की। साफ हुआ कि ये लक्षण लाफिंग गैस ( नाइट्रस) के होते हैं। लेकिन, ये नशे के रूप में भारत में नहीं मिलता। इसका उपयोग दंत चिकित्सक दांतों की सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया के रूप में करते हैं।

इससे दांतों का दर्द खत्म हो जाता है। इसी आधार पर जब मरीज से उसके लक्षण और उसके ट्रैवेल हिस्ट्री की जांच की गई तो पता चला कि ये कुछ दिनों पहले ही थाईलैंड से वापस गोरखपुर आया है। हालांकि, वहां भी ये नशा प्रतिबंधित है और युवक बार या अन्य स्थानों पर इसे अपनी सुविधा के हिसाब से लेता था।

युवक का एक सप्ताह तक इलाज किया गया। स्वास्थ्य होने के बाद परिजनों को कुछ बातों की जानकारी देते हुए 15 दिनों बाद वापस लाने के लिए एम्स प्रबंधन ने कहा है। नाइट्रस नशे के मरीज का यूं मिलना और एम्स में उसे बेहतर उपचार करते हुए ठीक करना ये एम्स के लिए भी अपनी एक उपलब्धि है।

एम्स गोरखपुर में एडिक्सन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ सामंत सिंह ने बताया कि एम्स गोरखपुर की तरफ से जांच में अभी तक ये पहला मरीज सामने आया है। इसका उपचार एम्स की तरफ से करते हुए उसे स्वस्थ किया गया है। डॉ रिचा त्रिपाठी के निर्देशन में एक सप्ताह तक इलाज चला।


ठीक होने के दौरान ही हमारी तरफ से दिल्ली एम्स के एनडीडीटीसी में इस बीमारी के मरीज के संबंध में जानकारी ली गई। इस मरीज से पहले ऐसे किसी मरीज का रिकॉर्ड वहां भी नहीं था। एनडीडीटीसी देश का सबसे बड़ा संस्थान है। अब इस पूरी रिपोर्ट को तैयार कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रखा जाएगा।
 

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