आरटीईः 300 प्राइवेट स्कूलों की शुल्क प्रतिपूर्ति पर संकट, जानिए क्या है बड़ी वजह
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शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत पोर्टल पर पंजीकरण कराने से गोरखपुर जिले के 300 प्राइवेट स्कूल कतरा रहे हैं। शासन की ओर से पंजीकरण की तय की हुई समय सीमा 15 जनवरी को खत्म होना है, मगर अब तक महज 58 स्कूल प्रबंधन ने ही पंजीकरण में रुचि दिखाई है। पंजीकरण नहीं कराने वाले विद्यालयों को इस वर्ष शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ नहीं मिलेगा।
बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा कई बार स्कूल प्रबंधनों को पोर्टल पर पंजीकरण कराने के लिए सूचना भेजी जा चुकी है। मगर इसका कोई खास असर नजर नहीं आ रहा है। आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर अभिभावकों के बच्चों को प्रवेश दिया जाता है। प्रत्येक वर्ष ऑनलाइन आवेदन के माध्यम से दो से तीन चरणों में प्रक्रिया को पूरा किया जाता है।
बकायदा लॉटरी के माध्यम से आवेदन करने वाले बच्चे को स्कूल आवंटित किया है। जहां बच्चे का प्रवेश पूरी तरह से निशुल्क होता है। फीस की प्रतिपूर्ति शासन की ओर से स्कूल प्रबंधन को की जाती है। वहीं कॉपी और किताब के मद में पांच हजार रुपये सीधे अभिभावक के खाते में भेजे जाते हैं।
पुरानी व्यवस्था के मुताबिक फीस प्रतिपूर्ति मिलने में काफी समय लग रहा था। जिसे देखते हुए शासन ने सभी स्कूलों को ऑनलाइन आरटीई पोर्टल से जोड़ने का मन बनाया है। इससे जहां फीस प्रतिपूर्ति मिलने में स्कूल प्रबंधन को आसानी होगी। वहीं प्रत्येक स्कूल में आरटीई की कितनी सीटें मौजूद हैं, इसका आंकड़ा भी सरकार के पास मौजूद रहेगा। किसी भी समस्या के लिए स्कूल प्रबंधन विभागीय मेल आईडी nsagkp2008@gmail.com पर संपर्क कर सकते हैं।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी बीएन सिंह ने बताया कि आरटीई के तहत प्रवेश लेने वाले प्राइवेट स्कूल प्रबंधन को शुल्क प्रतिपूर्ति के भुगतान के लिए पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है। शासन ने 15 जनवरी की आखिरी समय सीमा निर्धारित की है। अब तक 58 स्कूलों ने जानकरी दी है। शेष सभी स्कूल प्रबंधनों से तय समय सीमा तक पंजीकरण कराने के लिए दोबारा पत्र लिखा गया है।