फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   In Gorakhpur, Former Executive Director of AIIMS, Dr. GK Pal did not get relief even from CAT

गोरखपुर एम्स: पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. जीके पाल को कैट से भी नहीं मिली राहत, जानिए किस मामले में हटाए गए थे

Sat, 16 Nov 2024 04:14 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Sat, 16 Nov 2024 04:14 PM IST
सार

गोरखपुर एम्स के प्रभारी कार्यकारी निदेशक रहे डॉ. जीके पाल को 28 सितंबर को हटा दिया गया था, जबकि उनका कार्यकाल दो अक्तूबर तक था। कार्यकारी निदेशक पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे डॉ. औरव पाल को एम्स गोरखपुर के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एमडी की पढ़ाई के लिए रिक्त सीट पर दाखिला दिलाया। यह सीट पिछड़ी जाति के निम्न आय वर्ग के लिए आरक्षित थी।

विज्ञापन
In Gorakhpur, Former Executive Director of AIIMS, Dr. GK Pal did not get relief even from CAT
गोरखपुर एम्स - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर। कार्यकारी निदेशक पद पर रहते हुए बेटे को गलत जाति प्रमाणपत्र के आधार पर एमडी में एडमिशन देने के मामले में हटाए गए डॉ. जीके पाल को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) से भी राहत नहीं मिली। बृहस्पतिवार को मामले की सुनवाई के दौरान डॉ. जीके पाल के वकील ने यह तर्क रखा कि बेटे की गलती की सजा पिता को नहीं दी जा सकती।

विज्ञापन


लेकिन ट्रिब्यूनल इस तर्क से सहमत नहीं हुआ। अगली सुनवाई सात जनवरी को होगी। मामले से संबंधित पक्षों को चार सप्ताह में अपना पक्ष दाखिल करना होगा।

डॉ. जीके पाल की तरफ से प्रस्तुत अधिवक्ता ने ट्रिब्यूनल के सदस्यों कुमार राजेश चंद्र और राजवीर सिंह वर्मा के सामने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि एम्स में निदेशक का पद भी सरकारी सेवा के अधीन नहीं है। दूसरे यह कि बेटे की गलती के लिए पिता को सजा नहीं दी जा सकती।
विज्ञापन


मामले की सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल सदस्यों ने कहा कि यह प्रकरण सामान्य स्थानांतरण से संबंधित नहीं है। इसलिए ट्रिब्यूनल इस प्रकरण में हस्तक्षेप को इच्छुक नहीं है। आवेदक भी स्वास्थ्य मंत्रालय के निर्देश पर पांच नवंबर को ही मंत्रालय में अपनी उपस्थिति की सूचना दे चुका है। ऐसे में इस प्रकरण में किसी प्रकार के स्थगन आदेश की जरूरत नहीं है। इस प्रकरण से जुड़े पक्षों को चार सप्ताह में अपना पक्ष रखना होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन


कम आय दर्शाने के चक्कर में फंस गया मामला
गोरखपुर एम्स के प्रभारी कार्यकारी निदेशक रहे डॉ. जीके पाल को 28 सितंबर को हटा दिया गया था, जबकि उनका कार्यकाल दो अक्तूबर तक था। कार्यकारी निदेशक पर आरोप है कि उन्होंने अपने बेटे डॉ. औरव पाल को एम्स गोरखपुर के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में एमडी की पढ़ाई के लिए रिक्त सीट पर दाखिला दिलाया।

यह सीट पिछड़ी जाति के निम्न आय वर्ग के लिए आरक्षित थी। इसके लिए डॉ. औरव पाल ने बिहार के पटना जिले से जारी प्रमाण पत्र जमा कराया था। यह प्रमाण पत्र आठ लाख से कम आय वर्ग के आधार पर बना था। मामले के शिकायतकर्ता एम्स गोरखपुर के सर्जरी विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. गौरव गुप्ता ने आरोप लगाया था कि डॉ. जीके पाल और उनकी पत्नी डॉ. पार्वती पाल की सालाना इनकम एक करोड़ से अधिक है।


खुद डॉ. जीके पाल ने भी माना था कि उनकी व पत्नी की मिलाकर आमदनी 48 लाख से अधिक है। जबकि, बेटे का प्रमाणपत्र आठ लाख से कम आय के आधार पर बना था। मामले की जांच के बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉ. जीके पाल को पहले एम्स गोरखपुर और फिर एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक पद से हटा दिया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed