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आज भी मौजूद हैं प्रमाण: महाभारत से जुड़ी है इस सरोवर की कहानी, महाबली भीम ऐसे सोएं कि बन गया तालाब

Sun, 21 May 2023 06:28 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sun, 21 May 2023 06:28 AM IST
सार

गोरखनाथ मंदिर का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है। इसका जीता जागता प्रमाण गोरखनाथ मंदिर परिसर में महाबली भीम की लेटी हुई विशाल प्रतिमा है। दरअसल मध्यकालीन समय में, इस शहर को मध्यकालीन हिंदू संत गोरक्षनाथ के नाम पर गोरखपुर नाम दिया गया था।

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gorakhnath bhim sarowar special story in gorakhpur
gorakhnath temple - फोटो : आनंद चौधरी।

विस्तार

उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक भीम सरोवर बना हुआ है। यह सरोवर और कही नहीं बल्कि गोरखनाथ मंदिर के अंदर ही है। लोग इस सरोबर को देखने दूर-दूर से आते हैं। दरअसल, इसकी कहानी बड़ी दिलचस्प है। यह कहानी महा बलशाली भीम से जुड़ी हुई है।  

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गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर के प्रांगण में छोटा सा एक मंदिर बलशाली भीम का है। वह यहां आकर थक कर सो गए थे और जहां भीम सोए थे वहां तालाब बन गया था।

जी हां, पांडू पुत्र और राजा युधिष्ठिर के छोटे भाई महाबली भीम की प्रतिमा गोरखनाथ मंदिर की एक खास पहचान है। किवदंती के अनुसार महाबली भीम गुरु गोरक्षनाथ को निमंत्रित करने के लिए खुद गोरखपुर आए हुए थे।
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भीम सरोवर की बगल में गोरखनाथ मंदिर। - फोटो : अमर उजाला

गोरखनाथ मंदिर का इतिहास महाभारत काल से भी जुड़ा हुआ है। इसका जीता जागता प्रमाण गोरखनाथ मंदिर परिसर में महाबली भीम की लेटी हुई विशाल प्रतिमा है। दरअसल मध्यकालीन समय में, इस शहर को मध्यकालीन हिंदू संत गोरक्षनाथ के नाम पर गोरखपुर नाम दिया गया था।

 

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लेटे हुए महाबली भीम। - फोटो : अमर उजाला।
हालांकि गोरक्षनाथ की जन्म तिथि अभी तक स्पष्ट नहीं है, तथापि जनश्रुति यह भी है कि महाभारत काल में युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ का निमंत्रण देने उनके छोटे भाई भीम स्वयं यहां आएं थे। चूंकि गोरक्षनाथ जी उस समय समाधिस्थ थे, अत: भीम ने यहां कई दिनों तक विश्राम किया था। उनकी विशालकाय लेटी हुई प्रतिमा आज भी हर साल तीर्थयात्रियों की एक बड़ी संख्या को अपनी ओर आकर्षित करती है।
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